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निफ्टी 50 इंडेक्स में निर्यात केंद्रित सेक्टर्स का घटा भार, घरेलू मांग वाले क्षेत्र उभरे

निवेशक अब निर्यात आधारित क्षेत्रों की जगह घरेलू मांग केंद्रित कंपनियों पर लगा रहे दांव

Last Updated- October 05, 2025 | 9:58 PM IST
NSE

अमे​रिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के शुल्क की वजह से भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका को निर्यात करना कठिन हो गया है। इससे भारतीय शेयर बाजार में निर्यात केंद्रित क्षेत्र का भार घट रहा है। निफ्टी 50 सूचकांक में आईटी सेवा और फार्मा उद्योग का कुल भार घटकर 12.3 फीसदी रह गया है जो बीते 25 साल में सबसे कम है। करीब साढ़े तीन साल पहले मार्च 2022 में इन दोनों क्षेत्रों का सूचकांक में भार 22 फीसदी था। दूसरी ओर खुदरा, खाद्य वितरण सेवाओं, दूरसंचार, विमानन और अस्पतालों जैसे घरेलू मांग आधारित क्षेत्रों के भार में तेज वृद्धि हुई है।

घरेलू मांग वाले और गैर-व्यापार योग्य क्षेत्रों का निफ्टी 50 सूचकांक में कुल भार 12.9 फीसदी हो गया है, जो मार्च 2022 में 4.8 फीसदी और मार्च 2015 में 2.4 फीसदी था। सही मायने में ये घरेलू मांग आधारित क्षेत्र अब बैंकिंग, वित्त और बीमा के बाद सूचकांक में दूसरे सबसे बड़े खंड हैं। बैंकिंग, वित्त और बीमा (बीएफएसआई) का सूचकांक में सबसे अ​धिक 35.3 फीसदी भार है। बीएफएसआई ने सूचकांक में अपना प्रभुत्व बनाए रखा है और इसका भार मार्च 2024 में 8 वर्ष के निचले स्तर 30.6 फीसदी से तेजी से बढ़ा है।

सूचकांक में वाहन क्षेत्र का भार भी तेजी से बढ़ा क्योंकि वस्तु एवं सेवा कर में कटौती से निवेशकों को यात्री कारों की मांग सुधरने की उम्मीद है। सूचकांक में वाहन कंपनियों का भार इस साल मार्च के अंत में 7.4 फीसदी था जो अब बढ़कर 7.7 फीसदी हो गया है। हालांकि यह मार्च 2024 के 7.9 फीसदी से कम है।

भारती एयरटेल का सूचकांक में भार तीन प्रमुख दवा कंपनियों सिप्ला, डॉ. रेड्डीज लैब और सन फार्मास्युटिकल्स के संयुक्त भार से अधिक है। भारती एयरटेल का भार पिछले साढ़े तीन साल में दोगुना होकर मार्च 2022 के 2.3 फीसदी से बढ़कर बीते शुक्रवार को 4.6 फीसदी हो गया। इसी अवधि में फार्मा क्षेत्र का भार 3.3 फीसदी से घटकर 2.9 फीसदी रह गया।

जोमैटो और ब्लिंकइट की प्रवर्तक कंपनी इटर्नल का सूचकांक में भारती एयरटेल के बाद गैर-व्यापार योग्य क्षेत्र में दूसरा सबसे ज्यादा 2.6 फीसदी भार है। इसका भार टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनैंस, मारुति सुजूकी और टाटा मोटर्स जैसी दिग्गज कंपनियों से अधिक है। सूचकांक भार अधिक होने का मतलब है कि इटर्नल के शेयर मूल्य और बाजार पूंजीकरण में किसी भी बदलाव का अब सूचकांक के मूल्य पर अन्य कंपनियों की तुलना में अ​धिक प्रभाव पड़ेगा।

इटर्नल इस साल मार्च में इंटरग्लोब एविएशन और मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट के साथ निफ्टी 50 सूचकांक में शामिल हुई थी। इन कंपनियों ने ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, भारत पेट्रोलियम और हीरो मोटोकॉर्प की जगह ली है।

विश्लेषक सूचकांक में इन बदलावों का श्रेय पारंपरिक क्षेत्रों में आय वृद्धि की धीमी गति को देते हैं। सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटी में सह-प्रमुख शोध एवं इक्विटी स्ट्रैटजी धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘आईटी, बीएफएसआई, फार्मा, एफएमसीजी, धातु और तेल एवं गैस जैसे पारंपरिक विनिर्माण और सेवा क्षेत्र कमजोर आय और मुनाफा वृद्धि से जूझ रहे हैं। इन क्षेत्रों की अधिकांश कंपनियां शेयर बाजार में पिछड़ रही हैं, जिससे सूचकांक में उनका भार घट गया है।’

First Published - October 5, 2025 | 9:58 PM IST

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