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SEBI ने जिस अमेरिकी ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट पर लगाया प्रतिबंध, उसका पूरा लेखा जोखा जान लीजिए

सेबी ने अमेरिकी ट्रेडिंग फर्म Jane Street को भारतीय शेयर बाजार से अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया, कंपनी ने 4,840 करोड़ रुपये का अवैध मुनाफा कमाया था।

Last Updated- July 04, 2025 | 11:01 PM IST
SEBI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ग्लोबल प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट को देश के शेयर बाजार में अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया है। यह प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा जब तक कि अमेरिकी फर्म 4,840 करोड़ रुपये के कथित अवैध लाभ को वापस नहीं कर देती। 

क्या है जेन स्ट्रीट?

न्यूयॉर्क में ट्रेडरों और टेक्नॉलजी विशेषज्ञों की एक टीम की ओर से साल 2000 में स्थापित जेन स्ट्रीट एक ग्लोबल प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग कंपनी है। उसके अमेरिका, यूरोप और एशिया में पांच कार्यालय हैं जहां 2,600 से अधिक लोग काम करते हैं। वह 45 देशों में कारोबार करती है।

कितनी बड़ी है जेन स्ट्रीट?

साल 2024 में उसने 20.5 अरब डॉलर का शुद्ध ट्रेडिंग राजस्व कमाया जो एक वर्ष पगहले की तुलना में दोगुना से भी अधिक है। जेन स्ट्रीट का ट्रेडिंग से शुद्ध राजस्व 2024 में बैंक ऑफ अमेरिका और सिटीग्रुप से आगे निकल गया। इसकी वजह भारत जैसे वैश्विक बाजारों में उसका विस्तार है।

भारत में उसने कितना मुनाफा कमाया?

सेबी के आदेश के अनुसार 1 जनवरी, 2023 से 31 मार्च, 2025 के बीच जेन स्ट्रीट ने 36,502 करोड़ रुपये का लाभ कमाया। लेकिन यह पूरी रकम अवैध नहीं है। लाभ का ब्योरा इस प्रकार है : इंडेक्स ऑप्शंस में 43,289 रुपये का लाभ, स्टॉक ऑप्शंस में करीब 900 करोड़ रुपये। इसके साथ ही स्टॉक फ्यूचर्स में 7,208 रुपये और कैश सेगमेंट में 288 करोड़ रुपये का घाटा।

जेन स्ट्रीट ने अपनी प्रतिस्पर्धी मिलेनियम मैनेजमेंट पर अमेरिकी अदालत में मुकदमा क्यों किया है और इसका भारत से क्या लिंक है?

पिछले साल जेन स्ट्रीट ने अपनी प्रतिद्वंद्वी मिलेनियम मैनेजमेंट और उसके पूर्व कर्मचारियों डगलस शैडवाल्ड और डैनियल स्पॉटिसवुड पर मुकदमा दायर किया था। अपने मुकदमे में जेन स्ट्रीट ने आरोप लगाया था कि उसके पूर्व कर्मचारियों ने मिलेनियम में अपनी नई नौकरियों में इस्तेमाल के लिए उसकी एक गोपनीय ट्रेडिंग रणनीति चुराई थी। जेन स्ट्रीट के वकील ने दावा किया कि उसके पूर्व कर्मचारियों द्वारा चुराई गई रणनीति सबसे ज्यादा लाभकारी थी और कहा कि उसने एक विशेष बाजार में उस रणनीति का उपयोग करके 2023 में 1 अरब डॉलर कमाए। मिलेनियम, शैडवाल्ड और स्पॉटिसवुड के वकीलों ने अनजाने में अपनी दलीलों के दौरान भारत की बाजार के रूप में पहचान बता दी। जेन स्ट्रीट ने दावा किया कि उसके प्रतिद्वंद्वी ने उसी की रणनीति का उपयोग किया जिससे उसका लाभ मार्च 2024 में 50 फीसदी कम हो गया। 1 अरब डॉलर का आंकड़ा जबरदस्त चर्चा का विषय बन गया और भारत में नियामकीय जांच शुरू हो गई।

सेबी ने जेन स्ट्रीट की जांच क्यों​ की?

जेन स्ट्रीट के खिलाफ सेबी की जांच व्यक्तिगत डेरिवेटिव कारोबारियों के नुकसान को कम करने के प्रयासों का हिस्सा है। अप्रैल 2024 में सेबी ने प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग रणनीतियों के अनधिकृत इस्तेमाल की मीडिया रिपोर्टों के बाद जेन स्ट्रीट के सौदों का विश्लेषण किया। बाद में एनएसई को मार्केट मेकर द्वारा किए गए ऑर्डर की जांच करने का काम सौंपा गया। इस साल फरवरी में एनएसई ने जेन स्ट्रीट को एक विशेष ट्रेडिंग रणनीति से दूर रहने के लिए चेतावनी पत्र जारी किया। इसके बावजूद ट्रेडिंग फर्म ने बाजार में बड़ी पोजीशन लेना जारी रखा।

जेन स्ट्रीट के खिलाफ कार्रवाई में सेबी को इतना वक्त क्यों लगा?

सेबी के लिए यह मामला बहुत जटिल था। इसमें जटिल डेटा को प्रोसेस करना और पैटर्न स्थापित करना जरूरी था ताकि एक मजबूत मामला बनाया जा सके। साथ ही सेबी को न केवल अंतर-विभागीय मदद पर निर्भर रहना पड़ा बल्कि स्टॉक एक्सचेंज जैसे तीसरे पक्षों से भी बहुत सारे इनपुट की जरूरत पड़ी।

भारत में जेन स्ट्रीट जैसी फर्मों की दिलचस्पी क्यों बढ़ रही है?

जेन स्ट्रीट जैसी हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्म ने महामारी के बाद आई शेयरों की डेरिवेटिव ट्रेडिंग में उछाल के कारण भारत में प्रवेश किया। जेन स्ट्रीट और अन्य विदेशी फंड (जो अल्गोरिदम और ट्रेडिंग की अन्य जटिल रणनीतियों का इस्तेमाल करते हैं) ने अरबों का लाभ कमाया। महामारी के बाद डेरिवेटिव ट्रेडिंग में तेजी का फायदा उन्होंने भारत के खुदरा निवेशकों की कीमत पर उठाया।

First Published - July 4, 2025 | 10:54 PM IST

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