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रूस से तेल खरीदना बंद करो, नहीं तो 50% टैरिफ भरते रहो: हावर्ड लटनिक की भारत को चेतावनी

ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में लटनिक ने कहा कि भारत को अमेरिका, अमेरिकी डॉलर और अपने सबसे बड़े ग्राहक आधार अमेरिकी उपभोक्ताओं का समर्थन करना होगा

Last Updated- September 05, 2025 | 10:54 PM IST
US Commerce Secretary Howard Lutnick
अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हावर्ड लटनिक | फाइल फोटो

भारत पर रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदने के ​लिए अमेरिका तरह-तरह से दबाव बना रहा है। यह दबाव और बढ़ाते हुए शुक्रवार को अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हावर्ड लटनिक ने भारत को चेतावनी दी कि वह रूस और चीन के बीच सेतु का काम करना बंद कर दे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत या तो ब्रिक्स से बाहर निकल जाए और रूस से तेल खरीदना बंद करे अथवा 50 प्रतिशत टैरिफ का भुगतान करता रहे।

ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में लटनिक ने कहा कि भारत को अमेरिका, अमेरिकी डॉलर और अपने सबसे बड़े ग्राहक आधार अमेरिकी उपभोक्ताओं का समर्थन करना होगा अन्यथा उसे 50 प्रतिशत टैरिफ का भुगतान करते रहना होगा। लटनिक यह भी बोले, ‘देखते हैं कि यह कब तक चलता है।’ उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि भारत एक या दो महीने में अमेरिका वापस आएगा, डॉनल्ड ट्रंप से माफी मांगेगा और व्यापार समझौते के लिए कहेगा। इससे कुछ ही घंटे पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत और रूस चीन के धोखे में आ गए हैं। वे ‘सबसे गहरे अंधेरे में खो’ गए हैं। इस पोस्ट में अपनी गूढ़ टिप्पणी के साथ उन्होंने बीते सोमवार को उत्तरी चीनी शहर थ्यानचिन में शांघाई सहयोग संगठन (एससीओ) बैठक के दौरान तीनों देशों के नेताओं की एक तस्वीर भी साझा की है। 

चीन के विदेश मंत्रालय और क्रेमलिन ने अभी तक ट्रंप की पोस्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन ट्रंप के ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करने के कुछ मिनट बाद भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शाम 4 बजे साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में अपनी प्रतिक्रिया सिर्फ ‘नो कमेंट्स’ ही कहा। 

इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत यह तय करने के लिए स्वतंत्र है कि कौन सा (आपूर्ति स्रोत) हमारे लिए सबसे अच्छा है। उन्होंने कहा, ‘इसलिए हम निस्संदेह (रूस का तेल) खरीदेंगे।’ उन्होंने बताया कि भारत अपनी अधिकांश विदेशी मुद्रा कच्चा तेल खरीदने पर खर्च करता है। भारत अमेरिकी राष्ट्रपति की पोस्ट को कोई मुद्दा नहीं बनाना चाहता, लेकिन निर्मला सीतारमण और बाद में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की इस टिप्पणी की आलोचना की कि भारत क्रेमलिन (रूस) के लिए ‘लॉन्ड्रोमैट’ (लॉन्ड्री या धुलाई फैक्टरी) बन गया है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर सोमवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा द्वारा बुलाई गई ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले हैं। इसमें कहा गया है कि चीन द्वारा महत्त्वपूर्ण खनिजों, सुरंग बोरिंग मशीनों और उर्वरकों की आपूर्ति दोबारा शुरू करने में प्रगति हुई है, जिस पर 19 अगस्त को चीन के विदेश मंत्री वांग यी की नई दिल्ली यात्रा के दौरान चर्चा हुई थी।

ट्रंप ने अपनी ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा है, ‘ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को सबसे गहरे अंधेरे, चीन के हाथों खो दिया है। हो सकता है कि उनका भविष्य लंबा और समृद्ध हो!’ थ्यानचिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की एक साथ आईं तस्वीरों और वीडियो ने यूरोपीय और अमेरिकी मीडिया में हलचल मचा दी थी। लेकिन एससीओ बैठक के दौरान दिखी इस तिगड़ी की जुगलबंदी के बारे में ट्रंप ने पहली बार अपनी पोस्ट में खुलकर नाराजगी जाहिर की है।

नवारो की टिप्पणियों पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि वैश्विक राजनयिक दुनिया ‘आश्चर्यचकित है कि भारत के लिए इस तरह की अभिव्यक्ति का उपयोग किया जा रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘राजनयिक क्षेत्र में जो लोग हैं, वे इस पर प्रतिक्रिया देंगे या इससे निपटेंगे।’ इसके बाद दिन में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जायसवाल ने कहा, ‘हमने नवारो द्वारा दिए गए गलत और भ्रामक बयानों को देखा है। हम जाहिर तौर पर उन्हें पूरी तरह खारिज करते हैं।’

निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च करों से प्रभावित व्यवसायों की मदद के लिए उपायों पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा, ‘हम अपने निर्यातकों को अधर में नहीं छोड़ सकते। टैरिफ बोझ को कम करने में मदद करने के लिए एक पैकेज आने वाला है।’

First Published - September 5, 2025 | 10:48 PM IST

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