आर्थिक समीक्षा में उल्टे शुल्क ढांचे में सुधार का समर्थन करते हुए इसे घरेलू लागत प्रतिस्पर्धा और वैश्विक उत्पादन का आधार बनने की राह में सबसे बड़ी बाधा करार दिया गया है। इलेक्ट्रानिक्स उद्योग ने भी वित्त मंत्रालय से उल्टे शुल्क ढांचे में सुधार की मांग की है। समीक्षा में मोबाइल फोन और उनके पुर्जों के निर्माण के लिए आवश्यक विशेष पूंजीगत वस्तुओं पर शुल्क को तार्किक बनाए जाने के उद्योग के मांग का समर्थन किया है। साथ ही लचीले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली, माइक्रोफोन, रिसीवर और स्पीकर जैसे प्रमुख घटकों पर शुल्क को युक्तिसंगत बनाने का समर्थन किया गया है।
समीक्षा में कहा गया है कि हाल के भू राजनीतिक बदलाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के पुनर्गठन से श्रम बहुलता वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिए अवसर बढ़ा है, जिससे वैश्विक मूल्य श्रृंखला में वे खुद को प्रतिस्पर्धी असेंबली और विनिर्माण आधार के रूप में स्थापित कर सकें।
समीक्षा में कहा गया है कि अंतिम उत्पादों की तुलना में मध्यवर्ती व पूंजीगत वस्तुओं पर आयात शुल्क अधिक रखने से उल्टे शुल्क ढांचे की स्थिति हो सकती है, जिससे घरेलू विनिर्माताओं के लिए इनपुट लागत बढ़ेगी और असेंबली और कंपोनेंट विनिर्माता हतोत्साहित होंगे।
इसमें सुझाव दिया गया है कि इनपुट शुल्क तटस्थता पर नजर बनाए रखने से संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं और आगे चलकर उच्च वृद्धि वाले क्षेत्रों में मध्यस्थों और पूंजीगत वस्तुओं पर धीरे धीरे शुल्क बढ़ाने से लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और इससे एसेंबली और पुर्जों के विनिर्माण का बेहतर वातावरण बन सकता है और भारत को वैश्विक उत्पादन का केंद्र बनाने के मकसद को समर्थन मिल सकता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग ने इंडिया सेल्युलर ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) के माध्यम से लागत प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने, नौकरियों का विस्तार करने, निर्यात बढ़ाने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए 3 प्रमुख नीतिगत मुद्दों पर बजट पूर्व सुझाव दिया है और प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ मंत्रालय से इस सिलसिले में अनुरोध किया है। इसमें उल्टे शुल्क ढांचे का सुधार, स्थायी प्रतिष्ठान से संबंधित कर कानूनों का सुधार और भारत में निर्मित नहीं होने वाले विशेष इनपुट के लिए शुल्क को युक्तिसंगत बनाना शामिल है।