राहुल मुंजाल की अगुआई वाली अक्षय ऊर्जा कंपनी हीरो फ्यूचर इंजीनियर्स (एचएफई) को अमेरिका की वैश्विक निवेश फर्म केकेआर और प्रवर्तक इकाई हीरो समूह से 45 करोड़ डॉलर (करीब 3,500 करोड़ रुपये) का निवेश मिला है।
कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि यह निवेश इक्विटी के तौर पर किया गया है। हीरा फ्यूचर इंजीनियर्स ने बयान में कहा कि दोनों कंपनियों ने एक निश्चित समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत केकेआर और हीरो समूह कंपनी में 45 करोड़ डॉलर का निवेश करेंगे। हालांकि कंपनी ने दोनों समूहों की ओर से निवेश की जाने वाली अलग-अलग राशि का खुलासा नहीं किया।
कंपनी ने कहा, ‘इस निवेश से हीरो फ्यूचर इंजीनियर्स अपना विकास जारी रखने और सौर, पवन, बैटरी स्टोरेज तथा हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में अक्षय ऊर्जा क्षमता के विस्तार के प्रयासों को भी इससे मदद मिलेगी। इसके साथ ही कंपनी आने वाले समय में नए बाजारों में भी संभावनाएं तलाशेगी।’
हीरो फ्यूचर इंजीनियर्स में इस निवेश का मकसद टिकाऊ ऊर्जा संसाधनों को अपनाने तथा कार्बन-मुक्त करने के प्रयास और नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के प्रयास को मदद मिलेगी।
केकेआर में पार्टनर हार्दिक शाह ने कहा, ‘बढ़ी ऊर्जा की जरूरतों के बीच हीरो फ्यूचर इंजीनियर्स का स्वच्छ ऊर्जा समाधान कंपनियों को कार्बन-मुक्त करने में अहम भूमिका अदा करेगा। हम हीरो फ्यूचर की प्रबंधन टीम तथा कंपनी के मौजूदा निवेशकों (हीरो समूह और आईएफसी) के साथ काम करने और हीरो फ्यूचर को अगले चरण की वृद्धि हासिल करने में मदद करने के लिए तत्पर हैं। इसके साथ ही भारत और वैश्विक स्तर पर अक्षय ऊर्जा अपनाने के प्रयासों को बढ़ावा देने में योगदान देना भी इसका मकसद है।’
वर्ष 2019 में हीरो फ्यूचर इंजीनियर्स ने विदेश में अपने पोर्टफोलियो का विस्तार किया था और कम लागत पर कोष जुटाने में सफल रही थी। हीरो फ्यूचर इंजीनियर्स ग्लोबल 2016 से ही लंदन में पंजीकृत है।
दिसंबर 2019 में हीरो फ्यूचर ने एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक से 6.5 करोड़ डॉलर की पूंजी जुटाई थी। उसी साल नवंबर में अबु धाबी फ्यूचर एनर्जी कंपनी ने हीरो फ्यूचर में 15 करोड़ डॉलर का निवेश किया था। इसके बाद इंटरनैशनल फाइनैंस कॉर्पोरेशन ने इस भारतीय कंपनी में 9 करोड़ डॉलर का नीतिगत निवेश किया था।
2017 में भी उसने 12.5 करोड़ डॉलर का निवेश किया था। हीरो फ्यूचर इंजीनियर्स ने 2021 में विदेशी बाजार में ग्रीन बॉन्ड जारी किया था जिसके लिए 3 अरब डॉलर मूल्य के ऑर्डर मिले थे।