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एक्सचेंजों और अन्य बाजार संस्थाओं के लिए बन रहा तकनीकी रोडमैप, निगरानी में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर जोर

सेंसेक्स के 40 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित समारोह में पांडेय ने निगरानी के लिए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस टूल विकसित करने की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी

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खुशबू तिवारी   
Last Updated- January 02, 2026 | 9:55 PM IST

सेबी स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और डिपॉजिटरी जैसे मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर संस्थानों (एमआईआई) के लिए प्रौद्योगिकी रोडमैप विकसित करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए वह एक कार्यसमूह की योजना बना रहा है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

सेंसेक्स के 40 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित समारोह में पांडेय ने निगरानी के लिए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस टूल विकसित करने की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा, सेबी एमआईआई के लिए प्रौद्योगिकी रोडमैप विकसित करने के लिए कार्यकारी समिति गठित करने की प्रक्रिया में है। यह रोडमैप एमआईआई को प्रतिभूति बाजार से जुड़े समूचे तंत्र के लिए एक ढांचा मुहैया कारएगा, साथ ही पांच और दस साल के लिहाज से प्रौद्योगिकी संबंधी विजन भी देगा।

एमआईआई को मजबूत करने पर जोर देते हुए सेबी चेयरमैन ने तेजी से विकसित हो रहे बाजार इकोसिस्टम के अनुरूप प्रौद्योगिकी, जोखिम प्रबंधन और साइबर मजबूती में निवेश का आह्वान किया। पांडेय ने नवाचार के साथ-साथ निवेशक संरक्षण पर जोर दिया और कहा कि बाजार के विकास का अगला चरण न केवल आकार से बल्कि गुणवत्ता जैसी चीजों से भी परिभाषित होगा।

सेबी के चेयरमैन ने नियामक के प्रौद्योगिकी-आधारित उपायों का भी विस्तार से ब्योरा दिया। इनमें जालसाजों का पता लगाने के लिए एआई-संचालित बाजार निगरानी प्रणाली, परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों के विज्ञापनों की निगरानी और विश्लेषण के लिए एआई-संचालित विज्ञापन दर्शक और सूचीबद्ध संस्थाओं के खुलासों की निगरानी के लिए टूल शामिल हैं।

पांडेय ने कहा, नियामक के तहत आने वाली इकाइयों की जोखिम-आधारित निगरानी मजबूत करने के लिए एआई-संचालित निरीक्षण टूल विकसित किया जा रहा है। यह टूल साइबर ऑडिट रिपोर्टों का विश्लेषण करेगा, नियंत्रण की कमियों को बताएगा और जोखिम के आधार पर संस्थाओं को वर्गीकृत करेगा, जिससे निगरानी मजबूत होगी।

सेंसेक्स के सफर पर सेबी के चेयरमैन ने कहा, पिछले चार दशकों में सेंसेक्स एक मजबूत बाजार सूचक के रूप में समय की कसौटी पर खरा उतरा है। वह भारत के आर्थिक परिवर्तन और हमारे पूंजी बाजारों की बढ़ती परिपक्वता दर्शाता है। जैसे-जैसे भारत में उदारीकरण आया और वह वैश्विक बाजारों के साथ जुड़ा, यह सूचकांक भी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ विकसित हुआ।

उन्होंने कहा कि सूचकांक की बदलती संरचना निजी उद्यमों के उदय, पारंपरिक उद्योगों से सेवाओं, वित्त और प्रौद्योगिकी की ओर बदलाव और घरेलू बाजारों तथा वैश्विक पूंजी के बीच गहरे संबंधों को दर्शाती है।

सेबी प्रमुख ने विश्व युद्धों, डॉट कॉम बुलबुले के फटने और कोविड-19 जैसे वैश्विक संकटों में भारतीय बाजार तंत्र की मजबूती का जिक्र करते हुए कहा, स्थायी बाजार क्षणिक ऊंचाइयों या आशावाद के चक्रों पर नहीं बनते। वे प्रेरणा देने वाली संस्थाओं, बाजारों और प्रणालियों में विकसित होने वाले नियमों और फिर निरंतर अनुकूलन और उन्नयन पर आधारित होते हैं।

बिजनेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए बीएसई के एमडी और सीईओ सुंदरारमन राममूर्ति ने कहा, भारतीय बाजार आज ऐसे मुकाम पर हैं, जहां पूंजी सृजन और बाजार विकास में आम आदमी की भागीदारी जरूरी है। मेरे विचार से आम आदमी के लिए बाजार में अपना और देश का योगदान देने का सबसे सुरक्षित तरीका सूचकांकों में निवेश करना है।

First Published : January 2, 2026 | 9:48 PM IST