Hotel Stocks: होटल इंडस्ट्री में नए साल की शुरुआत थोड़ी धीमी रही। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की ताजा रिपोर्ट बताती है कि जनवरी में होटल कमरों के औसत किराये (ARR) की बढ़ोतरी पिछले 14 महीनों में सबसे कम रही। शादी-विवाह के सीजन के खत्म होने और त्योहारों की रौनक उतरने के बाद मांग कुछ ठंडी पड़ गई। नतीजा यह रहा कि कमरों के किराये में सिर्फ 3% से 5% की बढ़ोतरी हुई और यह करीब 9,400 से 9,600 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि होटल्स की ऑक्यूपेंसी 66% से 68% के बीच स्थिर बनी रही, जिससे प्रति उपलब्ध कमरे से होने वाली कमाई यानी RevPAR में 4% से 6% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज हुई।
देश के अलग-अलग शहरों में होटल कारोबार की तस्वीर अलग-अलग नजर आई। बेंगलुरु में कॉरपोरेट ट्रैवल और नए बजट के चलते कमरों के किराये में 15% से 17% की जोरदार उछाल दिखी। पुणे भी पीछे नहीं रहा और यहां 11% से 13% की बढ़त दर्ज की गई। लेकिन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई इस दौड़ में पिछड़ गई, जहां कमरों के किराये में 5% से 7% तक गिरावट देखने को मिली। ब्रोकरेज का मानना है कि यह सुस्ती ज्यादा दिनों तक नहीं रहने वाली। बड़े कॉरपोरेट इवेंट्स, अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और बढ़ती कारोबारी यात्राओं से आने वाले महीनों में होटल सेक्टर की रफ्तार फिर तेज हो सकती है।
जनवरी आम तौर पर होटल इंडस्ट्री के लिए थोड़ा सुस्त महीना माना जाता है, लेकिन इस बार मांग पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ी। HVS Anarock के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में होटल्स की ऑक्यूपेंसी लगभग स्थिर रही। चंडीगढ़ इस दौरान सबसे मजबूत बाजार बनकर उभरा, जहां ऑक्यूपेंसी में 7 से 9 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं पुणे, हैदराबाद और चेन्नई में मामूली सुधार देखने को मिला। इसके उलट मुंबई, नई दिल्ली और जयपुर में हल्की गिरावट दर्ज की गई। दिलचस्प बात यह रही कि बेंगलुरु में किराये तो तेजी से बढ़े, लेकिन ऑक्यूपेंसी में 3 से 5 प्रतिशत अंक की कमी देखी गई।
Hotel Stocks में निवेश की रफ्तार भी तेज होती दिख रही है। रिपोर्ट के मुताबिक ब्रांडेड होटल्स के नए समझौते सालाना आधार पर काफी बढ़े हैं और इनमें से ज्यादातर टियर-2 और टियर-3 शहरों में हैं। नए होटल्स की ओपनिंग भी बढ़ी है, हालांकि ये अलग-अलग समय पर बाजार में आए हैं। दिलचस्प बात यह है कि हाल के ज्यादातर नए होटल्स टियर-1 शहरों में खुले हैं, लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि मजबूत मांग के चलते इससे कमरे के किराये पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा।
होटल कंपनियों को भी आने वाली तिमाही से बड़ी उम्मीदें हैं। इंडियन होटल्स को भरोसा है कि कंपनी का RevPAR सालाना आधार पर 9% से 10% तक बढ़ सकता है, जबकि कुल आय में 12% से 14% की बढ़त संभव है। SAMHI होटल्स को उम्मीद है कि फरवरी से मार्च की शुरुआत तक मांग मजबूत रहेगी और RevPAR में डबल डिजिट बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। द लीला होटल्स भी फरवरी के मजबूत प्रदर्शन के बाद ADR और RevPAR दोनों में तेज वृद्धि की उम्मीद कर रहा है। लेमन ट्री होटल्स का कहना है कि जनवरी भले ही धीमा रहा, लेकिन फरवरी और मार्च होटल इंडस्ट्री के लिए रफ्तार लेकर आ सकते हैं।
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एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का मानना है कि आने वाले समय में होटल सेक्टर की ग्रोथ और मजबूत हो सकती है। बढ़ती कॉरपोरेट यात्रा, बड़े सम्मेलन और इवेंट्स, शादी-विवाह का सीजन और सीमित नई सप्लाई इस सेक्टर को सपोर्ट दे सकती है। इसी भरोसे के साथ ब्रोकरेज ने शैलेट होटल्स और SAMHI होटल्स को अपने टॉप पिक्स में शामिल किया है, जबकि इंडियन होटल्स पर फिलहाल होल्ड की सलाह दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन होटल्स का मौजूदा भाव करीब 630 रुपये है और इसके लिए 775 रुपये का टारगेट प्राइस दिया गया है। इस हिसाब से शेयर में मौजूदा स्तर से करीब 23% तक की संभावित बढ़त बनती है, हालांकि ब्रोकरेज ने इसमें पहले से हुई तेजी को देखते हुए फिलहाल होल्ड की रेटिंग बरकरार रखी है।
वहीं ब्रोकरेज शैलेट होटल्स पर ज्यादा बुलिश है। कंपनी का मौजूदा भाव करीब 772 रुपये है और इसके लिए 1,250 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया गया है। यानी मौजूदा कीमत से इसमें करीब 62% तक की संभावित तेजी का अनुमान लगाया गया है।
इसके अलावा SAMHI होटल्स के लिए ब्रोकरेज ने 255 रुपये का टारगेट दिया है, जबकि शेयर का मौजूदा भाव करीब 152 रुपये है। इस आधार पर इसमें करीब 68% तक की संभावित बढ़त की गुंजाइश बताई गई है।
ब्रोकरेज ने इन कंपनियों का मूल्यांकन FY28 के EV/EBITDA मल्टीपल के आधार पर किया है, जिसमें इंडियन होटल्स के लिए 24 गुना, शैलेट होटल्स के लिए 20 गुना और SAMHI होटल्स के लिए 12 गुना का मल्टीपल माना गया है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।