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पीजीआईएम इंडिया म्युचुअल फंड (पूर्व में पीजीआईएम इंडिया ऐसेट मैनेजमेंट) के मुख्य निवेश अधिकारी विनय पहाड़िया का कहना है कि साल 2025 के दौरान मूल्यांकन में कमी आई है और उनमें समय के साथ नरमी जारी रहने और आय वृद्धि में तेजी आने की संभावना के चलते और भी कमी आने की उम्मीद है। अभिषेक कुमार को ईमेल के जरिये दिए साक्षात्कार में पहाड़िया ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा, दूरसंचार, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी, निजी बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) जैसे क्षेत्र फिलहाल आकर्षक प्रतीत होते हैं।
संपादित अंश:
कई संकेतक ध्यान देने योग्य हैं। पहला है वैश्विक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) में तेजी। एआई कारोबार में किसी भी तरह की गिरावट का भारत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि के बाद अमेरिका-जापान के बीच ब्याज दर के अंतर में कमी से येन कैरी ट्रेड में कमी आने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे वैश्विक नकदी प्रवाह पर असर पड़ सकता है। घरेलू स्तर पर प्राथमिक बाजार में भारी गतिविधियां द्वितीयक बाजार के लाभ को सीमित कर सकती है जबकि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर प्रगति 2025 में नकारात्मक प्रभाव डालने के बाद अब भी एक महत्त्वपूर्ण निगरानी योग्य कारक बनी हुई है।
फंडामेंटल के आधार पर निफ्टी कंपनियों के लिए दो सुस्त वर्षों के बाद आय वृद्धि में तीव्र उछाल आने की उम्मीद है। रेटिंग में गिरावट कम होने, घरेलू मांग में सुधार और नीतिगत समर्थन के चलते भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक बना रहेगा। हमें 2026 में कुछ समय के लिए शेयरों में गिरावट की आशंका है, जिससे मूल्यांकन और भविष्य में संभावित लाभ ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं।
हमारा मानना है कि बाजारों ने भविष्य से कुछ रिटर्न उधार लिए हैं। कुल मिलाकर बाजार मूल्यांकन ऊंचा बना हुआ है, जिसमें कमजोर गुणवत्ता और कम वृद्धि वाली कंपनियों का मूल्य काफी ज्यादा है जबकि उच्च गुणवत्ता और उच्च वृद्धि वाली कंपनियां उचित मूल्यांकन पर कारोबार कर रही हैं। बाजार में स्थिरता और 2026 में आय वृद्धि के कारण मूल्यांकन में कमी आ सकती है।
पिछले कुछ वर्षों में आय वृद्धि कमजोर रही है, लेकिन इसमें तेजी आने की उम्मीद है। पिछली तिमाही में कंपनी जगत के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला है, जिसमें अल्पावधि से मध्यम अवधि में और तेजी आने की संभावना है। आय को लेकर सर्वसम्मत अनुमानों के अनुसार, बैंकिंग, दूरसंचार और कमोडिटी जैसे क्षेत्रों की अगुआई में निफ्टी की आय की रफ्तार अगले दो वर्षों में करीब 15 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के हिसाब से रहने की उम्मीद है।
वर्तमान में आप किन क्षेत्रों में संरचनात्मक रूप से ओवरवेट और किनमें अंडरवेट हैं?
स्वास्थ्य सेवा, दूरसंचार, उपभोक्ता विवेकाधीन सेवाएं, निजी बैंकिंग और गैर-सरकारी वित्तीय विभाग (एनबीएफसी) जैसे क्षेत्र आकर्षक प्रतीत होते हैं। सकारात्मक रुझानों में क्विक कॉमर्स, ऑनलाइन खाद्य वितरण, संगठित खुदरा व्यापार, इंटरनेट-आधारित विभिन्न व्यवसाय, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और अस्पताल शामिल हैं। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र अपनी औसत से अधिक वृद्धि क्षमता और पूंजी पर बेहतर प्रतिफल (ये दोनों संरचनात्मक विशेषताएं हैं) के कारण अलग दिखता है जबकि मूल्यांकन भी आकर्षक बना हुआ है। दूरसंचार क्षेत्र में अब तेजी से बिकने वाले उपभोक्ता सामानों जैसी विशेषताएं हैं और पूंजी पर प्रतिफल में तेजी से सुधार हो रहा है। भविष्य में वृद्धि की गति मुख्य रूप से बढ़ती कीमतों और डेटा खपत में वृद्धि के कारण होगी। उपभोक्ता विवेकाधीन क्षेत्र (जिसमें नई पीढ़ी की कई कंपनियां शामिल हैं) मजबूत संरचनात्मक वृद्धि क्षमता, उच्च परिचालन लिवरेज और कम पूंजी गहनता को देखते हुए आकर्षक प्रतीत होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में अनुबंध निर्माता अमेरिकी कंपनियों द्वारा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण से लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं। उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना के माध्यम से सरकारी समर्थन इस क्षेत्र के आकर्षण को और भी बढ़ाता है।
समय के साथ गिरावट से (जहां बाजार स्थिर रहता है जबकि आंतरिक मूल्य बढ़ता रहता है) मूल्यांकन ज्यादा आकर्षक हो सकता है। ऐसे चरणों में प्रतिफल का नुकसान नहीं होता बल्कि वह टल जाता है। हालांकि, परिसंपत्ति आवंटन में कोई भी बदलाव पेशेवर निवेश सलाहकार से परामर्श करके और व्यक्ति की वित्तीय योजना के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।