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Budget 2024: लोकलुभावन योजनाओं से परहेज स्वागतयोग्य कदम- मोतीलाल ओसवाल

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अंतरिम बजट प्राथमिक तौर पर राजकोषीय समेकन पर केंद्रित है। इसमें निवेश के जरिए खर्च में बढ़ोतरी की रणनीति को बरकरार रखा गया है और नई योजनाओं की घोषणा से बचा गया है।

Last Updated- February 04, 2024 | 10:46 PM IST
Budget 2024: लोकलुभावन योजनाओं से परहेज स्वागतयोग्य कदम- मोतीलाल ओसवाल, Commendable eschewal of populist schemes: Motilal Oswal Fin Services CEO
MOTILAL OSWAL, Group Managing Director And Chief Executive Officer Of Motilal Oswal Financial Services

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रबंध निदेशक (समूह) और मुख्य कार्याधिकारी मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि चुनाव से पहले लोकलुभावन योजनाओं से परहेज करने का सरकार का फैसला और राजकोषीय घाटा नीचे लाने की प्रतिबद्धता स्वागतयोग्य कदम है। सुंदर सेतुरामन को दिए साक्षात्कार के अंश…

वित्त वर्ष 25 के अंतरिम बजट पर आप क्या कहते हैं? बुनियादी ढांचे पर सरकार के जोर से किन कंपनियों को फायदा हो सकता है?

अंतरिम बजट प्राथमिक तौर पर राजकोषीय समेकन पर केंद्रित है। इसमें निवेश के जरिए खर्च में बढ़ोतरी की रणनीति को बरकरार रखा गया है और नई योजनाएं या प्रोत्साहन की घोषणा से बचा गया है।

केंद्र ने वित्त वर्ष 25 (अनुमानित) में 10.5 फीसदी नॉमिनल जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य रखा है और वित्त वर्ष 24 अनुमानित और वित्त वर्ष 25 अनुमानित के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य घटाकर क्रमश: 5.8 फीसदी व 5.1 फीसदी कर दिया है। हालांकि अंतरिम बजट में उपभोग को तत्काल बढ़ाने की कोई बात नहीं है, जो उपभोग में मौजूदा धीमेपन को थामने में मदद नहीं करेगा।

बुनियादी ढांचा, रेलवे, रक्षा और औद्योगिक क्षेत्र पहले ही बढ़ती ऑर्डर बुक से लाभान्वित हो चुके हैं और उनका लाभ एक दशक की सुस्ती के बाद मजबूत हो रहा है। इससे पीएसयू और मिडकैप व स्मॉलकैप में तीव्र बढ़ोतरी हुई है, जिनकी उपरोक्त क्षेत्र में ज्यादा मौजूदगी है।

यह शायद पहला मौका है जब सत्ताधारी सरकार ने चुनाव से पहले लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा से परहेज किया है। क्या इससे दोबारा सत्ता में लौटने के सरकार के आत्मविश्वास का पता चलता है?

दिसंबर में तीन प्रमुख राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की जीत पहले ही 2024 में राजनीतिक निरंरता की संभावनाओं को मजबूत कर चुकी है। लोकलुभावन योजनाओं या प्रोत्साहन से परहेज करने का सरकार का कदम और लंबी अवधि के लिहाज से आर्थिक स्थिरता को लेकर प्रतिबद्धता स्वागतयोग्य है। राजोकोषीय समेकन पर दृढ़ रहना देश की रे​टिंग के लिहाज से रणनीतिक तौर पर बेहतर है।

राजकोषीय विवेक में बड़े बदलाव से क्या जीडीपी की वृद्धि प्रभावित होगी?

अल्पावधि के लिए इसके कुछ प्रभाव हो सकते हैं, लेकिन पिछले पांच साल में हुए पूंजीगत खर्च का बड़ा असर और बेहतर आर्थिक हालात की पृष्ठभू​मि वृद्धि के लिए सहजता मुहैया कराती है।

वृद्धि के चुनौतीपूर्ण परिदृश्य को देखते हुए क्या कोई देसी क्षेत्र या कंपनियां किसी अवरोध का सामना करेंगी?

ग्रामीण उपभोग करीब दो साल से सुस्ती के दौर से गुजर रहा है। बजट में किसी लोकलुभावन घोषणा के अभाव को देखते हुए नरम उपभोग की यह अवधि हमारी नजर में लंबे समय तक टिकी रह सकती है।

इस साल बाजार के रिटर्न को लेकर आपका क्या अनुमान है? क्या अब बढ़त सीमित हो जाएगी?

वित्त वर्ष 24 में एनएसई निफ्टी कंपनियों की आय में 20 फीसदी से ज्यादा की वृ​द्धि, मजबूत खुदरा भागीदारी, वैश्विक दरें सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने और विदेशी निवेश में सुधार हमारी नजर में बाजार को और ऊपर ले जा सकता है।

वित्त वर्ष 24 की तीसरी तिमाही भारतीय कंपनी जगत के लिए कैसी रही? क्या वह वित्त वर्ष 24 व वित्त वर्ष 25 के वृद्धि अनुमान को हासिल करने के लिहाज से पटरी पर है?

दिसंबर तिमाही में कंपनियों की आय अभी तक अनुमान के मुताबिक रहे हैं। निफ्टी की करीब 33 कंपनियों ने नतीजे घोषित किए हैं और उनकी आय 21 फीसदी बढ़ी है जबकि अनुमान 20 फीसदी का था।

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First Published - February 4, 2024 | 10:07 PM IST

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