नए-नवेले आयकर पोर्टल में तकनीकी खामियों की शिकायत आने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उसे तैयार करने वाली नामी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी इन्फोसिस से खामियां दूर करने को कहा है। सीतारमण ने आज ट्वीट किया और इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन निलेकणी से कहा कि ‘करदाताओं को निराश नहीं होने दिया जाए।’
आयकर रिटर्न भरने के लिए नया पोर्टल सोमवार को रात 8.45 पर शुरू किया गया। इसका मकसद आयकर रिटर्न की प्रोसेसिंग में लगने वाला समय घटाकर केवल 1 दिन करना है। अभी इसमें औसतन 63 दिन लग जाते हैं। साथ ही रिफंड प्रक्रिया में भी इससे तेजी आने की उम्मीद लगाई जा रही है।
वित्त मंत्री ने अपने ट्वीट में कहा, ‘बहुप्रतीक्षित ई-पोर्टल 2.0 को सोमवार रात 8.45 बजे शुरू किया गया था। मैंने अपने टाइमलाइन पर तकनीकी खामियों के बारे में शिकायतें देखी हैं। उम्मीद है कि इन्फोसिस और नंदन निलेकणी हमारे करदाताओं को दी जा रही सेवाओं से निराश नहीं होने देंगे। करदाताओं के लिए अनुपालन में आसानी हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।’
सीतारमण ने नए आयकर पोर्टल को करदाताओं के लिए अनुपालन आसान बनाने की दिशा में अहम उपलब्धि बताते हुए कल रात पौने नौ बजे उसे शुरू किया था। कुछ ही देर में उनकी टाइमलाइन करदाताओं की शिकायत से भर गई। उनका कहना था कि कर रिटर्न भरने और दूसरी सेवाएं इस्तेमाल करने में दिक्कत हो रही है। कुछ ने तो यह भी कहा कि स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) का फॉर्म ही नहीं मिल रहा है।
इस बारे में जानकारी के लिए इन्फोसिस से संपर्क किया गया लेकिन तकनीकी खामियों के कारण पर उसने कुछ नहीं कहा। बहरहाल इन्फोसिस में काम कर चुके मोहनदास पई ने कंपनी का बचाव करते हुए ट्वीट किया, ‘इस तरह की सभी बड़ी प्रणाली में दिक्कतें आएंगी! ज्यादातर दिक्कतें उपयोगकर्ताओं को होंगी, इन्हें निपटाने में कुछ समय लगता है! उपयोगकर्ताओं को सीखने, डेटा इनपुट, डेटा पॉपुलेशन, डिजाइन आदि को सुचारु होने में वक्त लगता है!’ उद्योग के सूत्रों ने भी कहा कि ऐसा क्लाउड कंपनी फास्टली की इंटरनेट सेवा दुनिया भर में बाधित होने के कारण हो सकता है। इन्फोसिस को बोली लगाने के बाद 2019 में नए पोर्टल का ठेका मिला था। इसकी लागत 4,241.97 करोड़ रुपये थी। इस परियोजना के साथ 2020 तक आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रणाली का रखरखाव पूरी तरह इन्फोसिस के हाथ में जाने वाला था।