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बॉलीवुड ड्रग विवाद की वजह से सतर्क हैं विज्ञापनदाता

Last Updated- December 15, 2022 | 1:20 AM IST

बॉलीवुड में ड्रग के इस्तेमाल को लेकर चल रही जांच ने विज्ञापनदाताओं को सावधानी बरतने के लिए मजबूर कर दिया ताकि गलती की कोई गुंजाइश न बची रहे। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने जिन विज्ञापन एजेंसियों से बात की उन सबने स्वीकार किया है कि उनकी बातचीत अपने ग्राहकों के साथ शुरू हो गई थी कि वे उन फिल्म कलाकारों के ब्रांड विज्ञापन का इस्तेमाल करते वक्त संयम बरतें जिनका नाम इस जांच में सामने आया है। विज्ञापन एजेंसी स्केयरक्रो एमऐंडसी साची के संस्थापक निदेशक मनीष भट्ट ने कहा, ‘विज्ञापनदाता सावधान हैं क्योंकि पिछले कुछ महीनों में जांच का दायरा बढ़ा है। ज्यादातर ब्रांड ऐसे सेलेब्रिटी को पसंद करते हैं जिनकी छवि साफ.-सुथरी मानी जाती है। ऐसे में जिनका नाम इस जांच में आया है उनकी छवि निश्चित तौर पर नकारात्मक होगी।’
भट्ट ने विज्ञापनदाता के नाम का खुलासा किए बिना कहा, ‘हम हाल ही में एक ब्रांड के लिए किसी सेलेब्रिटी के साथ करार करने पर विचार कर रहे थे। लेकिन चल रही जांच की गति को देखते हुए हमने कंपनी को सलाह दी कि वह अभी के लिए फैसला टाल दे।’ फिल्म  अभिनेताओं का इस्तेमाल आमतौर पर ब्रांड में इस वजह से किया जाता है ताकि उनको लेकर ब्रांड की याद बरकरार रहे और उनका प्रचार-प्रसार बेहतर तरीके से हो। इससे विज्ञापन करने वाली हस्ती की बेहतर छवि भी काफी मायने रखती है।
जनवरी और जून 2020 के बीच की अवधि के लिए टैम एडडेक्स डेटा के मुताबिक फिल्म अभिनेताओं को तरजीह देना कम हुआ है क्योंकि कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन की वजह से विज्ञापनदाताओं को अपनी विज्ञापन रणनीतियों और बजट में फिर से बदलाव करना पड़ा। टैम एडेक्स ने कहा कि ड्रग की जांच ने विज्ञापनदाताओं को जुलाई-अगस्त में फिल्मी सितारों वाले सेलेब्रिटी विज्ञापन को ज्यादा न दिखाने के लिए मजबूर किया है। हालांकि अनलॉक प्रक्रिया शुरू होने के बाद जून से ही टेलीविजन विज्ञापन में सामान्य रूप से बढ़ोतरी दिख रही है।
टैम एडेक्स डेटा के मुताबिक फिल्मी कलाकारों वाले विज्ञापन करार पिछले साल के मुकाबले जुलाई-अगस्त में 30 फीसदी तक कम हो गए वहीं खिलाडिय़ों, विशेष रूप से क्रिकेटरों के विज्ञापन करार में पिछले साल के मुकाबले 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि क्रिकेटरों को विज्ञापन करारकर्ता के रूप में तरजीह देने की वजह से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पिछले हफ्ते शुरू हुई इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) है। ब्रांड सलाहकार कंपनी टीआरए रिसर्च के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) एन चंद्रमौलि ने कहा, ‘क्रिकेटर इस लिहाज से एक सुरक्षित दांव हैं क्योंकि आईपीएल चल रहा है। दूसरी बात यह है कि डोप टेस्ट उनकी दिनचर्या का हिस्सा है इसलिए कम से कम ब्रांडों को इस बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है कि विज्ञापन करार करने वाली हस्ती पर ड्रग से जुड़े किसी विवाद का दाग लगेगा।’   
साइडवेज विज्ञापन एजेंसी के सह संस्थापक अभिजित अवस्थी पहले ऑग्लिवी में नैशनल क्रिएटिव डाइरेक्टर रहे हैं और उनका कहना है कि उद्योग में यह चर्चा हो रही थी कि उन विज्ञापनों पर नियंत्रण किया जाए जिनमें वे कलाकार हैं जिनका नाम जांच में सामने आया है। टेलीविजन चैनलों के मुताबिक अभिनेत्री दीपिका पडुकोणे, श्रद्धा कपूर, सारा अली खान और रकुलप्रीत सिंह उन सितारों में शामिल हैं जिन्हें नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने पूछताछ के लिए बुलाया है ।
अवस्थी ने कहा, ‘अगर कोई लोकप्रिय नाम या चेहरा किसी विवाद में उलझा होगा तब ऐसी स्थिति में यह विज्ञापनदाताओं की स्वाभाविक प्रतिक्रिया होगी। यह तब तक जारी रहेगा जब तक इस मुद्दे का समाधान नहीं हो जाता। जो ब्रांड विज्ञापन के लिए फि ल्मी हस्तियों से बात कर रहे हैं वे अब इस वक्त इस बारे में कई बार सोचेंगे।’ विज्ञापन क्षेत्र से जुड़े संदीप गोयल के नेतृत्व में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ  ह्यूमन ब्रांड्स द्वारा पिछले हफ्ते कराए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि 18-30 साल की आयु वर्ग के 82 फीसदी उपभोक्ताओं ने कहा कि वे उन सेलेबिट्री द्वारा समर्थित ब्रांड नहीं खरीदेंगे जिनका नाम ड्रग जांच में सामने आया है। इस शोध के लिए 12 से 13 सितंबर के बीच विभिन्न शहरों में 487 लोगों से टेलीफ ोन पर संपर्क किया गया।
गोयल ने कहा कि नशीली दवाओं के इस्तेमाल के आरोपों ने विज्ञापन करार करने वाली हस्तियों को लेकर एक नकारात्मक छवि बनी है जिसे मिटाना मुश्किल है। फ्यूचरब्रांड्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ संतोष देसाई ने कहा कि पहले भी फ रदीन खान जैसे अभिनेताओं का नाम जब ड्रग जांच में सामने आया था तब उनका करियर फीका पड़ गया था। उन्होंने कहा, ‘कोई भी विवाद किसी सेलेब्रिटी की प्रतिष्ठा को धूमिल कर सकता है। सोशल मीडिया के इस दौर में मशहूर लोगों को कुछ ज्यादा ही सतर्क रहना होगा कि वे लोगों के सामने कैसे पेश आते हैं और वे किस तरह की जीवनशैली को बढ़ावा देते हैं।’
एपीएसी के सीईओ और देंत्सु एजिस नेटवर्क के चेयरमैन (भारत) आशिष भसीन ने कहा कि इसका प्रभाव अस्थायी होगा। वह कहते हैं, ‘इस तरह के मुद्दे का सामान्यीकरण नहीं किया जा सकता है। हालांकि मौजूदा जांच में सामने आए नामों का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानी जरूर बरतनी होगी लेकिन अमिताभ बच्चन जैसे सदाबहार सितारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। विज्ञापनदाता उनके और अन्य विश्वसनीय अभिनेताओं के साथ काम करना जारी रखेंगे।’

First Published - September 25, 2020 | 12:24 AM IST

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