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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने 2026 की शुरुआत सतर्कता के साथ की है। जनवरी के पहले दो ट्रेडिंग दिनों में उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से करीब 7,608 करोड़ रुपये ($846 मिलियन) की निकासी की।
यह निवेशकों के 2025 में बड़े पैमाने पर निवेश बाहर निकालने के चलन को जारी रखता है। पिछले साल FPIs ने 1.66 ट्रिलियन रुपये ($18.9 बिलियन) की सबसे बड़ी निकासी की थी। उस समय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ, वैश्विक व्यापार संबंध तनाव में थे और अमेरिकी टैरिफ की संभावनाओं ने भी बाजार में दबाव बनाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में स्थिति बदल सकती है।
Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने कहा कि देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि और कॉर्पोरेट मुनाफे में सुधार की उम्मीद विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर सकती है।
Angel One के सीनियर एनालिस्ट वकारजावेद खान ने कहा कि भारत-यूएस व्यापार संबंधों में सामान्यीकरण, वैश्विक ब्याज दरों में स्थिरता और डॉलर-रुपया की स्थिरता विदेशी निवेश के लिए अनुकूल माहौल बना सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि शेयर बाजार की वर्तमान वैल्यूएशन पिछले साल के मुकाबले अब निवेशकों के लिए आरामदायक नजर आती है।
फिर भी, जनवरी में विदेशी निवेशकों का सतर्क रहना कोई नई बात नहीं है। पिछले दस सालों में वे आठ बार जनवरी में पैसा निकाल चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि FPIs का रुझान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और बाजार की स्थिति पर निर्भर रहेगा। फिलहाल, उच्च वैल्यूएशन का दबाव कम हुआ है, जिससे भविष्य में निवेश की उम्मीदों को बढ़ावा मिल सकता है।