प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
पिछले एक दशक में किसी कंपनी के यूनिकॉर्न दर्जा हासिल करने की दर वैश्विक स्तर पर लगभग 40 गुना बढ़ गई है। वर्ष 2003 से 2013 के बीच औसतन चार कंपनियां प्रति वर्ष यूनिकॉर्न बनती थीं, जबकि यह आंकड़ा 2014 से 2024 के बीच बढ़कर 148 पहुंच गया है। वैश्विक शुरुआती चरण की वेंचर कैपिटल फर्म एंटलर की रिपोर्ट के अनुसार, यूनिकॉर्न बनने में लगने वाला औसत समय छह से सात साल पर स्थिर रहा है। हालांकि एआई कंपनियों का मामला अलग है, जो अब औसतन 4.7 वर्षों में ही यह मील का पत्थर छू लेती हैं।
द एनाटॉमी ऑफ ग्रेटनेस नामक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी संस्थापकों की उम्र में अब बदलाव दिख रहा है। पहले जहां यूनिकॉर्न संस्थापक की औसत उम्र 30 वर्ष होती थी, वह अब बढ़कर 33 साल हो गई है। इसके विपरीत, एआई-यूनिकॉर्न संस्थापक कम उम्र के हो गए हैं। वर्ष 2020 में 40 पार के लोग ही एआई-यूनिकॉर्न के मालिक हुआ करते थे, लेकिन 2024 में औसत उम्र घटकर 29 हो गई है।
रिपोर्ट में इस दशक भर के अध्ययन के दौरान 2014 और 2024 के बीच 1,629 यूनिकॉर्न कंपनियों और 3,512 संस्थापकों का विश्लेषण किया गया है। इसमें यूनिकॉर्न बनने की भौगोलिक स्थिति पर भी प्रकाश डाला गया है। वर्ष 2010 की शुरुआत में जहां आठ देशों के 30 शहरों में ही यूनिकॉर्न कंपनियां स्थापित थीं, अब 2014 से 2024 के बीच यह स्थिति बदली है और यूनिकॉर्न कंपनियां 45 देशों के 300 से ज्यादा शहरों तक फैल गई हैं। अमेरिका यूनिकॉर्न कंपनियों का भले ही अभी भी प्रमुख केंद्र बना हुआ है, लेकिन उसकी हिस्सेदारी दो तिहाई से घटकर अब लगभग आधी रह गई है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत में भी खूब यूनिकॉर्न फलफूल रहे हैं। यहां 2014 और 2024 के बीच 109 यूनिकॉर्न तैयार किए हैं। बेंगलुरु (46 यूनिकॉर्न), मुंबई (19) और गुरुग्राम (15) जैसे शहर प्रमुख यूनिकॉर्न हब के रूप में उभर कर सामने आए हैं।