निवेशक दुनिया भर में मौद्रिक नीतियां सख्त होती देखकर हर देश में बिकवाली कर रहे हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार में भी लगातार तीसरे दिन भी खासी गिरावट आई। डॉलर के मुकाबले रुपये में नरमी से विदेशी निवेश की आवक पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है, जिस कारण बंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 1,021 अंक फिसलकर 58,099 पर बंद हुआ।
16 सितंबर के बाद सेंसेक्स में यह सबसे तेज गिरावट है और हालिया गिरावट की वजह से सेंसेक्स का रिटर्न इस साल अभी तक ऋणात्मक दायरे में यानी पिछली बार से कम हो गया है। आज निफ्टी भी 302 अंक या 1.7 फीसदी की गिरावट के साथ 17,327 पर बंद हुआ।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कारोबार के दौरान 2,900 करोड़ रुपये की बिकवाली की। पिछले तीन दिन में विदेशी निवेशकों ने 5,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। कमजोर रुपये से विदेशी निवेशकों का प्रतिफल प्रभावित हो रहा है, जिससे बिकवाली बढ़ी है। डॉलर के मुकाबले रुपया 80.99 पर बंद हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि देसी शेयर बाजार और मुद्रा पर दबाव बना रह सकता है क्योंकि निवेशक वैश्विक केंद्रीय बैंकों के अत्यधिक सतर्क रुख के मद्देनजर यहां अपने निवेश में कमी-बेशी कर सकते हैं।
अल्फानीति के संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, ‘अब अमेरिका में ब्याज दर 4.5 फीसदी से ऊपर जाने की संभावना जताई जा रही है। पहले ऐसा नहीं माना जा रहा था। इस बीच डॉलर भी मजबूत हो रहा है, जिससे उभरते बाजारों में बड़ी रकम लगाने में फंड प्रबंधकों को मुश्किल आ सकती है। इस बात का भी डर है कि भारतीय रिजर्व बैंक उम्मीद से ज्यादा दरें बढ़ा सकता है। आरबीआई को रुपये की गिरावट थामने के साथ ही मुद्रास्फीति भी काबू में करनी है।’भारत और अमेरिकी बॉन्ड के प्रतिफल में अंतर बढ़ना भी बाजार के लिए एक और चुनौती होगी।