आम आदमी पार्टी (आप) ने पंजाब और उत्तराखंड में 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने का वादा किया है। इन दोनों राज्य में 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं।
दिल्ली से बाहर पांव पसारने की कोशिश में जुटी आप की ओर से किए जा रहे वादे दिल्ली वालों से किए वादों से ही मिलता जुलता है। राष्ट्रीय राजधानी में 0-200 यूनिट की घरेलू खपत स्लैब में बिजली पर 100 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। 2019-20 में दिल्ली की लगभग 50 फीसदी आबादी ने बिजली सब्सिडी का लाभ लिया।
उत्तराखंड में मुफ्त में बिजली देने का वादा करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘मुफ्त बिजली देने की लागत करीब 1,200 करोड़ रुपये आएगी। इसे 50,000 करोड़ रुपये के राज्य के बजट में आसानी से पूरा किया जा सकता है।’
पीडब्ल्यूसी इंडिया में ईएसजी, ऊर्जा उपयोगिता और संसाधन के लीडर संबितोष महापात्र ने कहा, ‘विगत दो दशकों में राज्यों के बजट में काफी इजाफा हुआ है। कृषि और घरेलू ग्राहकों को सब्सिडी मुहैया कराने के राजनीतिक लाभ हुए और बहुत सारे राज्यों ने सब्सिडी की पेशकश शुरू कर दी।’
महापात्र ने कहा कि राज्यों में पहले के विद्युत सुधारों का जोर बिजली को वाणिज्यिक तौर पर व्यावहारिक बनाने पर था जिसकी वजह राज्य के संसाधनों पर पडऩे वाला दबाव था।
हाल ही में उत्तराखंड ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए सभी बोर्ड में विद्युत दरों में औसतन 2.29 फीसदी का इजाफा किया जबकि उत्तराखंड विद्युत निगम ने राजस्व में कमी के मद्देनजर इसमें 16.2 फीसदी की वृद्घि करने का अनुरोध किया था। यदि पार्टी सत्ता में आती है तो इन दरों को शून्य या आधा करना पार्टी के लिए राजकोषीय चुनौती साबित हो सकता है।
दिल्ली में आप के पहले कार्यकाल के पांच वर्ष के दौरान विद्युत शुल्क में कोई संशोधन नहीं किया गया। बहरहाल, 2019 तक हर वर्ष बिजली बिल पर छूट की पेशकश की गई थी।
वित्त वर्ष 2022 के लिए शुल्क संशोधन के लिए सबमिशन में तीनों निजी वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) – रिलायंस इन्फ्रा की बीआरपीएल और बीवाईपीएल तथ टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन (टीपी-डीडीएल) ने संचयी तौर पर 23,538 करोड़ रुपये के आक्रामक राजस्व जरूरत का दावा किया है। अधिकारियों ने कहा इसके लिए टैरिफ में अच्छी खासी वृद्घि करने की जरूरत है क्योंकि दिल्ली में बिजली की खरीद देश में सबसे महंगी है।
तीनों डिस्कॉम के लिए संचयी नियामकीय संपत्तियां 54,092 करोड़ की है। नियामकीय संपत्तियां डिस्कॉम के खर्चे होते हैं जिन्हें भविष्य में की जानी वाली विद्युत शुल्क वृद्घि में वसूला जाता है, लेकिन राज्य विद्युत नियामक आयोग मौजूदा विद्युत शुल्क की गणना में इन पर विचार नहीं करते हैं।
बीआरपीएल और बीवाईपीएल ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग को अपने सबमिशन में आग्रह किया है कि सब्सिडी की रकम को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के आधार पर जारी किया जाए।
पंजाब में मुफ्त बिजली के दम पर सत्ता में आना आप के लिए आसान नहीं होगा। पंजाब देश में सर्वाधिक बिजली दरों वाले राज्यों में से एक हैं जहां घरेलू और औद्योगिक खंड में दरें 5.5 रुपये और 7 रुपये के बीच है। चुनावों को देखते हुए पंजाब सरकार ने घरेलू बिजली दरों पर 0.5 रुपये से 1 रुपये प्रति यूनिट की छूट देने और आद्योगिक दरों में मामूली वृद्घि करने की घोषणा की है।