शेयर बाजार

ट्रंप की चेतावनी से चावल कंपनियों के शेयर लड़खड़ाए, 10% तक फिसले; क्या है मामला ?

Rice Stocks: चमन लाल सेतिया एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के शेयर में भी गिरावट दर्ज की गई और यह 5 फीसदी टूट गया। इसके अलावा कावेरी सीड कंपनी और जीआरएम ओवरसीज लिमिटेड के शेयर भी फिसल गए

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जतिन भूटानी   
Last Updated- December 09, 2025 | 10:16 AM IST

Rice Stocks: भारतीय चावल कंपनियों के शेयरों में मंगलवार (9 दिसंबर) को बाजार खुलते ही बड़ी गिरावट देखने को मिली। केआरबीएल, एलटी फूड्स और जीआरएम जैसी चावल कंपनियों के शेयर 10 फीसदी तक गिर गए। राईस स्टॉक्स में यह गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) के ताजा बयान के चलते आई है।

ट्रंप के बयान के चलते चावल कंपनियों के शेयर लड़खड़ा गए। सबसे ज्यादा गिरावट एलटी फूड्स के शेयर में देखने को मिली। यह 8 फीसदी गिरकर 362 रुपये के इंट्रा-डे लो पर आ गया। केआरबीएल के शेयर 3 फीसदी तक फिसल गए। हालांकि, बाद में शेयर में रिकवरी भी देखने को मिली। इसके अलावा कोहिनूर फूड्स के शेयर 10 फीसदी गिर गए।

वहीं, चमन लाल सेतिया एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के शेयर में भी गिरावट दर्ज की गई और यह 5 फीसदी टूट गया। इसके अलावा कावेरी सीड कंपनी और जीआरएम ओवरसीज लिमिटेड के शेयर भी फिसल गए।

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ट्रंप ने क्या कहा ?

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि वे अग्रि प्रोडक्ट्स के आयात पर नए टैरिफ लगा सकते हैं। खासकर भारत से आने वाले चावल और कनाडा से आयात होने वाले फर्टिलाइजर पर। उनका कहना था कि ये आयात अमेरिकी किसानों के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं और इसे लेकर कदम उठाना जरूरी है।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी किसानों के लिए 12 अरब डॉलर के सहायता पैकेज की घोषणा करते हुए कहा कि भारत से आयातित चावल को लेकर वे “सावधानी बरतेंगे”। उन्होंने कहा कि अमेरिका के किसान चावल की गिरती कीमतों से चिंतित हैं, क्योंकि भारत, थाईलैंड और वियतनाम से आने वाला चावल उनकी उपज की कीमत को प्रभावित कर रहा है।

ट्रंप ने कहा, “ऐसा नहीं होना चाहिए कि ये चावल बाजार में सस्ते दाम पर बेचा जाए। मुझे यह शिकायतें किसानों से मिली हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।”

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भारत-यूएस ट्रेड डील पर बढ़ी चिंता

ट्रंप के ताजा बयान के बाद भारत और अमेरिका के बीच जल्द ट्रेड डील होने की संभावनाओं को झटका लगा है। इस साल की शुरुआत में ट्रम्प ने भारत से आयातित सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। उनका आरोप था कि भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदा और इस तरह रूस के खिलाफ युद्ध में फंडिंग की। हालांकि, इसके बाद दोनों देशों ने व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश की।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 7 दिसंबर को भारत पहुंचा और एक और दौर की वार्ता की। हालांकि अधिकारियों का अनुमान है कि इस दौर में कोई बड़ा समझौता नहीं होगा। अमेरिकी उप विदेश सचिव एलिसन हुकर पांच दिन की यात्रा पर भारत में हैं, ताकि द्विपक्षीय रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत किया जा सके।

First Published : December 9, 2025 | 10:15 AM IST