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जुलाई में 15% घटा इक्विटी फंड निवेश, पर स्मॉलकैप-मिडकैप फंड्स में बना ऑल-टाइम रिकॉर्ड

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जुलाई में इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश 15% घटा, लेकिन स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स में रिकॉर्ड निवेश और डेट फंड्स की वापसी से कुल AUM ₹85.76 लाख करोड़ हुआ

Last Updated- August 11, 2026 | 9:22 PM IST
mutual fund
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

जुलाई में म्युचुअल फंडों (एमएफ) की इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश मासिक आधार पर 15 फीसदी घटकर 24,697 करोड़ रुपये रह गया जबकि स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों में संयुक्त निवेश रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। स्मॉलकैप फंडों में शुद्ध निवेश मासिक आधार पर 39 फीसदी के इजाफे के साथ रिकॉर्ड 7,768 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, वहीं मिडकैप फंडों में निवेश थोड़ा सा बढ़कर 6,192 करोड़ रुपये पर जा पहुंचा।  13,437 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश जुलाई में इक्विटी में आए शुद्ध निवेश का 54 फीसदी बैठता है।

मल्टीकैप फंडों को छोड़कर बाकी सभी श्रेणियों में शुद्ध निवेश में गिरावट देखी गई। लार्जकैप फंडों में 1,322 करोड़ रुपये के शुद्ध निवेश की आवक हुई।

जर्मिनेट इन्वेस्टर सर्विसेज के सीईओ संतोष जोसेफ ने कहा, पैसा परफॉर्मेंस के पीछे चलता है। मार्च में बाजार सबसे निचले स्तर पर थे और तब से मिड और स्मॉल-कैप शेयर रिकवरी में आगे रहे हैं और व्यापक बाजारों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। लार्ज-कैप शेयर पीछे रहे हैं और उन्होंने इंडेक्स को नीचे खींचा है। निवेश का प्रवाह भी इसी पैटर्न के अनुसार रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ट्रेंड बताता है कि ऊंचे मूल्यांकन के बावजूद निवेशक उभरते हुए बिजनेस की लंबी अवधि की वृद्धि की संभावनाओं पर भरोसा बनाए हुए हैं।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया में मैनेजर (रिसर्च) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, इन श्रेणी में नया पैसा लगाने की इच्छा यह भी दिखाती है कि निवेशक बाजार के तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट में सोच-समझकर जोखिम लेने में सहज हैं। इसके अलावा, मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में हालिया रिकवरी से निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है।

फ्लेक्सीकैप फंडों में शुद्ध निवेश का आंकड़ा तीसरा सबसे बड़ा यानी 4,709 करोड़ रुपये रहा। इस श्रेणी में पिछले दो सालों से लगातार बड़ी रकम आ रही है। पिछले महीने इसने पहली बार 6 लाख करोड़ रुपये की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) का आंकड़ा पार किया। कुल मिलाकर, शुद्ध निवेश में गिरावट का कारण निवेश निकासी में तेज इजाफा था।

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक जून के मुकाबले जुलाई में सकल निवेश 3 फीसदी बढ़ा जबकि निवेश निकासी में 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में कुल निवेश थोड़ा सा बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। जुलाई में भारतीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन कुल मिलाकर यह सकारात्मक रहा। इस महीने निफ्टी और सेंसेक्स में करीब 2 फीसदी की बढ़त देखी गई। घरेलू कंपनियों की मजबूत आय, तेल कीमतों में कमी और विदेशी निवेशकों की दोबारा खरीदारी से बाजार को सहारा मिला।

जुलाई में डेट ओरिएंटेड स्कीम में सुधार देखा गया। जून में 1 लाख करोड़ रुपये की बड़ी शुद्ध निकासी के बाद जुलाई में डेट फंडों में 1.87 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। इस बदलाव की अगुआई लिक्विड फंडों और ओवरनाइट फंडों ने की, जिनमें जून में भारी निवेश निकासी हुई थी।

इन दोनों तरह के फंडों से तिमाही के आखिर में अक्सर भारी निवेश निकासी होती है क्योंकि संस्थान अग्रिम कर भुगतान और तिमाही के आखिर में बैलेंस शीट की जरूरतों के लिए पैसा निकालते हैं। अगले महीने यह मामला उलट जाता है। बाकी डेट फंड श्रेणी में मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है। 

एम्फी के मुख्य कार्याधिकारी वेंकट चलसानी ने कहा, जुलाई में उद्योग का एयूएम 4.3 फीसदी बढ़कर 85.76 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

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First Published - August 11, 2026 | 9:22 PM IST

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