म्युचुअल फंड

रिटायरमेंट अब नंबर-1 फाइनैंशियल जरूरत, तैयारी में भारी कमी; म्युचुअल फंड्स का यहां भी दबदबा

2025 में केवल 37 फीसदी लोगों के पास रिटायरमेंट की कोई योजना है। यह 2023 की रिपोर्ट में दर्ज 67 फीसदी से काफी कम है

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अंशु   
Last Updated- December 29, 2025 | 5:51 PM IST

भारतीय परिवारों के लिए रिटायरमेंट पहली बार सबसे बड़ी वित्तीय प्राथमिकता (financial priority) बन गया है। लेकिन इसके बावजूद, रिटायरमेंट की तैयारी में तेज गिरावट आई है। पीजीआईएम इंडिया म्युचुअल फंड की रिटायरमेंट रेडीनेस रिसर्च रिपोर्ट 2025 के तीसरे संस्करण में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में केवल 37 फीसदी लोगों के पास रिटायरमेंट की कोई योजना है। यह 2023 की रिपोर्ट में दर्ज 67 फीसदी से काफी कम है। रिपोर्ट यह दिखाती है कि भारत के बदलते वित्तीय माहौल में एक विरोधाभास है। लोग रिटायरमेंट को लेकर अधिक उत्सुक हैं, लेकिन योजना बनाने में अभी भी काफी कमी है।

रिटायरमेंट की बढ़ती अहमियत

पीजीआईएम इंडिया के अनुसार, भारत में वित्तीय सोच में बदलाव आया है। लोगों की आय बढ़ रही है और वे अपनी पहचान बदल रहे हैं, जिससे उनके वित्तीय लक्ष्य भी बदल रहे हैं। 2025 में रिटायरमेंट अब आठवें नंबर से बढ़कर सबसे बड़ी वित्तीय प्राथमिकता बन गया है। यह पारंपरिक परिवार-केंद्रित चिंताओं से आगे निकल गया है। लोग अब अपनी जीवनशैली के लक्ष्य और व्यवसाय की महत्वाकांक्षाओं को भी अपने वित्तीय फैसलों में शामिल कर रहे हैं।

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रिटायरमेंट प्लानिंग में म्युचुअल फंड्स का दबदबा

रिटायरमेंट प्लानिंग में म्युचुअल फंड्स का दबदबा कायम है। 2025 में म्युचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स की पसंद 62 फीसदी तक बढ़ गई, जबकि 2023 में यह 44 फीसदी थी। रिटायरमेंट के लिए म्युचुअल फंड अपनाने वाले निवेशकों की संख्या 35 फीसदी हो गई, जो 2023 में 24 फीसदी थी। NPS और PPF जैसे पारंपरिक निवेश साधन और रिटायरमेंट-फोकस्ड फंड भी लोकप्रिय हो रहे हैं। नई तरह की प्रोडक्ट्स जैसे REITs भी रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में जगह बनाने लगे हैं।

वैकल्पिक आय में धीमी बढ़त

रिपोर्ट में वैकल्पिक आय स्रोत (Alternate Income) अपनाने में धीमी गति का भी जिक्र है, जो अब 25 फीसदी पर है। हालांकि, लोग इन आय स्रोतों को अपनाने की इच्छा में बढ़ोतरी दिखा रहे हैं, जो अब 44 फीसदी हो गई है। जीवनशैली के लक्ष्य और “कभी रिटायर न होने” वाला नजरिया लोगों को बाद के वर्षों में भी कमाई जारी रखने की प्रेरणा दे रहा है।

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रिटायरमेंट प्लानिंग में अभी भी काफी कमी

रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि रिटायरमेंट की योजना बनाने की आदत कमजोर हो गई है। इसका एक कारण यह है कि लोग अब सिर्फ बीमा वाली योजनाओं पर निर्भर नहीं रहना चाहते। वे जोखिम सुरक्षा और धन बनाने के बीच फर्क समझने लगे हैं। यह सोच अधिक परिपक्व है, लेकिन इससे उनकी योजना बनाने की इच्छा और वास्तविक कार्रवाई के बीच का अंतर भी बढ़ गया है।

रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि भारतीयों का वित्तीय नजरिया बदल रहा है। पहले जहां सुरक्षा की चिंता डर पर आधारित थी, अब लक्ष्य और महत्वाकांक्षा पर आधारित योजना बनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। लोग सुरक्षा के साथ-साथ प्रगति, जीवनशैली की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत संतुष्टि पर भी ध्यान दे रहे हैं।

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कैसे दूर होगी रिटायरमेंट प्लानिंग की कमी?

पीजीआईएम इंडिया के सीईओ अभिषेक तिवारी ने कहा कि रिटायरमेंट अब सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है, लेकिन तैयारी में कमी को नकारात्मक नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय अब जोखिम से बचाव और अपने भविष्य को सक्रिय रूप से बनाने के बीच फर्क समझ रहे हैं। उनके अनुसार, परिवार अब सिर्फ बच्चों की जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं रह रहे, बल्कि अपनी रिटायरमेंट की योजना बनाने पर भी ध्यान दे रहे हैं।

अभिषेक तिवारी ने यह भी कहा कि आकांक्षा और वास्तविक कदम के बीच अंतर को पाटने के लिए निवेशकों, सलाहकारों, नियामकों और फंड हाउसों को मिलकर एक समावेशी और सहायक सिस्टम तैयार करना होगा।

First Published : December 29, 2025 | 5:47 PM IST