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विदेश में खूब प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं भारतीय

Last Updated- December 08, 2022 | 5:46 AM IST

हीरों के कारोबारी तुलसी झवेरी ने अमेरिका में एक घर खरीदा है, झवेरी ने हाल ही में अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, ऑस्टिन भेजा है।


उनका कहना है कि डॉलर की तुलना में रुपए की कीमत गिरने से पढ़ाई का खर्च बढ़ जाएगा और उसे हेज करने के लिए ही उन्होंने अमेरिका में प्रॉपर्टी ली है, जो इस समय सस्ती है और जिसे वह तीन साल बाद जब उनकी बेटी को अपने देश भारत लौटना होगा, बेचकर अच्छा मुनाफा कमा लेंगे।

इसी तरह मुंबई के एक म्युचुअल फंड के मैनेजर ने मियामी, फ्लोरिडा के पास पांच लाख डॉलर का एक तीन बेडरूम वाला पेंटहाउस खरीदा है। उनके कुछ करीबी रिश्तेदार वहां रहते हैं और उनसे मिलने उन्हें अक्सर वहां जाना पड़ता है।

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक इस साल अप्रैल से अगस्त के बीच भारतीयों ने विदेशों में 310 लाख डॉलर की अचल संपत्ति खरीदी जबकि पिछले पूरे कारोबारी साल (2007-08) में 390 लाख डॉलर की संपत्ति खरीदी गई थी।

इस साल अप्रैल से अगस्त के बीच आउटवर्ड रेमिटेन्स के तहत पूरा निवेश जिसमें तोहफे और दान भी शामिल है, 38 करोड़ डॉलर से ज्यादा का रहा है जबकि पिछले पूरे कारोबारी साल में यह रकम 42 करोड़ डॉलर की थी।

ओसवाल रियल्टी के चेयरमैन और रियल एस्टेट ब्रोकर विक्की ओसवाल के मुताबिक उनके कई ग्राहक दुबई जैसे शहरों में कॉमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं।

दुबई टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में तेजी से उभर रहा है और ज्यादातर लोग इसे पसंद करते हैं क्योंकि यहां जाना अमेरिका और दूसरे यूरोपीय देशों में जाने से ज्यादा आसान है।

इसके अलावा लोग ट्रैवल और शिक्षा में खर्च भी ज्यादा कर रहे हैं। पिछले साल ट्रैवल और शिक्षा पर 16 करोड़ डॉलर खर्च किए गए थे जबकि इस साल अप्रैल से अगस्त के बीच ही 20.7 करोड़ डॉलर खर्च किए जा चुके हैं।

 इस साल विदेश में इक्विटी और डेट संबंधी इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश बहुत ज्यादा नहीं रहा है। इस मद में इस साल केवल 6.71 करोड़ डॉलर देश से बाहर गए हैं जबकि पिछले साल 14.40 करोड़ इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किया गया। इस साल अप्रैल और अगस्त के बीच डॉलर के मुकाबले रुपया दस फीसदी गिरा है।

जबकि जनवरी से इसमें 23.86 फीसदी की गिरावट आ गई है। ओसवाल के मुताबिक पैसे से मजबूत कई भारतीय डॉलर की मजबूती के बाद विदेश में डॉलर की संपत्ति बना रहे हैं क्योकि उन्हें लगता है कि डॉलर को दूसरी मुद्राओं के मुकाबले कमजोर होने में वक्त लगेगा।

First Published - November 27, 2008 | 10:43 PM IST

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