facebookmetapixel
Advertisement
विरोध के बावजूद नहीं रुकेगी ग्रेट निकोबार पोर्ट परियोजना, तय समय पर होगी पूरी: पोत परिवहन मंत्री सर्वानंद सोनोवालऑनलाइन बिकने वाले खाने-पीने के सामान पर एक्सपायरी डेट गायब, उपभोक्ता मामलों के विभाग में करें शिकायतअल नीनो और एथनॉल की बढ़ती मांग से चीनी उद्योग पर संकट, उत्पादन और निर्यात दोनों पर दबावEditorial: तेल की कीमतें घटीं, अब विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने पर जोररुपये की कमजोरी की जड़ें कहीं गहरी, सिर्फ तेल और पश्चिम एशिया संकट नहीं जिम्मेदारसफर के अनुभव: अमेरिका यात्रा और भारत को लेकर निकले निष्कर्षतेल कीमतों का सबसे बुरा दौर बीत चुका, भाव 80-90 डॉलर के दायरे में रहने की उम्मीद: जिम बर्कहार्डGold-Silver Price: डॉलर की तेजी और ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद से सोने-चांदी में आई गिरावटसेबी का बड़ा प्रस्ताव: वित्तीय कंपनियों को मिलेगी सेलेब्रिटी एंडोर्समेंट की अनुमति, विज्ञापन नियम होंगे आसानAI कंपनियों के लिए जोखिम ढांचा और नया कानून लाएगी सरकार, संसद में इस साल पेश हो सकता है विधेयक

शेयर बायबैक नियमों में बड़ा बदलाव, 1 अगस्त से खुले बाजार से पुनर्खरीद को SEBI की हरी झंडी

Advertisement

सेबी ने 1 अगस्त 2026 से खुले बाजार से शेयर बायबैक को दोबारा शुरू करने और मृत निवेशकों के उत्तराधिकारियों के लिए क्लेम प्रक्रिया आसान बनाने को मंजूरी दी है

Last Updated- June 20, 2026 | 9:33 AM IST
SEBI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने आज अपनी बोर्ड बैठक में कई अहम निर्णय लिए। बाजार नियामक ने स्टॉक एक्सचेंज के जरिये खुले बाजार से पुनर्खरीद की दोबारा शुरूआत करने, भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिभूतिकरण ढांचे के अनुरूप ऋण पत्रों के लिए मानदंडों में समानता लाने, म्युचुअल फंड के लिए इंट्राडे उधारी को आसान बनाने और वैकल्पिक निवेश फंडों के लिए मंजूरी प्रक्रिया में तेजी लाने को मंजूरी दी।

खुले बाजार से पुनर्खरीद की शुरूआत एक साल बाद होने जा रही है। इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म कर दिया गया था। यह कदम पुनर्खरीद पर लागू संशोधित कराधान ढांचे के बाद उठाया गया है। स्टॉक एक्सचेंज के जरिये पुनर्खरीद को खुलने के 66 कार्य दिवसों के भीतर पूरा करना होगा। पुनर्खरीद अवधि के पहले छह महीनों के दौरान आवंटित रकम के कम से कम 40 फीसदी का उपयोग करना होगा। फिलहाल पुनर्खरीद निविदा पेशकश मार्ग और बुक-बिल्डिंग के जरिये खुले बाजार से की जा सकती है। स्टॉक एक्सचेंज के जरिये खुले बाजार से पुनर्खरीद 1 अगस्त, 2026 से फिर शुरू होगी ताकि कंपनियों को एक अतिरिक्त मार्ग मिल सके।

बाजार नियामक ने प्रवर्तक के शेयरों के लिए फ्रीज और न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता जरूरतों के अनुपालन जैसे कुछ सुरक्षा उपाय बताए हैं। इसके अलावा दो पुनर्खरीद के बीच के अंतराल को कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुरूप किया गया है।

सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि इन बदलावों से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित संस्थाओं को सूचीबद्ध होने और विकास करने में मदद मिलेगी। 

बाजार नियामक ने बैंकों और एनबीएफसी जैसी आरबीआई द्वारा विनियमित संस्थाओं को प्रतिभूतिकरण करते समय किसी विशेष क्षेत्र में निवेश के लिए 25 फीसदी की बाध्यकारी सीमा (कंसेंट्रेशन लिमिट) से छूट देने को मंजूरी दी है। यह मंजूरी अतिरिक्त खुलासे के साथ दी गई है। 

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने कहा, ‘5 लाख करोड़ रुपये के मौजूदा डेट में से महज करीब 54,000 करोड़ रुपये ही सूचीबद्ध हैं। हमारा मानना है कि आज हमने जो किया है उससे डेट की सूचीबद्धता और खरीद-फरोख्त दोनों में तेजी आएगी।’

सेबी ने मृत निवेशक के उत्तराधिकारियों के लिए प्रतिभूतियों पर दावों को आसान बनाने के लिए ढांचे के सरलीकरण को भी मंजूरी दी है। कुछ मामलों में पैन और वसीयतनामा की आवश्यकता को हटा दिया गया है।

सेबी के चेयरमैन ने कोलोकेशन और डार्क फाइबर पर नैशनल स्टॉक एक्सचेंज द्वारा निपटान आवेदनों के बारे में कहा कि आवेदन ने उच्च शक्ति संपन्न सलाहकार समिति (एचपीएसी) जैसे स्तरों को पार कर लिया है।

सेबी डेरिवेटिव बाजार के उपायों के प्रभाव पर भी अध्ययन कर रहा है और इसकी रिपोर्ट जुलाई में आने की उम्मीद है। पांडेय ने यह भी कहा कि बाजार नियामक लंबे समय तक चलने वाले डेरिवेटिव अनुबंधों को लाने की राह में बाधाओं को दूर करने पर विचार कर रहा है।

सेबी का एक कार्य समूह प्रतिभूति ऋण एवं उधार ढांचे (एसएलबी) की समीक्षा करने पर विचार कर रहा है। बाहरी विशेषज्ञों की सलाहकार समिति की सिफारिशों के आधार पर सेबी ने लघु एवं मझोले उद्यमों द्वारा पूंजी जुटाने के ढांचे की समीक्षा को भी मंजूरी दी। 

बाजार नियामक ने सेबी सदस्यों के लिए आचार संहिता यानी 2026 कोड को भी मंजूरी दी है। यह सेबी अधिकारियों द्वारा हितों के टकराव और खुलासे पर चिंताओं को दूर करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों पर आधारित है।

सेबी ने म्युचुअल फंड को परिसंपत्ति वर्गों, विदेशी मुद्रा निपटान एवं अन्य में भुगतान और भुगतान निपटान समय में अंतर को पाटने के लिए इंट्राडे उधार लेने की अनुमति देने के लिए संशोधन को भी मंजूरी दी है। 

Advertisement
First Published - June 20, 2026 | 9:33 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement