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पश्चिम एशिया तनाव से तेल 80 डॉलर पार, ONGC-Oil India पर ब्रोकरेज बुलिश

पश्चिम एशिया तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बीच तेल की कीमतों में उछाल, ब्रोकरेज ने ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को बताया मजबूत

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- March 05, 2026 | 1:56 PM IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के असर अब दुनिया के ऊर्जा बाजार में साफ दिखाई देने लगे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव ने तेल और गैस की सप्लाई को लेकर बड़ी चिंता खड़ी कर दी है। इसी बीच आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की नई रिपोर्ट कहती है कि मौजूदा हालात में भारत की सरकारी कंपनियां ओएनजीसी और ऑयल इंडिया सबसे मजबूत स्थिति में दिख रही हैं, जबकि बाकी तेल और गैस कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना तनाव का केंद्र

रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे संकट का सबसे अहम केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। ईरान ने हाल में अपने सर्वोच्च नेता की हत्या के बाद कई पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ऊर्जा ढांचे पर हमला किया। साथ ही उसने चेतावनी दी कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि अमेरिका, इजरायल और कुछ यूरोपीय देशों ने इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित रखने के लिए सैन्य मदद देने की बात कही है। इससे उम्मीद है कि आने वाले समय में यहां से फिर से जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है।

कतर में LNG उत्पादन रुका

रिपोर्ट में बताया गया है कि कतर के रस लफ्फान औद्योगिक परिसर में विस्फोट के बाद वहां एलएनजी उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। यह दुनिया के सबसे बड़े गैस निर्यात केंद्रों में से एक है। इस फैसले के कारण वैश्विक बाजार से लगभग 20 प्रतिशत एलएनजी सप्लाई फिलहाल कम हो गई है। इसका असर यह हुआ कि यूरोप में एलएनजी की कीमतें करीब 45 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गईं, जबकि एशिया में स्पॉट एलएनजी की कीमत लगभग 25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच गई। भारत के लिए यह स्थिति अहम है क्योंकि देश अपनी कुल एलएनजी जरूरत का करीब 50 प्रतिशत कतर से आयात करता है।

यूरोप और एशिया विकल्प तलाश रहे

कतर की सप्लाई रुकने के बाद यूरोप और एशिया के खरीदार अब दूसरे स्रोत तलाश रहे हैं। यूरोपीय देश तेजी से अमेरिका से एलएनजी आयात बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा अजरबैजान, अल्जीरिया और नाइजीरिया जैसे देशों से गैस लेने की कोशिश भी तेज हो गई है। यूरोप में गैस का भंडार भी कम स्तर पर पहुंच गया है, इसलिए वहां सरकारें स्टोरेज बढ़ाने और नई सप्लाई सुनिश्चित करने के कदम उठा रही हैं।

तेल की कीमत 80 डॉलर के पार

तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। इससे पहले यह करीब 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। रिपोर्ट के अनुसार अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो तेल की कीमतों में तेजी बनी रह सकती है।

निवेशकों के लिए ONGC और ऑयल इंडिया मजबूत

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का कहना है कि मौजूदा हालात में ONGC और ऑयल इंडिया को तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से फायदा मिल सकता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 15 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी इन कंपनियों की कमाई बढ़ा सकती है।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लंबे समय में वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई बढ़ सकती है, जिससे आने वाले 3 से 5 साल में कीमतों पर दबाव बन सकता है। फिलहाल, मौजूदा संकट के बीच रिपोर्ट का मानना है कि निवेश के नजरिये से ओएनजीसी और ऑयल इंडिया बाकी तेल-गैस कंपनियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।

First Published : March 5, 2026 | 1:45 PM IST