गाजा में खाने-पीने के सामान की किल्लत के बीच फलस्तीनियों ने सोमवार को रमजान के रोजों की शुरुआत की। इजराइल और हमास के बीच बीते पांच महीने से जारी युद्ध पर फिलहाल विराम लगने की संभावना नजर नहीं आ रही है।
रविवार रात टूटी-फूटी इमारतों के मलबे के बीच नमाज अदा की गई। कुछ लोगों ने आश्रय के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे तंबुओं की सजावट कर रमजान का स्वागत किया।
पांच महीने से जारी युद्ध में 30 हजार से अधिक फलस्तीनी मारे जा चुके हैं जबकि गाजा का अधिकतर हिस्सा मलबे के ढेर में तब्दील हो गया है। खाने-पीने के सामान की किल्लत होने से यह सवाल खड़ा हो गया है कि रोजा (उपवास) रखने वाले लोग शाम में होने वाला ‘इफ्तार’ किस तरह करेंगे।
रविवार को रफह में खाने-पीने का सामान खरीद रहीं सबह-अल-हेन्दी ने कहा, “आपको किसी की आंखों में खुशी नहीं दिखेगी। हर परिवार गमगीन है। हर परिवार का कोई न कोई शहीद हुआ है।” अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने वार्षिक रमजान संदेश में स्वीकार किया कि यह महीना “अत्यधिक पीड़ा के बीच” शुरू हुआ है।
उन्होंने कहा, “आने वाले दिनों दुनियाभर में मुस्लिम रमजान के रोजे रखेंगे, ऐसे में फलस्तीनी लोगों की पीड़ा कई लोगों के जेहन में होगी। यह मेरे जेहन में भी है।”
अमेरिका और अन्य देशों ने हाल के दिनों में विमानों और हेलीकॉप्टरों से खान-पान सामग्री भेजनी शुरू की है, लेकिन मानवतावादी समूहों का कहना है कि ये सामान महंगे और अपर्याप्त हैं।
स्पेन के सहायता समूह ‘ओपन आर्म्स’ से संबंधित एक जहाज के 200 टन खाद्य सामग्री लेकर पड़ोसी देश साइप्रस से गाजा पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह जहाज कब रवाना होगा।
इजराइल ने कहा है कि वह समुद्र के रास्ते सामान भेजे जाने का स्वागत करता है और गाजा को जाने वाले सामान के साइप्रस से रवाना होने से पहले इसका निरीक्षण करेगा। जहाज के साइप्रस से गाजा पहुंचने में दो से तीन दिन लगने की उम्मीद है।