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RBI पॉलिसी के बाद बैंकिंग सेक्टर पर फोकस, एक्सपर्ट ने कहा- इन चुनिंदा बैंक शेयरों पर रखें नजर

Bank Stocks: एक्सपर्ट के अनुसार, क्रेडिट कॉस्ट में सुधार की शुरुआत हो चुकी है और आगे और सुधार की उम्मीद है। असुरक्षित पोर्टफोलियो में दबाव कम हो रहा है।

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जतिन भूटानी   
Last Updated- February 06, 2026 | 3:30 PM IST

Bank Stocks: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने शुक्रवार (6 फरवरी) को रेपो रेट पर अपने फैसले का एलान कर दिया। समिति ने मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करते हुए प्रमुख नीतिगत दर रीपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया। यह समिति की चालू वित्त वर्ष की अंतिम द्विमासिक द्विमासिक मॉनेटरी पॉलिसी थी। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने 4 से 6 फरवरी के बीच हुई अपनी पॉलिसी मीटिंग में ‘न्यूट्रल’ रुख बरकरार रखा। समिति ने मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ पर बरकरार रखा है। यह संकेत देता है कि ब्याज दरें कुछ समय तक कम स्तर पर बनी रह सकती हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिसी बैठक के बाद इस निर्णय की घोषणा की।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि महंगाई दर हमारे अनुमान के दायरे में है। हाई ग्रोथ और लो महंगाई का अच्छा समय है। भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन बेहतर है। वै​श्विक अनि​श्चितता के बीच इकॉनमी का प्रदर्शन शानदार रहा है।

RBI MPC Meet: अगली बार घटेंगी ब्याज दरें ?

एक्सिस सिक्योरिटीज पीएमएस चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर नवीन कुलकर्णी का कहना है कि रेपो रेट को बरकरार रखने और पॉलिसी स्टांस को ‘न्यूट्रल’ बनाए रखने का आरबीआई का फैसला उम्मीद के मुताबिक रहा।

उन्होंने कहा कि वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान को पहले के 7.3% से थोड़ा बढ़ाकर 7.4% कर दिया गया है। महंगाई का आउटलुक फिलहाल आरामदायक बना हुआ है। हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुमान 2.0% से थोड़ा बढ़कर 2.1% हो गया है। आने वाली पॉलिसी बैठकों में 25 बेसिस पॉइंट की एक और कटौती की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, लेकिन यह फिलहाल कम ही लगती है। खासकर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा, मजबूत जीडीपी ग्रोथ, नियंत्रित खुदरा महंगाई और क्रेडिट ग्रोथ में सुधार के संकेतों को देखते हुए।

नवीन कुलकर्णी ने कहा, ”बैंकों के लिए तीसरी तिमाही क्रेडिट ग्रोथ के लिहाज से एक अहम मोड़ साबित हुई और आगे भी इस रफ्तार के बने रहने की उम्मीद है। सुरक्षित रिटेल सेगमेंट में अच्छी बढ़त बनी हुई है। जबकि असुरक्षित सेगमेंट में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। कॉरपोरेट क्रेडिट ग्रोथ भी ठीक-ठाक रही है, खासकर बड़े बैंकों में। तीसरी तिमाही में नेट इंटरेस्ट मार्जिन का रुझान अलग-अलग रहा। बड़े बैंकों में मार्जिन स्थिर रहे, जबकि मिड और छोटे बैंकों ने बेहतर प्रदर्शन किया और मार्जिन में अच्छी बढ़त दर्ज की।”

किन बैंक स्टॉक्स पर रखें फोकस ?

उन्होंने कहा कि चौथी तिमाही में हमें उम्मीद है कि एनआईएम स्थिर रहेंगे या हल्का सुधार दिखा सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि दिसंबर 2025 में हुई दर कटौती का पूरा असर अभी दिखना बाकी है। डिपॉजिट दरों में दोबारा बदलाव (री-प्राइसिंग) की प्रक्रिया जारी रहने से, भले ही इसकी रफ्तार धीमी हो, मार्जिन को सहारा मिलेगा।

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एक्सपर्ट के अनुसार, क्रेडिट कॉस्ट में सुधार की शुरुआत हो चुकी है और आगे और सुधार की उम्मीद है। असुरक्षित पोर्टफोलियो में दबाव कम हो रहा है। एनपीए बढ़ने के मामले भी घट सकते हैं और एसेट क्वालिटी का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है।

एक्सपर्ट ने कहा, ”कुल मिलाकर हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में बैंक अच्छी कमाई वृद्धि दिखाएंगे। हम कोटक महिंद्रा बैंक और एसबीआई जैसे चुनिंदा बड़े बैंकों को लेकर सकारात्मक हैं। वहीं मिड और छोटे बैंकों में फेडरल बैंक, सिटी यूनियन बैंक और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक को प्राथमिकता देते हैं।’

First Published : February 6, 2026 | 3:23 PM IST