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Explainer: 50 शहरों में हिंसा, खामेनेई की धमकी और ट्रंप की चेतावनी…ईरान में आखिर हो क्या रहा है?

सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने आज पहली बार प्रदर्शन पर खुलकर बोला। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन दंगाइयों को बख्शा नहीं जाएगा

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ऋषभ राज   
Last Updated- January 03, 2026 | 6:41 PM IST

ईरान में पिछले एक हफ्ते से चल रहा विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश की खराब होती अर्थव्यवस्था ने लोगों को सड़कों पर ला दिया है, और इसको लेकर हो रहा विरोध प्रदर्शन इतना बड़ा हो चुका है कि इसमें कम से कम 10 लोगों की जान जा चुकी है। इस बीच 86 साल के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने शनिवार को पहली बार इस पर खुलकर अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन दंगाइयों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। तेहरान में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अधिकारियों को लोगों से बात करनी चाहिए, लेकिन जो लोग दंगे फैला रहे हैं, उनके साथ कोई बातचीत नहीं होगी। उन्हें उनकी जगह दिखानी पड़ेगी।

बता दें कि बीते कई दिनों से हो रहे ये प्रदर्शन ईरान के लिए नई चुनौती बन गए हैं। इन विरोध प्रदर्शन को 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शन से भी बड़ा बताया जा रहा है, जब 22 साल की अमीनी को हिजाब ठीक से न पहनने पर पुलिस ने हिरासत में लिया था और उनकी मौत हो गई थी। हालांकि, इस बार विरोध पूरे देश में उतनी उग्रता से नहीं फैला नहीं हैं, फिर भी लोगों का गुस्सा साफ दिख रहा है। अर्थव्यवस्था की हालत इतनी खराब है कि रियाल की कीमत लगातार गिर रही है, और लोग रोजमर्रा की चीजों के लिए परेशान हैं।

खामेनेई ने इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इजराइल जैसे विदेशी ताकतों का हाथ बताया है। उन्होंने बिना कोई सबूत दिए कहा कि दुश्मन देश व्यापारियों और दुकानदारों पीछे लगकर लोगों से इस्लाम, ईरान और इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ नारे लगवा रहे हैं। उनके मुताबिक, ये प्रदर्शनकारी दुश्मन के भड़काए या खरीदे लोग हैं।

हिंसा का नया दौर: कोम और हरसिन में मौतें

प्रदर्शनों में हिंसा भी बढ़ती जा रही है। शनिवार की रात दो ऐसी घटनाएं हुईं जिन्होंने माहौल और गर्म कर दिया। कोम शहर में, जो ईरान के बड़े शिया मदरसों का केंद्र है, एक ग्रेनेड फटने से एक आदमी की मौत हो गई। सरकारी अखबार IRAN के मुताबिक, सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि वो आदमी खुद ग्रेनेड लेकर लोगों पर हमला करने जा रहा था।

कोम तेहरान से करीब 130 किलोमीटर दूर है, और वहां की सड़कों पर आग लगने की वीडियो ऑनलाइन घूम रही हैं। दूसरी मौत हरसिन कस्बे में हुई, जो तेहरान से 370 किलोमीटर दूर केरमानशाह प्रांत में है। यहां बसिज फोर्स के एक सदस्य पर बंदूक और चाकू से हमला हुआ, और उसकी मौत हो गई। बसिज ईरान की पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड की वो ब्रांच है जो वॉलंटियर्स से बनी है।

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ये विरोध प्रदर्शन अब देश के 31 में से 22 प्रांतों के लगभग 50 शहरों में फैल चुके हैं, और 100 से ज्यादा जगहों पर लोग सड़कों पर हैं। अमेरिका की ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, प्रदर्शनकारी न सिर्फ अर्थव्यवस्था पर गुस्सा निकाल रहे हैं, बल्कि ईरान की धार्मिक सरकार के खिलाफ भी नारे लगा रहे हैं। रिफॉर्मिस्ट प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियान की सरकार प्रदर्शनकारियों से बात करने की कोशिश कर रही है।

पेजेशकियान ने खुद माना है कि रियाल की गिरावट पर उनका ज्यादा बस नहीं चल रहा, लेकिन वो लोगों की बात सुनना चाहते हैं। जून में इजराइल से हुई जंग के बाद ईरान की अर्थव्यवस्था और बिगड़ी है, जब अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर बम गिराए थे।

ट्रंप की धमकी: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के मदद करेंगे

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को चेतावनी दी कि अगर वो शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करता है, तो अमेरिका उनकी मदद करेगा। ट्रंप के इस बयान से ईरान में गुस्सा भड़क गया, और अधिकारियों ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी। ट्रंप ने शनिवार को ये भी कहा कि अमेरिकी फोर्सेस ने वेनेजुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को पकड़ लिया है, जो ईरान का पुराना दोस्त है। ये खबर ईरान के लिए झटका है, क्योंकि मादुरो तेहरान के साथ मिलकर काम करते रहे हैं। 

ईरान ने हाल ही में कहा है कि वो देश में कहीं भी ‘यूरेनियम एनरिचमेंट’ नहीं कर रहा, ताकि पश्चिमी देशों को बातचीत का संकेत दे सके और प्रतिबंध हटवाए। लेकिन ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को चेतावनी दी है कि वो अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम दोबारा शुरू न करे। अभी तक कोई बातचीत नहीं हुई है, और माहौल तनावपूर्ण है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हैं, और सुरक्षा बलों को अब सुप्रीम लीडर से सख्ती बरतने का हरा सिग्नल मिल गया लगता है।

ये विरोध ईरान की सत्ता के लिए बड़ा इम्तिहान हैं, जहां अर्थव्यवस्था की दिक्कतों ने लोगों को एकजुट कर दिया है। कोम जैसी धार्मिक जगहों पर हिंसा फैलना चिंता की बात है, क्योंकि वहां मदरसे और धार्मिक नेता ज्यादा प्रभाव रखते हैं। हरसिन की घटना से बसिज फोर्स और सख्त हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप की बातों ने ईरान को और अलग-थलग कर दिया है, जबकि वो प्रतिबंध हटवाने की कोशिश में है। प्रदर्शन कितने दिन और चलेंगे, ये देखना बाकी है, लेकिन फिलहाल सड़कें गर्म हैं।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

First Published : January 3, 2026 | 6:41 PM IST