भारत का बैंकिंग सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक समय पर बाज़ार हिस्सेदारी खो रहे सरकारी बैंक (PSBs) अब फिर से मज़बूती के साथ वापसी कर रहे हैं, जबकि प्राइवेट बैंक जो अब तक खुदरा कर्ज़ (रिटेल लोन) पर भरोसा करते थे, उनकी ग्रोथ की रफ्तार कुछ धीमी हुई है। जुलाई 2025 तक कुल लोन ग्रोथ घटकर 9.8% रह गई है, जबकि पिछले दो सालों (FY22–FY24) में यह औसतन 15.6% थी। इस गिरावट की वजह बाजार में नकदी की कमी, आरबीआई की सख्ती और कंपनियों की तरफ से कम लोन मांग बताई जा रही है।
निजी बैंकों की ग्रोथ में अब तक सबसे बड़ा योगदान रिटेल लोन का रहा है, लेकिन अब इस सेक्टर में भी सुस्ती देखी जा रही है। घर खरीदने के लिए मिलने वाले लोन (होम लोन) की ग्रोथ 9% और क्रेडिट कार्ड लोन की ग्रोथ 8.5% रह गई है। पिछले साल ये आंकड़े दहाई के अंक में थे। साथ ही कंपनियों की ओर से भी लोन की मांग कम रही, जिससे कुल सिस्टम ग्रोथ पर असर पड़ा।
हालांकि, मोतीलाल ओसवाल के विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के मौसम, नकदी की स्थिति में सुधार और ब्याज दरों में संभावित कटौती की वजह से FY26 की दूसरी छमाही में फिर से लोन ग्रोथ में रफ्तार देखने को मिल सकती है। बिना गारंटी वाले लोन और माइक्रोफाइनेंस लोन में भले ही तनाव बना हुआ हो, लेकिन अब इनकी हालत स्थिर हो रही है। रिस्क के हिसाब से ब्याज दरें तय करने और क्रेडिट कॉस्ट कम होने से इनमें भी रिकवरी की उम्मीद है। वहीं, डिपॉजिट की लागत अभी भी ऊंची बनी हुई है, जिससे बैंकों के मुनाफे पर दबाव है, लेकिन FY26 के अंत तक इसमें भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
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लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन कर रहे सरकारी बैंकों ने FY25 में 12% की ग्रोथ दर्ज की है, जो 15 वर्षों में पहली बार निजी बैंकों से अधिक है। इस बदलाव के पीछे उनकी बेहतर बैलेंस शीट, मुनाफे में सुधार और पर्याप्त पूंजी है। FY25 में सरकारी बैंकों की मार्केट हिस्सेदारी करीब 40 बेसिस पॉइंट बढ़ी है। हालांकि, टेक्नोलॉजी, ब्रांच विस्तार और स्टाफिंग के मामले में ये अभी भी प्राइवेट बैंकों से पीछे हैं।
FY26 और FY27 में पूरे बैंकिंग सेक्टर में 11% से 12.5% तक लोन ग्रोथ रहने की उम्मीद है। सरकारी बैंकों की ग्रोथ स्थिर रहेगी और यह 10% से 13% के बीच हो सकती है। निजी बैंक थोड़ी बेहतर ग्रोथ दिखा सकते हैं, लेकिन उनका क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो पहले से ही ऊंचा है, जिससे उनके लिए तेजी से विस्तार करना चुनौतीपूर्ण होगा। FY27 तक बैंकों की आमदनी और मुनाफे में भी सुधार देखने को मिलेगा।
मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों के मुताबिक, HDFC बैंक आने वाले सालों में तेज़ कमाई की ओर बढ़ रहा है। बैंक की ग्रोथ मुख्य रूप से ग्रामीण, SME और खुदरा कर्ज़ पर आधारित रहेगी। FY26 में इसकी लोन ग्रोथ पूरे बैंकिंग सिस्टम के बराबर रहने की उम्मीद है और FY27 में यह उससे भी तेज़ हो सकती है। बैंक की खराब लोन की स्थिति काफी बेहतर है (GNPA 1.4% और NNPA 0.5%)। साथ ही इसके पास ₹36,600 करोड़ का प्रावधान भी है। FY27 में बैंक का RoA 1.9% और RoE 14.9% रहने का अनुमान है। बैंक का टारगेट प्राइस 2300 रुपये दिया गया है जो इसके मौजूदा ₹1992 के मुकाबले 15% तक अपसाइड का टारगेट है।
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ICICI बैंक ने FY26 की पहली तिमाही में 15.5% की सालाना ग्रोथ के साथ मुनाफा दर्ज किया। बैंक की NIM 4.34% रही और ट्रेजरी मुनाफा ₹1,240 करोड़ का रहा। बिजनेस बैंकिंग में बैंक ने 29.7% Y-o-Y ग्रोथ हासिल की, जो अब कुल कर्ज़ बुक का 20% हिस्सा बन चुका है। बैंक की जमा राशि 12.8% बढ़ी और CASA रेशियो 41.2% रहा। खराब लोन की स्थिति GNPA 1.67% और NNPA 0.41% के साथ काफी स्थिर है। FY27 में बैंक का RoA 2.3% और RoE 17.3% रहने की उम्मीद है। बैंक का टारगेट प्राइस 1670 रुपये दिया गया है जो इसके मौजूदा ₹1463 के मुकाबले 14% तक अपसाइड का टारगेट है।
डिस्क्लेमर: यह लेख मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज रिसर्च डेस्क की रिपोर्ट पर आधारित है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की सलाह अवश्य लें।