सरकार ने छोटे निर्यातकों को राहत प्रदान करने और ऋण तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए आज 7,295 करोड़ रुपये के निर्यात सहायता पैकेज की घोषणा की। इसमें 5,181 करोड़ रुपये की ब्याज सहायता योजना और निर्यात ऋण के लिए 2,114 करोड़ रुपये का गारंटी समर्थन शामिल है। दोनों उपाय वित्त वर्ष 2026-31 तक छह साल के लिए लागू रहेंगे।
ब्याज सहायता योजना के तहत निर्यातकों को निर्यात से पहले और निर्यात के बाद ऋण पर सब्सिडी मिलेगी। इससे सूक्ष्म, लघु और मझोले उपक्रम निर्यातकों को बाजार दर से कम ब्याज पर निर्यात ऋण उपलब्ध होगा। इस योजना के लिए छह साल के दौरान 5,181 करोड़ रुपये खर्च करने का बजट रखा गया है। शुरुआत में 830 करोड़ रुपये का बकाया चुकाया जाएगा। चालू वित्त वर्ष में सरकार को दोनों योजनाओं के तहत 400 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है।
वाणिज्य विभाग ने एक बयान में कहा, ‘ब्याज में 2.75 फीसदी की बुनियादी रियायत दी गई है, जिसमें कम प्रतिनिधित्व या उभरते बाजारों के तहत अधिसूचित बाजारों में निर्यात के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का भी प्रावधान है। हालांकि यह परिचालन की तैयारियों पर निर्भर करेगा।’ ये योजनाएं 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात संवर्धन मिशन का हिस्सा है जिसे नवंबर में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी।
सरकारी अधिकारियों ने कहा कि ब्याज में रियायत की यह योजना, ब्याज समानीकरण योजना (आईईएस) का नया संस्करण है जिसे 31 दिसंबर, 2024 के बाद बंद कर दिया गया था। अपने मौजूदा रूप में यह योजना मुख्य रूप से छोटे निर्यातकों पर ध्यान केंद्रित करेगी और इसकी पात्रता के लिए सालाना कारोबार की सीमा होगी। सरकार के अनुसार इसका मकसद सभी या ज्यादातर निर्यातकों को शामिल करना नहीं बल्कि प्रतिकूल वैश्विक व्यापार परिस्थितियों के बीच छोटे और पहली बार निर्यात करने वाले निर्यातकों की कार्यशील पूंजी की दिक्कतों को दूर करना है।
वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अजय भादू ने बताया कि नए और उभरते बाजारों में निर्यात करने वाले एमएसएमई के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन होगा और यह योजना कुल शुल्क लाइन का 75 फीसदी कवर करेगी। उन्होंने कहा कि उत्पादों को एक मजबूत तरीके से चुना गया, जिसमें श्रम प्रधान और ज्यादा पूंजी निवेश वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई।
वाणिज्य विभाग के मुताबिक घरेलू और वैश्विक बेंचमार्क के आधार पर साल में दो बार मार्च और सितंबर में रियायती ब्याज दर की समीक्षा की जाएगी। प्रति फर्म वार्षिक लाभ की सीमा 50 लाख रुपये तय की गई है। इस योजना के विस्तृत दिशानिर्देश भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी किए जाएंगे। योजना की कार्यान्वयन एजेंसी आरबीआई है।
सरकार ने निर्यात ऋण के लिए 2,114 करोड़ रुपये की गारंटी सहायता की भी घोषणा की है। इसके तहत एमएसएमई निर्यातकों को निर्यात से जुड़े कार्यशील पूंजी ऋण के लिए ऋण गारंटी सहायता प्रदान की जाएगी। इस सहायता उपाय के तहत हर फर्म को 10 करोड़ रुपये तक की ऋण गारंटी दी जाएगी। सूक्ष्म और लघु निर्यातकों को 85 फीसदी तक और मझोले निर्यातकों को 65 फीसदी तक गारंटी कवरेज मिलेगा।