Economic Survey 2026: वित्त वर्ष 2025–26 में प्राइमरी कैपिटल मार्केट्स का प्रदर्शन मजबूत रहा। अनिश्चित वैश्विक माहौल के बावजूद भारत आईपीओ के मामले में दुनिया में आगे रहा। बजट से पहले गुरुवार को जारी इकोनॉमिक सर्वे में यह बात कही गई।
सर्वे के अनुसार, मजबूत आर्थिक बुनियाद, घरेलू निवेशकों की अच्छी भागीदारी और सेबी की तरफ से लगातार रेगुलेटरी सुधारों के चलते बाजार मजबूत बने रहे। सर्वे में कहा गया कि यह सब ऐसे समय में हुआ, जब दुनिया भर में ट्रेड परेशानियों, कैपिटल फ्लो में उतार-चढ़ाव और कंपनियों के कमजोर नतीजों से माहौल प्रभावित हो रखा था।
सर्वे में कहा गया कि भले ही वित्त वर्ष 2025–26 अब तक वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं और फाइनेंशियल मार्केटस के लिए चुनौतीपूर्ण रहा हो, लेकिन भारत के शेयर बाजारों ने संतुलित और मजबूत प्रदर्शन दिखाया। इसके पीछे सपोर्ट वाली पॉलिसीस, अनुकूल आर्थिक हालात और घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी रही।
हालांकि, अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने, वित्त वर्ष 2025–26 की पहली तिमाही में उम्मीद से कमजोर कंपनियों के नतीजों और विदेशी निवेशकों की निकासी से बाजार की धारणा पर दबाव पड़ा। इसके बावजूद, इनकम टैक्स में कटौती, जीएसटी रेशनलाइजेशन, ब्याज दरों में कमी, महंगाई में नरमी और दूसरी तिमाही में कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन जैसे कदमों से बाजार को संभलने में मदद मिली।
अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान निफ्टी 50 में करीब 11.1 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स में करीब 10.1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। यह पिछले वित्त वर्ष की तेज तेजी के बाद सुधार और स्थिरता का दौर रहा।
सर्वे में कहा गया कि प्राइमेरी मार्केटस में घरेलू और विदेशी निवेशकों की रुचि बनी रही। इससे वैश्विक पूंजी जुटाने में भारत की भूमिका और मजबूत हुई। वित्त वर्ष 2025–26 में (दिसंबर 2025 तक) कर्ज और इक्विटी के जरिये प्राइमेरी मार्केटस से कुल 10.7 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए।
इस दौरान आईपीओ की संख्या पिछले वित्त वर्ष से 20 प्रतिशत ज्यादा रही, जबकि जुटाई गई राशि में 10 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हुई। मेनबोर्ड पर लिस्ट होने वाली कंपनियों की संख्या बढ़कर 94 हो गई, जो एक साल पहले 69 थी। जुटाई गई राशि 1.46 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.60 लाख करोड़ रुपये हो गई।
वित्त वर्ष 2025–26 के आईपीओ की एक खास बात यह रही कि ऑफर फॉर सेल (OFS) का हिस्सा ज्यादा रहा। कुल जुटाई गई राशि का 58 प्रतिशत ओएफएस से आया, यानी मौजूदा शेयरधारकों ने बड़ी हिस्सेदारी बेची।
मेनबोर्ड के अलावा, एसएमई का बाजार भी मजबूत रहा। वित्त वर्ष 2025–26 में (दिसंबर 2025 तक) 217 एसएमई कंपनियां लिस्ट हुईं। जबकि एक साल पहले यह संख्या 190 थी। एसएमई आईपीओ से जुटाई गई राशि 7,453 करोड़ रुपये से बढ़कर 9,635 करोड़ रुपये हो गई।
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सर्वे में कहा गया कि जैसे-जैसे बाजार गतिविधियां बढ़ रही हैं और नए साधन व संस्थाएं सामने आ रही हैं, वैसे-वैसे मजबूत नियामकीय व्यवस्था बेहद जरूरी हो जाती है। इसी दिशा में दिसंबर 2025 में लोकसभा में पेश किया गया सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड, 2025 एक अहम कदम है।
सर्वे में यह भी बताया गया कि घरों की वित्तीय बचत अब तेजी से बाजार से जुड़े निवेशों, खासकर शेयरों की ओर बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025–26 में (दिसंबर 2025 तक) 2.35 करोड़ नए डीमैट खाते जुड़े। इससे कुल संख्या 21.6 करोड़ से ज्यादा हो गई। सितंबर 2025 में यूनिक निवेशकों की संख्या 12 करोड़ के पार पहुंच गई, जिनमें लगभग एक-चौथाई महिलाएं थीं।
म्यूचुअल फंड उद्योग में भी लगातार मजबूती आई। दिसंबर 2025 तक इसमें 5.9 करोड़ यूनिक निवेशक थे। इनमें से ज्यादातर निवेशक बड़े शहरों के बाहर के इलाकों से थे, जिससे देशभर में वित्तीय भागीदारी बढ़ने का संकेत मिलता है।
सर्वे के अनुसार, घरों की सालाना फाइनेंशियल सेविंग्स में इक्विटी और म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2011–12 में 2 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 2024–25 में बढ़कर 15.2 प्रतिशत से ज्यादा हो गई। इसके साथ ही सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में निवेश भी लगातार बढ़ा है।