वित्त वर्ष 2021-22 में माल ढुलाई के जबरदस्त आंकड़ों को देखते हुए भारतीय रेलवे ने 2022-23 के लिए अपने माल ढुलाई लक्ष्य को संशोधित कर 170 करोड़ टन कर दिया है जो फरवरी में पेश किए गए रेल मंत्रालय के बजट अनुमानों से 15 फीसदी अधिक है।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘अगले वित्त वर्ष के लिए माल ढुलाई का बजट अनुमान 147.5 करोड़ टन था जो एक रुढि़वादी अनुमान था। इस साल हमारा माल लदान 141.8 करोड़ टन था जिसके साथ हमने वार्षिक 15 फीसदी की वृद्घि भी दर्ज की जो अब तक की सर्वाधिक वार्षिक वृद्घि है। यदि हम राष्ट्रीय रेल योजना (एनआरपी) के तहत अपने उद्देश्यों को पूरा करना चाहते हैं तो स्वाभाविक है कि हमें बजट के अनुमान के पार जाना होगा।’
मंत्रालय के आंतरिक अनुमानों में माल ढुलाई की मांग में तेज उछाल के संकेत मिलते हैं जो मुख्यत: प्रमुख जिंसों की ढुलाई के दम पर है। रेलवे ने हाल ही में अगले तीन वित्त वर्षों में 90,000 वैगनों को खरीदने के लिए एक निविदा जारी की थी। इसके साथ ही रेलवे समर्पित मालवहन गलियारा (डीएफसी) के लिए पटरी निर्माण पर भी जोर दे रहा है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में कहा कि केंद्र ने दो डीएफसी पर 1,110 किलोमीटर का निर्माण पूरा किया है जबकि हाल में तीन अन्य गलियारों को भी मंजूरी दी गई थी।
चालू वित्त वर्ष के लिए 170 करोड़ टन मालवहन का लक्ष्य वित्त वर्ष 2022 में किए गए माल के लदान से करीब 20 फीसदी अधिक है। रेलवे ने अब तक किसी एक वर्ष में माल लदान में इतनी बड़ी वृद्घि दर्ज नहीं की है।
एनआरपी के तहत केंद्र अपने मॉडल फ्रेट हिस्सेदारी को 2030 तक बढ़ाकर 45 फीसदी करना चाहता है। सरकारी अनुमानों के मुताबिक माल के लिए समेकित मांग 2026 तक 630 करोड़ टन और 2031 तक 822 करोड़ टन होने की उम्मीद है।
इन अनुमानों के मुताबिक रेलवे को अपने मॉडल फ्रेट हिस्सेदारी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए 2031 तक 360 करोड़ टन से अधिक मालवहन की जरूरत होगी। अधिकारी ने कहा कि मध्यावधि में रेलवे 2024 तक 200 करोड़ टन तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने पहले रिपोर्ट दी थी कि रेलवे ने विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए महत्त्वाकांक्षी 1 लाख करोड़ रुपये की योजना लॉन्च की जिसके जरिये यह 2024 तक अपने मालवहन राजस्व में 97,000 करोड़ रुपये जोडऩा चाहता है।
क्षेत्र विशेषज्ञों ने पहले संकेत दिए थे कि मॉडल फ्रेट हिस्सेदारी में केवल स्थायी वृद्घि के जरिये ही महत्त्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है क्योंकि आर्थिक गतिविधि को तेजी से बढ़ाना होगा जो रेलवे के लिए वृद्घि लक्ष्यों को प्रभावित करने के लिए एकमात्र कारक होगा। एक विश्लेषक ने कहा, ‘इस साल की वृद्घि अर्थव्यवस्था में दबी हुई मांग की वजह से हो सकता है लेकिन हर साल ऐसा होना मुश्किल है।’