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पिछले दर कटौती चक्रों के दौरान बाजार का प्रदर्शन मिला जुला रहा

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ब्रोकरेज ने निष्कर्ष निकाला है कि बदलते आर्थिक हालात के कारण दर कटौती आवश्यक है, लेकिन दर कटौती चक्र में मूल्यांकन शुरू करना भी महत्वपूर्ण है।

Last Updated- August 01, 2024 | 10:06 PM IST
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सितंबर में पहली बार ब्याज दरों में कटौती के अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेत से वैश्विक बाजारों में काफी खुशी है। यदि पिछले इतिहास पर नजर दौड़ाई जाए तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिर्फ दर कटौती चक्र की शुरुआत बाजार में तेजी की वजह नहीं हो सकती। पिछले दर कटौती चक्र के दौरान भारतीय और अमेरिकी बाजारों, दोनों के प्रदर्शन कमजोर रहे थे।

विदेशी ब्रोकरेज नोमुरा द्वारा पिछले 6 दर कटौती चक्रों के दौरान इक्विटी बाजार प्रदर्शन पर किए गए विश्लेषणों से पता चलता है कि 30 जुलाई 2019 को पहली ब्याज दर कटौती के बाद निफ्टी में तीन महीने और 12 महीने में 4.5 प्रतिशत और 1.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ब्रोकरेज ने निष्कर्ष निकाला है कि बदलते आर्थिक हालात के कारण दर कटौती आवश्यक है, लेकिन दर कटौती चक्र में मूल्यांकन शुरू करना भी महत्वपूर्ण है।

नोमुरा में इक्विटी रणनीतिकार चेतन सेठ ने पिछले महीने जारी एक रिपोर्ट में कहा था, ‘हमारा मानना है कि इक्विटी निवेशकों को यह समझना चाहिए कि वर्तमान एसऐंडपी के मूल्यांकन (21 गुना) को देखते हुए आगे का रिटर्न बहुत अधिक सुस्त रहने की संभावना है।’

इसी तरह, निफ्टी का मूल्यांकन भी एक वर्षीय फॉर्वर्ड बेसिस पर करीब 21 गुना है। पिछले 6 में से 4 उदाहरणों में, एसऐंडपी ने फेड की दर कटौती शुरू होने के बाद 3, 6 और 12 महीने में अच्छा रिटर्न दिया। वर्ष 2001 और 2007 में अपवाद स्वरूप, जब बाजार का मूल्य अधिक था और अमेरिका में गंभीर आर्थिक मंदी थी, शेयरों के लिए नकारात्मक परिणाम सामने आए। वर्ष 2001 में, एसऐंडपी 500 सूचकांक 20.1 के एक वर्षीय आगामी पीई पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले 6 दर कटौती चक्रों की शुरुआत के दौरान सर्वाधिक है।

2001 में ब्याज दरों में कटौती डॉटकॉम की मंदी के कारण हुई थी, जो हल्की मंदी के साथ शुरू हुई और जिसके कारण शेयरों में भारी गिरावट आई थी।

2007 का कटौती चक्र अमेरिकी सबप्राइम मॉर्गेज संकट की वजह से आया जिसका परिणाम हार्ड लैंडिंग के रूप में सामने आया और यह शेयरों के लिए नकारात्मक रहा। विश्लेषकों का कहना है कि अगर फेड की ब्याज दरों में कटौती मुद्रास्फीति में नरमी और अमेरिका में सॉफ्ट लैंडिंग के बीच होती है, तो शेयरों के लिए इसका बुरा परिणाम नहीं होना चाहिए।

वेलेंटिस एडवायजर्स के संस्थापक ज्योतिवर्द्धन जयपुरिया ने कहा, ‘जब अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है या शुरुआती मूल्यांकन ऊंचा होता है तो बाजार फेड की दर कटौती के बाद नहीं चढ़ते हैं। पिछले महीने अमेरिका में नेतृत्व में बदलाव हुआ है।

टेक सेक्टर अभी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है, लेकिन बैंक और स्मॉलकैप (जो अमेरिका में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे थे) अब अच्छा प्रदर्शन करने लगे हैं।’ विशेषज्ञों का कहना है कि फेड कटौती का वास्तविक कारण भी मायने रखता है।

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First Published - August 1, 2024 | 10:05 PM IST

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