छोटे टैक्सपेयर्स को विदेश में मौजूद ऐसी संपत्ति या विदेशी आय घोषित करने का एक मौका मिलने जा रहा है, जिसकी जानकारी उन्होंने पहले इनकम टैक्स रिटर्न में नहीं दी थी। केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में ऐसी अघोषित विदेशी संपत्ति और आय को घोषित करने के लिए एक बार की सुविधा का ऐलान किया था।
अब केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स–डिस्क्लोजर स्कीम, 2026 को लागू कर दिया है।
इस योजना के तहत 16 अगस्त 2026 से ऑनलाइन घोषणा की जा सकेगी। इसके लिए 31 दिसंबर 2026 तक का समय दिया गया है। यह योजना वित्त अधिनियम, 2026 के अध्याय IV के तहत अधिसूचित की गई है।
इस योजना में मुख्य रूप से ऐसी अघोषित विदेशी संपत्ति और विदेशी आय को शामिल किया गया है, जिस पर भारत में टैक्स बनता था, लेकिन टैक्सपेयर्स ने उसे अपने संबंधित इनकम टैक्स रिटर्न में घोषित नहीं किया था।
योजना के तहत ऐसे मामलों को दो अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है। पहली कैटेगरी में वे मामले शामिल होंगे, जहां अघोषित विदेशी संपत्ति और विदेशी आय की कुल वैल्यू 1 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं है।
ऐसे टैक्सपेयर्स को 30 फीसदी टैक्स देना होगा। इसके साथ ही टैक्स के बराबर अतिरिक्त लेवी भी लगेगी। यानी टैक्स और लेवी को मिलाकर कुल भुगतान 60 फीसदी तक हो सकता है।
यह टैक्स और अतिरिक्त लेवी विदेशी संपत्ति की वैल्यू के साथ-साथ उससे हुई विदेशी आय पर भी लागू होगी।
मसलन, सीबीडीटी के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति के अघोषित विदेशी बैंक खाते की वैल्यू 60 लाख रुपये है और अघोषित विदेशी आय 20 लाख रुपये है, तो दोनों को मिलाकर कुल रकम 80 लाख रुपये होगी।
ऐसे मामले में 80 लाख रुपये पर 30 फीसदी के हिसाब से 24 लाख रुपये टैक्स देना होगा। इसके अलावा 24 लाख रुपये की अतिरिक्त लेवी भी देनी होगी। यानी टैक्सपेयर्स को कुल 48 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
योजना की दूसरी कैटेगरी उन मामलों के लिए है, जहां विदेश में मौजूद संपत्ति की कुल वैल्यू 5 करोड़ रुपये तक है। इसमें ऐसी संपत्ति शामिल हो सकती है, जिसे पहले से टैक्स दिए गए पैसे से खरीदा गया हो या उस समय खरीदा गया हो, जब टैक्सपेयर भारत का निवासी नहीं था। हालांकि, संबंधित इनकम टैक्स रिटर्न में इसकी जानकारी नहीं दी गई हो।
इस कैटेगरी में टैक्स की जगह 1 लाख रुपये की फ्लैट फीस देनी होगी। लेकिन इस सुविधा का फायदा सिर्फ 5 करोड़ रुपये तक की विदेशी संपत्ति के लिए ही लिया जा सकता है। अगर संपत्ति की वैल्यू 5 करोड़ रुपये से ज्यादा है, तो वह इस कैटेगरी में शामिल नहीं होगी।
योजना के तहत भारत के बाहर मौजूद किसी भी तरह की अघोषित संपत्ति को शामिल किया जा सकता है। इसमें किसी विदेशी कंपनी या संस्था में वित्तीय हिस्सेदारी भी शामिल है। इसके अलावा ऐसी विदेशी आय भी इस योजना के दायरे में आएगी, जिस पर भारत में टैक्स बनता था, लेकिन उसे घोषित नहीं किया गया था।
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योजना के तहत विदेशी संपत्ति की वैल्यू तय करने के लिए 31 मार्च 2026 को वैल्यूएशन डेट माना गया है। आम तौर पर फेयर मार्केट वैल्यू उस स्थिति में लागत से ज्यादा मानी जाएगी, जब 31 मार्च 2026 को खुले बाजार में उस संपत्ति की संभावित कीमत ज्यादा हो।
अलग-अलग तरह की संपत्तियों के लिए वैल्यूएशन के अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। इनमें विदेशी बैंक खाते, ज्वेलरी, प्रॉपर्टी और लिस्टेड व अनलिस्टेड सिक्योरिटीज शामिल हैं।
विदेशी बैंक खाते के मामले में आम तौर पर खाता खुलने की तारीख से 31 मार्च 2026 तक उसमें जमा की गई रकम के आधार पर वैल्यू तय की जाएगी। हालांकि, इसमें कुछ खास रकम को शामिल नहीं करने के नियम भी हैं।
सीबीडीटी के एफएक्यू में यह भी साफ किया गया है कि एक ही रकम को दो बार संपत्ति के तौर पर नहीं गिना जाएगा। उदाहरण के लिए, अगर खाते से पैसा निकालने के बाद उसे दोबारा जमा किया गया या उसी रकम से कोई दूसरी संपत्ति खरीदी गई, तो उसे दोबारा जोड़ने से रोकने के लिए खास नियम बनाए गए हैं।
टैक्सपेयर्स को इस योजना के तहत अपनी घोषणा इलेक्ट्रॉनिक तरीके से फॉर्म 1 में दाखिल करनी होगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और इसे प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल ऑफ इनकम टैक्स (सिस्टम्स) या डायरेक्टर जनरल ऑफ इनकम टैक्स (सिस्टम्स), जैसा लागू हो, संभालेंगे।
यह सुविधा भारत के निवासियों के साथ-साथ कुछ शर्तें पूरी करने वाले गैर-निवासियों और ‘रेजिडेंट बट नॉट ऑर्डिनरिली रेजिडेंट’ यानी आरएनओआर टैक्सपेयर्स के लिए भी उपलब्ध है।
अगर कोई व्यक्ति फिलहाल भारत का गैर-निवासी है, तब भी कुछ परिस्थितियों में वह इस योजना के तहत घोषणा कर सकता है। इसके लिए जरूरी है कि जिस साल की अघोषित आय से मामला जुड़ा है या जिस साल अघोषित संपत्ति खरीदी गई थी, उस साल वह भारत का निवासी रहा हो।
सीबीडीटी के मुताबिक, अगर किसी टैक्सपेयर ने संबंधित साल का इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया था, तो वह कुछ शर्तों के तहत इस योजना में घोषणा कर सकता है।
अगर रिटर्न दाखिल किया गया था, लेकिन उसमें विदेशी संपत्ति या विदेशी आय की जानकारी नहीं दी गई थी, तब भी योजना के तहत घोषणा की जा सकती है। इसके अलावा ऐसे मामले भी इस योजना में शामिल हैं, जहां विदेशी संपत्ति या आय का आकलन टैक्स विभाग नहीं कर पाया और वह असेसमेंट से बच गई।
हालांकि, हर तरह की अघोषित संपत्ति इस योजना के दायरे में नहीं आती। अपराध से हासिल रकम या ऐसी संपत्ति, जिसके संबंध में प्रिवेंशन ऑफ मनी-लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत कार्रवाई शुरू हो चुकी है या चल रही है, उस पर इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा।
इसी तरह, जिस संबंधित असेसमेंट ईयर के लिए ब्लैक मनी एक्ट के तहत असेसमेंट की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उस मामले में भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।
टैक्सपेयर के फॉर्म 1 दाखिल करने और उसका इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद इनकम टैक्स विभाग भुगतान की जानकारी देगा। विभाग फॉर्म 2 के जरिए बताएगा कि टैक्सपेयर को कितनी रकम जमा करनी है।
यह आदेश उस महीने के खत्म होने के एक महीने के भीतर जारी किया जाएगा, जिसमें घोषणा की गई है। इसके बाद टैक्सपेयर को फॉर्म 2 मिलने वाले महीने के अंत से दो महीने के भीतर तय रकम जमा करनी होगी।
अगर कोई टैक्सपेयर इस समय सीमा के अंदर भुगतान नहीं कर पाता है, तो उसे अधिकतम दो महीने की अतिरिक्त मोहलत मिल सकती है। हालांकि, देरी होने पर हर महीने या महीने के किसी हिस्से के लिए 1 फीसदी की साधारण ब्याज दर लागू होगी।
अगर अतिरिक्त समय की आखिरी तारीख तक भी भुगतान नहीं किया गया, तो उस घोषणा के लिए योजना का फायदा खत्म हो जाएगा।
अगर टैक्सपेयर की घोषणा वैध है और उसने तय रकम का भुगतान कर दिया है, तो घोषित संपत्ति या आय के संबंध में उसे आगे के टैक्स, पेनल्टी और अभियोजन से राहत मिलेगी। यह सुरक्षा ब्लैक मनी (अनडिस्क्लोज्ड फॉरेन इनकम एंड एसेट्स) एंड इम्पोजिशन ऑफ टैक्स एक्ट, 2015 के तहत लागू होगी।
इसके अलावा घोषित आय या घोषित विदेशी संपत्ति में लगाए गए निवेश की रकम को इनकम टैक्स एक्ट, 1961 या ब्लैक मनी एक्ट के तहत टैक्सपेयर की कुल आय में शामिल नहीं किया जाएगा।
हालांकि, सीबीडीटी ने यह भी साफ किया है कि इस योजना के जरिए पहले से असेस की जा चुकी आय या संपत्ति के मामले में रेक्टिफिकेशन, रिवीजन, सेट-ऑफ या किसी दूसरी राहत का दावा नहीं किया जा सकता। योजना के तहत जमा की गई रकम को लेकर भी ऐसे मामलों में दोबारा किसी तरह का समायोजन या राहत मांगने की अनुमति नहीं होगी।