फास्टैग से घटी एनएचएआई की आमदनी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 2:05 AM IST

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को वित्त वर्ष 2021 की पहली छमाही में हरेक फास्टैग पर 165 रुपये की आमदनी हुई जो कि एक वर्ष पहले के 179 रुपये के मुकाबले 8 फीसदी कम है। प्राधिकरण के राजस्व में यह कमी रेडियो आवृत्ति पहचान (आरएफआईडी) अनुपालन के कारण आई है।
ये टैग छूट के साथ आते हैं लिहाजा इनको लागू करने का मतलब है एनएचएआई के लिए कम राजस्व संग्रह।
इसने जनवरी से जून 2021 के दौरान 15,518.8 करोड़ रुपये का टोल संग्रह किया जो कि पिछले वर्ष के आंकड़ों के मुकाबले दोगुने से अधिक है। यह राजस्व 63.5 करोड़ वाहनों के गुजरने से हासिल हुआ है।       
सड़कों पर साल के आरंभ से ही वाहनों की संख्या में जो इजाफा हो रहा था वह मई में फिसलकर 11.648 करोड़ पर आ गया। ऐसा कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए अधिकांश राज्यों की ओर से लगाए गए लॉकडाउन के कारण हुआ था। जून में जब लॉकडाउन में ढील देने की शुरुआत हुई तब गाडिय़ों की संख्या बढ़कर 15.786 करोड़ पहुंच गई जो जनवरी के 14.856 करोड़ से भी अधिक है।
जनवरी 2020 और जून 2020 के बीच कुल संग्रह 7,786.76 करोड़ रुपये रहा जबकि यातायात का आकार 43.5 करोड़ रहा।  
ट्रांसपोर्ट ऐंड लॉजिस्टिक्स के निदेशक और प्रैक्टिस लीडर जगन्नारायण पद्मनाभन ने कहा, ‘प्रति फास्टैग के आधार पर संग्रह में गिरावट आई है। इसकी वजह फास्टैग की कवरेज में विस्तार है। इससे फास्टैग की पहुंच उच्च आवृत्ति टोल सड़क उपयोगकर्ताओं (ट्रक चालकों) से सामान्य उपयोगकर्ताओं तक होने का संकेत मिलता है। संकेत ये हैं कि 95 फीसदी से अधिक वाहन चालकों ने फास्टैग को अपनाया है और इसलिए भविष्य के रुझान के लिए हर महीने 150-160 प्रति फास्टैग के स्तर को एक नियम के तौर पर लिया जा सकता है।’
केंद्र सरकार ने 15 फरवरी की मध्यरात्रि से फास्टैग को अनिवार्य किया था। देश भर में इलेक्ट्रॉनिक टोल प्लाजाओं पर फास्टैग के बिना वाले वाहन से दोगुना टोल वसूला जाता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 1 जनवरी, 2021 से मोटर वाहनों पर फास्टैग का नियम लागू किया था।
इस व्यवस्था का मकसद डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना, इंतजार के समय और ईंधन खपत को घटाना और प्लाजाओं पर बाधारहित आवाजाही मुहैया कराना था। 

First Published : August 6, 2021 | 12:49 AM IST