अर्थव्यवस्था

महंगाई के नए जोखिम बढ़ रहे, पर फिलहाल ‘ओवरहीटिंग’ नहीं: सौगत भट्टाचार्य

एमपीसी सदस्य बोले- वैश्विक कीमतें, धातु दाम, राजकोषीय प्रोत्साहन और सप्लाई-चेन बदलाव से दबाव बढ़ सकता है; यील्ड कर्व कई कारकों से तय

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मनोजित साहा   
Last Updated- February 27, 2026 | 9:07 AM IST

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के बाहरी सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने मनोजित साहा के साथ साक्षात्कार में महंगाई के मोर्चे पर उभरते कई जोखिमों के बारे में आगाह किया। हालांकि अभी अत्यधिक वृद्धि के कोई संकेत नहीं हैं। प्रमुख अंश :

आपने एमपीसी की कार्यवाही में कहा था, ‘मेरे आकलन के अनुसार न केवल उच्च मुद्रास्फीति बल्कि और अधिक मुद्रास्फीति के दबाव का खतरा बढ़ रहा है।’ इसको समझाएंगे। क्या इसका अर्थ यह है कि आगे ब्याज दरों में कटौती की कोई गुंजाइश नहीं है?

कई जोखिम उभरते प्रतीत हो रहे हैं। अल नीनो की स्थिति बनने के शुरुआती आकलन हैं। महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकी में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और निजी निवेश के बाद धातुओं के दाम में तेजी से उछाल आई है। उच्च रक्षा व्यय, आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन व अन्य रणनीतिक आवश्यकताओं के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। वैश्विक वृद्धि की संभावनाएं बेहतर हुई हैं। इससे मांग बढ़ेगी। भारत में अर्थव्यवस्था में अत्यधिक दबाव के कोई संकेत नहीं हैं, पर वैश्विक कीमतों के संभावित प्रभावों पर नजर रखना आवश्यक है।

क्या संशोधित आंकड़ों में समग्र उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की महंगाई में मामूली वृद्धि होगी?

संभावना है कि वृद्धि होगी लेकिन यह मौद्रिक नीति समिति के प्रस्ताव में किए गए पूर्वानुमानों के अनुरूप ही होगी जो पिछली श्रृंखला पर आधारित थे। वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की औसत महंगाई 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब रहने की संभावना है।

बॉन्ड बाजार में होने वाले प्रभाव को कैसे देखते हैं?

मैं नीतिगत रेपो दर निर्धारण के बॉन्ड बाजारों पर पड़ने वाले प्रभावों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि बाजार की ब्याज दर संरचना (यील्ड कर्व) कई कारकों से प्रभावित होती है जैसे राजकोषीय दबाव, बाहरी परिस्थितियों के संकेत – विशेष रूप से अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड – फॉरवर्ड कर्व के माध्यम से व्यक्त होते हैं, ब्याज दर चक्र का अनुमानित चरण और अन्य।

अमेरिकी अदालत ने ट्रंप के शुल्क को अवैध करार देना और फिर अमेरिका के राष्ट्रपति ने 15 प्रतिशत वैश्विक शुल्क की घोषणा की। इसे कैसे देखते हैं?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अमेरिकी प्रशासन की प्रतिक्रिया धीरे-धीरे सामने आ रही है, जो कई व्यापार कानूनों के तहत क्षतिपूर्ति शुल्क लगाने के लिए उपलब्ध कई विकल्पों का मूल्यांकन कर रही है। कई देश अंतिम स्वरूप व अमेरिका के साथ अपने विशिष्ट व्यापार और शुल्क समझौतों पर अपने पत्ते समय आने पर खोलेंगे।

First Published : February 27, 2026 | 9:07 AM IST