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एल्गोरिदम ट्रेडिंग एक झटके में बाजार हिला सकती है- सीईए की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता

नागेश्वरन बोले- एल्गोरिदम ट्रेडिंग से झटके तेजी से फैल सकते हैं; निगरानी ढांचे को नए सिरे से मजबूत करना होगा

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रुचिका चित्रवंशी   
Last Updated- February 27, 2026 | 8:59 AM IST

देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को कहा कि आने वाले दशक में वित्तीय स्थिरता महत्त्वपूर्ण रूप से डिजिटल और एआई-आधारित वित्त में निहित जोखिम समझने और उन पर निगरानी रखने की नियामकों की क्षमता पर निर्भर हो सकती है। नागेश्वरन ने इंटरनैशनल फाइनैंशियल सर्विसिज सेंटर अथॉरिटी के कार्यक्रम ग्लोबल सिक्यूरिटीज मार्केट कॉन्क्लेव 2.0 में कहा कि तकनीक से ही मजबूत वित्तीय मार्केट और नियामकों का निर्माण नहीं हो सकता है। लिहाजा मार्केट के प्रतिभागियों और नवप्रवर्तकों को पूरक भूमिकाएं निभानी होंगी।

उन्होंने कहा कि तकनीकी परिवर्तन से नई नीतिगत जिम्मेदारियां सामने आती हैं। नागेश्वरन ने कहा, ‘नीति निर्माता स्थिरता और पूर्वानुमान प्रदान कर सकते हैं लेकिन नकदी, नवाचार और बाजार की गहराई अंततः निवेशकों, मध्यस्थों और संस्थानों पर निर्भर करती है।’

सीईए ने बताया कि एआई को अपनाने में भारत का रणनीतिक धैर्य ताकत है, न कमजोरी। दूसरे चरण में आने का लाभ बड़े पैमाने पर पूंजी की जरूरत से पहले तकनीकी परिपक्वता, नियामक अनुकूलन और व्यावसायिक मॉडल के सुदृढ़ीकरण का सावधानीपूर्वक अवलोकन करने की अनुमति देता है।

उन्होंने कहा, ‘दीर्घकालिक लाभार्थी बनने के लिए हर तकनीकी क्षेत्र में पहला कदम उठाना जरूरी नहीं है।’ उन्होंने कहा कि एआई पारिस्थितिकी तंत्र के कुछ क्षेत्रों में स्वामित्व एकाग्रता, संबंधित पक्ष लेन देन और मूल्यांकन पारदर्शिता की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे मूल्यांकन चक्रों के असमान जोखिम से बचते हुए एआई-सक्षम उत्पादकता लाभों में चयनात्मक एकीकरण और भागीदारी संभव होगी।

नागेश्वरन ने कहा कि 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की भारत की आकांक्षा के लिए घरेलू और वैश्विक दोनों प्रकार की पूंजी का निरंतर जुटाव आवश्यक होगा। इसका उद्देश्य केवल वित्तीय प्रवाह को आकर्षित करना नहीं है बल्कि इसे उत्पादक निवेशों की ओर निर्देशित करना है जो बुनियादी ढांचे को मजबूत करता है, नवाचार को बढ़ावा देता है और रोजगार सृजित करता है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा, ‘इस व्यापक विकास ढांचे में एआई को शामिल करने से भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक एआई की बढ़ती लोकप्रियता के काल्पनिक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करने की तुलना में अधिक स्थायी लाभ प्राप्त हो सकते हैं।’

उन्होंने कहा कि वैश्विक पूंजी बाजारों के साथ भारत का एकीकरण न केवल मात्रा के मामले में, बल्कि संरचना और गुणवत्ता में भी मजबूत हो रहा है। नागेश्वरन ने उल्लेख किया कि जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी-सक्षम प्लेटफार्मों के माध्यम से सीमा पार वित्त का विस्तार होता है, पूंजी की गतिशीलता का जिम्मेदारी से प्रबंधन करना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने कहा ‘पूंजी बाजारों में अधिक दक्षता के साथ-साथ अस्थिरता के प्रति लचीलापन भी होना चाहिए।’

उन्होंने निवेशकों, परिसंपत्ति प्रबंधकों और वित्तीय उद्यमियों से धैर्य और रचनात्मक जानकारी के साथ पूंजी लाने और नियामकों के साथ ऐसे सैंडबॉक्स पर साझेदारी करने का आग्रह किया जो जांच से बचने के बजाए लचीलापन पैदा करते हैं।

सीईए ने चेतावनी दी कि एल्गोरिदम ट्रेडिंग और एआई-संचालित निवेश रणनीतियां विभिन्न क्षेत्रों में झटकों को तेजी से प्रसारित कर सकती हैं और बाजार की गतिविधियों को बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कहा ‘इसलिए पर्यवेक्षी ढांचों को मॉडल-आधारित सामूहिक व्यवहार, परिचालन कमजोरियों और महत्त्वपूर्ण एआई आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकाग्रता समूहों का पता लगाने के लिए विकसित होना चाहिए।’

First Published : February 27, 2026 | 8:59 AM IST