पिछले साल के बजट से उभरी संतुष्टि की मजबूत भावना के बाद 2026 के केंद्रीय बजट के लिए उपभोक्ताओं का दृष्टिकोण संतुलित यथार्थवाद को दर्शाता है। कैंटार द्वारा बुधवार को जारी वार्षिक इंडिया यूनियन बजट सर्वे के पांचवें संस्करण में यह बात सामने आई है। केंद्रीय बजट रविवार, 1 फरवरी को पेश किया जाएगा।
पिछले साल के बजट से संतुष्टि की भावना मुख्य रूप से कर सुधारों के कारण उपजी थी, जो करों से परे सावधानी को भी दर्शाती है। यह आर्थिक मंदी, आय स्थिरता और भविष्य की तैयारी के बारे में चिंताओं के कारण दिखाई देती है। कैंटार द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि मुद्रास्फीति संबंधी दबाव, नौकरी सुरक्षा की चिंताएं और वैश्विक अनिश्चितताएं जैसे कारक घरेलू स्तर पर वित्तीय निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे खर्च पर संयमित रुख अपनाया जा रहा है और विवेक पर आधारित विकास पर वित्तीय स्थिरता को तरजीह दी जा रही है।’
बाजार विश्लेषक फर्म के अनुसार, आगे खासकर मध्यम वर्ग के परिवारों के बीच व्यक्तिगत कर सुधारों की मांग स्थिर बनी हुई है। सर्वे में बताया गया है कि प्रमुख उम्मीदों में मानक कटौती को 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करना और चिकित्सा तथा स्वास्थ्य बीमा पर सेक्शन 80 डिडक्शंस ऐंड रीबेट्स को बढ़ाना शामिल है।
इसमें कहा गया है, ‘भारत के 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य सहित दीर्घकालिक आर्थिक महत्त्वाकांक्षाओं और स्टार्टअप तंत्र के बारे में आशावाद कुछ नरम हो गया है।’ सर्वेक्षण में शामिल किए गए 3,846 लोगों में एक तिहाई (36 प्रतिशत) से अधिक की प्रमुख चिंता नौकरी से छंटनी को लेकर है। इससे आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक तैयारी के बारे में बढ़ती बेचैनी का संकेत मिलता है।
सर्वे के अनुसार, उपभोक्ता मजबूत नियामकीय ढांचे, बेहतर कौशल विकास पहलों और स्पष्ट नीतियों की जरूरतों पर बल दे रहे हैं, क्योंकि भारत तेजी से कैशलेस डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर कदम बढ़ा रहा है और एआई-आधारित भविष्य अब बहुत दूर नहीं रह गया है।
कैंटार में दक्षिण एशिया के एग्जीक्यूटिव मैनेजिंग डायरेक्टर दीपेंदर राणा ने कहा, ‘पिछले कुछ वर्षों में उपभोक्ता भावना आशावाद से अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण में बदल गई है। मुद्रास्फीति और नौकरी सुरक्षा के बारे में चिंताएं लगातार बनी हुई हैं, अब वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों से स्थितियां जटिल हैं। सरकार से लक्षित सुधारों, मजबूत आर्थिक सुरक्षा उपायों और पारदर्शी संचार के माध्यम से मध्यम वर्ग और करदाताओं के साथ अधिक जुड़ाव की अपेक्षा की जा रही है।’