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नई शिक्षा नीति में रोजगार की परिकल्पना

Last Updated- December 15, 2022 | 4:02 AM IST

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मसौदा तैयार करने वाली समिति के प्रमुख रहे के. कस्तूरीरंगन ने कहा कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) में 21वीं सदी और गुणवत्ता से समझौता किए बिना रोजगार का कौशल प्रदान करने वाली शिक्षा की परिकल्पना की गयी है। कस्तूरीरंगन ने कहा कि स्नातक स्तर पर उदार या बहुउद्देश्यीय शिक्षा का विचार, वहीं माध्यमिक स्तर की शिक्षा में चार वर्ष की संरचना कई प्रकार के कौशल चुनने का अवसर प्रदान करते हैं जिनका इस्तेमाल रोजगार के अवसर के तौर पर भी किया जा सकता है। उन्होंने साक्षात्कार में कहा, ‘ये सभी 21वीं सदी के कौशल का हिस्सा हैं क्योंकि शिक्षा नौजवानों में इस तरह की चीजों को समाहित करती है जिनसे कि वे 21वीं सदी के लिए जरूरी संचार, रचनात्मकता, समस्या समाधान और इस तरह की चीजों के संदर्भ में योग्यता प्राप्त कर सकें।’
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य इस क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके, संस्थानों को मजबूत करके शिक्षा को सही मार्ग पर लाना है और वहीं यह भी सुनिश्चित करना है कि गुणवत्ता से समझौता नहीं हो। नई नीति के तहत चार वर्ष के स्नातक पाठ्यक्रम की शुरुआत के संबंध में कस्तूरीरंगन ने कहा कि इससे युवा व्यापक ज्ञान अर्जन के लिए तैयार होंगे जो उन्हें परिपक्वता के उचित स्तर पर उनकी पेशेवर रुचि को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने कहा कि हर वर्ष में शिक्षा को अगले स्तर पर ले जाने की क्षमता है। इसमें यह प्रावधान भी है कि यदि कोई किसी समय पढ़ाई रोककर किसी पेशे में जाना चाहता है तो उसमें उस तरह की चीज के लिए योग्यता होगी।
कस्तूरीरंगन ने कहा, ‘इसलिए अगर आप उस सिद्धांत पर काम करते हैं तो पहले साल में आपको एक प्रमाणपत्र मिल सकता है क्योंकि आपको रोजगार प्रदाता को दिखाना होगा कि आपने कुछ किया है। आपको जूनियर डिप्लोमा का सर्टिफिकेट मिलता है, अगले साल सीनियर डिप्लेामा का सर्टिफिकेट मिलता है और फिर तीसरे स्तर पर आपको स्नातक की डिग्री मिलती है।’
उन्होंने कहा, ‘और यदि आप कुछ शोधकार्य करते हैं और अपने ज्ञान को बढ़ाते हैं, विषयों और समस्याओं से निपटने की नई क्षमताएं हासिल करते हैं तो आपको चौथे साल की डिग्री मिलती है। यह एक तरह की ऑनर्स स्नातक डिग्री होती है।’ प्रसिद्ध वैज्ञानिक ने कहा कि नई नीति में ज्ञान अर्जन की परिपक्वता के एक स्तर पर अनेक विकल्प मुहैया कराने का विचार है। एम फिल डिग्री समाप्त करने के संबंध में कस्तूरीरंगन ने कहा, ‘एम फिल की डिग्री मास्टर डिग्री के साथ बराबरी नहीं कर पा रही थी। मुझे यह भी लगता है कि जब आपके पास बेहतर गुणवत्ता के ज्ञान के साथ डिग्री प्राप्त करने का और बेहतर तरीके से किसी पेशे को अपनाने की क्षमता है तो आज एम फिल का कोई महत्व नहीं है।’    

First Published - August 1, 2020 | 12:46 AM IST

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