विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में कोविड-19 टीके पर अस्थाई रूप से पेटेंट पर छूट दिए जाने की चर्चा में तेजी लाने के लिए भारत अपने प्रस्ताव में बदलाव कर रहा है, लेेकिन इस मसले पर सभी सदस्यों के बीच आम राय बन पाने में लंबा वक्त लग सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आम राय बनने के बाद भी प्रस्ताव के कानून बनने और उसे अंतिम रूप से लागू करने का मसला अहम है, जिससे कि कोविड-19 टीके की कमी का सामना कर रहे देशों के मसलोंं का समाधान हो सके। क्लारस लॉ एसोसिएट्स में पार्टनर आरवी अनुराधा ने कहा कि फिलहाल कूटनीतिक बातचीत धीमी चल रही है और स्थिति को ध्यान में नहीं रखा जा रहा है। इसके अलावा इस छूट की प्रकृति और नियमों के बारे में अभी खुलासा बाकी है।
उन्होंने कहा, ‘छूट सिर्फ पहला कदम होगा। उसके बाद इसे लागू करने को लेकर समस्या आएगी कि तकनीक का हस्तांतरण कैसे किया जाए, कौन इसका विनिर्माण करेगा और कच्चे माल की आपूर्ति शृंखला कैसे सुनिश्चित होगी और टीका बनने के बाद इसका वितरण कैसे होगा। बड़े पैमाने पर वितरण और उत्पादन को देखते हुए इस पर भी काम करने की जरूरत है कि पेटेंट से माफी के बाद इसे कैसे तेजी से मूर्त रूप दिया जाए।’
पिछले साल अक्टूबर महीने में भारत और दक्षिण अफ्रीका ने एक संयुक्त प्रस्ताव पेश कर ट्रेड रिलेटेड अस्पेक्ट्स आफ इंटेलएक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (ट्रिप्स) समझौते की कुछ धाराओं में छूट की मांग रखी थी, जिसमें कॉपीराइट, पेटेंट शामिल है। इसका मकसद यह था कि महामारी के दौर में कम और मध्य आय वर्ग वाले देशों तक टीके की पहुंच सुनिश्चित हो सके। विकसित देशों ने प्रस्ताव का विरोध किया था और इसे तीन चौथाई सदस्य देशों का समर्थन मिला था।
हाल में माफी को अमेरिका की ओर से मिले समर्थन को बातचीत के लिए एक बेहतरीन शुरुआत के रूप में प्रचारित किया गया। दवा लॉबी की ओर से विभिन्न देशों में कड़ा प्रतिरोध हो रहा है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विश्वजीत धर ने कहा, ‘टीके की तकनीक तक पहुंच की हमारी उम्मीद बहुत जल्द पूरी नहीं होने वाली है। डब्ल्यूटीओ में पहले भी चर्चाएं हुई हैं, जिनमें अक्सर बहुत समय (कई वर्ष) लगा है। इसके अलावा कई देश हैं, जो किसी तरह की छूट के पूरी तरह से खिलाफ हैं, जिससे डब्ल्यूटीओ में जल्द कोई समाधान नजर नहीं आता।’ धर ने कहा कि अगर अमेरिका से समर्थन मिल भी जाता है तो बातचीत का ब्योरा अभी तैयार होना बाकी है क्योंकि यह अहम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी व्यक्तिगत रूप से ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री, व यूरोपियन यूनियन से ट्रिप्स के मसले पर भारत के प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की है। बहरहाल इन देशों की ओर से भारत के प्रस्ताव को लेकर कोई निश्चित प्रतिबद्धता नहीं आई है।