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औपनिवेशिक छाप से मुक्ति! राष्ट्रपति भवन से हटी लुटियंस की प्रतिमा, उनकी जगह अब विराजे ‘राजाजी’

राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में पहले भारतीय गवर्नर जनरल राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया औपनिवेशीकरण की स्मृतियों से मुक्ति

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एजेंसियां   
Last Updated- February 23, 2026 | 10:56 PM IST

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में स्वतंत्र भारत के पहले और इकलौते भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा नई दिल्ली में कई इमारतों के मुख्य वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर लगाई गई है। राष्ट्रपति सचिवालय ने कहा कि यह पहल औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को मिटाने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की श्रृंखला का हिस्सा है।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन सहित अन्य लोगों की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने अशोक मंडप के पास राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया। राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि यह पहल औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को मिटाने और भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत, शाश्वत परंपराओं को गर्व से अपनाने तथा भारत माता की सेवा में असाधारण योगदान देने वालों को सम्मानित करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की श्रृंखला का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को इस अवसर पर भेजे अपने संदेश में कहा कि राजाजी और महात्मा गांधी के बीच गहरे आपसी विश्वास और मित्रता से चिह्नित घनिष्ठ संबंध थे जो सर्वविदित है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के समक्ष प्रधानमंत्री मोदी का संदेश केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पढ़ा। मोदी ने अपने संदेश में कहा, ‘इसलिए, महात्मा गांधी की प्रतिमा के ठीक सामने राजाजी की प्रतिमा स्थापित करना उचित है। इसके अलावा, यह तथ्य कि राजाजी की प्रतिमा उस स्थान पर स्थापित की जाएगी, जहां पहले एडविन लुटियंस की प्रतिमा हुआ करती थी, एक महत्त्वपूर्ण विवरण है, यह औपनिवेशीकरण की स्मृतियों से मुक्ति का एक महत्त्वपूर्ण कार्य है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक केंद्रीय प्रांगण में राष्ट्रपति द्वारा राजगोपालाचारी, जिन्हें व्यापक रूप से राजाजी के नाम से जाना जाता है, की प्रतिमा का अनावरण भारत की जनता के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा, ‘आज राष्ट्रपति भवन सत्ता का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता में निहित लोकतांत्रिक आत्मविश्वास का प्रत्यक्ष प्रतीक है। ‘राजाजी उत्सव’ और श्री सी. राजगोपालाचारी जी की प्रतिमा के अनावरण जैसी पहल इस दिशा को और मजबूत करती हैं। ये उन नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करती हैं जिन्होंने राष्ट्र का सह-निर्माण किया और हमें याद दिलाती हैं कि उनकी स्मृति का उत्सव मनाकर ही स्वतंत्रता को कायम रखा जा सकता है।’

रविवार को प्रधानमंत्री ने अपने ‘मन की बात’ संबोधन में कहा था कि राजाजी की प्रतिमा का अनावरण औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को मिटाने की दिशा में उठाया गया एक कदम है। अनावरण समारोह के बाद मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (आरबीसीसी) में आयोजित राजाजी उत्सव में शिरकत की, जहां उन्होंने राजगोपालाचारी के जीवन और कार्यों पर आधारित फोटो एवं पुस्तक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जब राजाजी गवर्नमेंट हाउस (जिसे अब राष्ट्रपति भवन के नाम से जाना जाता है) पहुंचे, तो उन्होंने अपने कमरे में रामकृष्ण परमहंस और महात्मा गांधी के चित्र लगवाए थे।

First Published : February 23, 2026 | 10:56 PM IST