facebookmetapixel
Advertisement
IT Sector Outlook: AI और क्लाउड से मिल रहा बड़ा काम, भारतीय IT कंपनियों के लिए बदल रही तस्वीरFuel Price Update: क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? RBI गवर्नर के बयान से बढ़ी चिंताबढ़िया ग्रोथ के बाद Max Financial पर बुलिश हुए ब्रोकरेज, दिए ₹1,980 तक के टारगेटRBI Dividend: सरकार को RBI से मिल सकता है रिकॉर्ड डिविडेंड, संकट के दौर में मिलेगा बड़ा सहाराक्रेडिट कार्ड बंद कराने से बिगड़ जाएगा CIBIL स्कोर? क्या कहते हैं एक्सपर्टभारत की अर्थव्यवस्था पर Morgan Stanley का बड़ा भरोसा, FY27 में GDP ग्रोथ 6.7% रहने का अनुमानमुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का निधन, राजनीतिक गलियारों में शोकसरकार ने सोने-चांदी पर बढ़ाया टैक्स, एक्सपर्ट बोले- 2013 जैसी स्थिति लौट सकती है‘मुझे पाकिस्तान पर भरोसा नहीं’, ट्रंप के करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम का तीखा हमलाMSCI Index में बड़ा बदलाव, Adani Energy से लेकर MCX तक कई भारतीय कंपनियां शामिल

ऑप्शंस पर STT बढ़ने से घटेगा वॉल्यूम

Advertisement
Last Updated- March 24, 2023 | 11:56 PM IST
BSE

वायदा एवं विकल्प (F&O) अनुबंध बेचने पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) में 25 फीसदी की बढ़ोतरी ने शेयर ब्रोकिंग समुदाय को निराश किया है, जिन्हें वॉल्यूम, लागत और लाभ पर असर की आशंका है।

वित्त मंत्रालय ने वित्त विधेयक में संशोधन को सुधारते हुए ऑप्शंस की बिक्री पर एसटीटी की मौजूदा दर में बदलाव किया है। इसके तहत प्रति एक करोड़ रुपये की बिक्री पर अब एसटीटी 5,000 रुपये के मुकाबले 6,250 रुपये लगेगा।

इसके अलावा वायदा की बिक्री पर एसटीटी की दर 0.01 फीसदी से बढ़ाकर 0.0125 फीदी कर दी गई है, जो एक करोड़ रुपये पर 1,250 रुपये बैठता है। ये बदलाव 1 अप्रैल, 2023 से लागू होंगे।

इस पर चिंता जताते हुए और फैसले की समीक्षा का अनुरोध करते हुए शेयर ब्रोकर समुदाय ने कहा है कि ज्यादा एसटीटी से देसी बाजारों में लेनदेन की लागत बढ़ेगी, जो पहले ही वैश्विक मानकों के मुकाबले ऊंची है।

ब्रोकरों की निकाय एसोसिएशन ऑफ नैशनल एक्सचेंजेज ऑफ मेंबर्स इन इंडिया (ANMI) के अध्यक्ष कमलेश शाह ने कहा, ऑप्शंस की बिक्री पर एसटीटी की मौजूदा दर प्रति करोड़ 5,000 रुपया पहले से ही काफी ऊंची है, जिसकी समीक्षा की दरकार थी।

उन्होंने कहा, हम पहले से ही उच्च लेनदेन शुल्क का भुगतान कर रहे हैं क्योंकि डेरिवेटिव के लाभ को बिजनेस इनकम माना जाता है। अब यहां का कारोबार विदेशी एक्सचेंजों मे जा सकता है। वॉल्यूम का ज्यादातर हिस्सा इंट्राडे होता है और लेनदेन शुल्क का बड़ा हिस्सा एसटीटी होता है। नकदी बाजार के अलावा डेरिवेटिव में भी वॉल्यूम प्रभावित होगा।

Advertisement
First Published - March 24, 2023 | 11:32 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement