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Economic Survey 2026: ई-वे बिल को प्रवर्तन नहीं, बाधारहित लॉजिस्टिक्स सुविधा के रूप में देखने का सुझाव

ई-वे बिल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के सामान की आवाजाही पर नजर रखने के लिए एक अनिवार्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज है

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मोनिका यादव   
Last Updated- January 29, 2026 | 10:17 PM IST

आर्थिक समीक्षा में ई-वे बिल व्यवस्था को प्रवर्तन व्यवस्था के बजाय बाधारहित लॉजिस्टिक्स सुविधा प्रदान करने की सेवा के रूप में देखने की परिकल्पना का सुझाव दिया गया है। इसके तहत व्यापार के लिए व्यवधानों को कम करने के लिए भरोसे पर आधारित अनुपालन और उन्नत तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। ई-वे बिल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के सामान की आवाजाही पर नजर रखने के लिए एक अनिवार्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज है।

समीक्षा में भरोसे पर आधारित मॉडल पर निर्भर डिजाइन का प्रस्ताव किया गया है, जिसमें ‘भरोसेमंद डीलर’ ढांचा शामिल है। इसके तहत बेहतर अनुपालन रिकॉर्ड वाले करदाताओं की न्यूनतम भौतिक जांच होती है। इसमें अनुपालन करने वाले कारोबारियों को सामान की आवाजाही में अधिक निश्चिंतता मिल सकेगी।

समीक्षा में सड़कों पर रोककर जांच किए बगैर सुरक्षित, एंड-टु-एंड निगरानी के लिए ई-वे बिलों के साथ ई-सीलों, इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम और वाहन ट्रैकिंग जैसी तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने की भी सिफारिश की गई है।

2017 से भौतिक अंतरराज्यीय चेक पोस्ट को खत्म करने में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की सफलता पर प्रकाश डालते हुए समीक्षा में कहा गया है कि सीमा पर बैरियर का प्रावधान किए बगैर सामान की आवाजाही पर नजर रखने में ईवे बिल बहुत प्रभावी विकल्प साबित हुआ है। हालांकि इसमें बताया गया है कि आंतरिक बिंदुओं पर मोबाइल पर आधारित जांच से कभी-कभी अनावश्यक देरी और अनुपालन संबंधी कठिनाइयां हो सकती हैं।

राजकोषीय विकास नाम के अध्याय में समीक्षा में कहा गया है, ‘ऐसे में जीएसटी सुधारों के अगले चरण में ईवे बिल व्यवस्था को सुविधा प्रदाता के रूप में नए सिरे से परिकल्पित करने पर ध्यान दिया जा सकता है, न कि सिर्फ प्रवर्तन और नियंत्रण के साधन के रूप में। यह व्यवस्था व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला की बदलती जरूरतों के लिए सुविधा प्रदाता के रूप में देखी जा सकती है।’

First Published : January 29, 2026 | 10:17 PM IST