राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के व्यापक टैरिफ को रद्द करने के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में तेजी आई, लेकिन एआई से होने वाली व्यवधान की लगातार चिंताओं के कारण आईटी शेयरों पर दबाव बना रहा और यह तेजी सीमित रही। हालांकि ट्रंप ने सभी देशों से आयात पर 15 फीसदी का नया अस्थायी टैरिफ लगाया है। व्यापार मंत्रालय के एक सूत्र के हवाले से बताया गया है कि भारत ने इस सप्ताह वॉशिंगटन में एक व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजने की योजना को स्थगित कर दिया है।
प्रतिनिधिमंडल अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत की खातिर रवाना होने वाला था, जिसके तहत भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी किया जाना था। भारत की प्रभावी टैरिफ दर अब 11 से 13 फीसदी रहने की संभावना है।
एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज ने कहा कि इसकी तुलना चीन से की जाए तो यह काफी बेहतर स्थिति है, जिसकी प्रभावी दर 15 फीसदी से ऊपर होने की संभावना है जबकि अधिकांश अन्य एशियाई देशों की प्रभावी टैरिफ दरें भारत के समान होंगी।
बेंचमार्क निफ्टी 50 0.55 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 25,713 पर बंद हुआ जबकि बीएसई सेंसेक्स 0.58 फीसदी के इजाफे के साथ 83,294.66 पर टिका। स्मॉल-कैप में 0.3 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि मिड-कैप में 0.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
16 प्रमुख सेक्टर में से तेरह में तेजी देखी गई, जिनमें वित्तीय क्षेत्र के दिग्गज शेयरों और सरकारी बैंकों में क्रमशः 0.9 फीसदी और 1.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। आईटी सूचकांक में 1.4 फीसदी की गिरावट आई, जिससे सालाना आधार पर इसकी गिरावट 16.7 फीसदी पर पहुंच गई। जेफरीज ने एआई टूल्स के कारण आईटी कारोबार में संभावित संरचनात्मक परिवर्तनों को लेकर चिंताओं के चलते टीसीएस और इन्फोसिस सहित छह भारतीय आईटी कंपनियों की रेटिंग घटा दी।
इन्फोसिस और विप्रो के शेयरों में 1.9 फीसदी की गिरावट आई जबकि एम्फैसिस और कोफोर्ज के शेयरों में क्रमशः 2.7 फीसदी और 3.9 फीसदी की फिसलन दर्ज हुई। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयर 16.1 फीसदी गिर गए और निफ्टी 500 कंपनियों में सबसे ज्यादा नुकसान वाली कंपनी रही। बैंक ने कहा कि वह हरियाणा में सरकारी संस्थाओं के खातों से जुड़े कुछ कर्मचारियों द्वारा 6.5 करोड़ डॉलर की संदिग्ध धोखाधड़ी की जांच कर रहा है।
एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक के शेयरों में 5.2 फीसदी की गिरावट आई क्योंकि इसे हरियाणा सरकार के साथ कारोबार करने वाले बैंकों की सूची से हटा दिया गया।