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भारत ने मॉरीशस को 68 करोड़ डॉलर का पैकेज दिया, हिंद महासागर में रणनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश

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भारत दौरे पर आए मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने भारतीय उद्यमियों से अपने देश में निवेश करने का किया आग्रह

Last Updated- September 11, 2025 | 11:00 PM IST
Dr Navin Ramgoolam
मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम के साथ प्रधानमंत्री मोदी

चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखने के लगातार प्रयासों के तहत भारत ने गुरुवार को मॉरीशस के लिए 68 करोड़ डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की। इसमें मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 2.5 करोड़ डॉलर की बजट सहायता भी शामिल है।

प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मॉरीशस में यूपीआई और रुपे कार्ड से भुगतान शुरू होने के बाद दोनों देश स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि भारत हिंद महासागर में मॉरीशस के विशेष आर्थिक क्षेत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। अनुदान और ऋण के रूप में भारत की ओर से दी जाने वाली सहायता में चागोस द्वीप समूह के समुद्री संरक्षित क्षेत्र के विकास और निगरानी के लिए सहयोग भी शामिल है। यह वह जगह है, जहां डिएगो गार्सिया द्वीप पर अमेरिकी-ब्रिटिश हवाई अड्डा है।

भारत दौरे पर आए मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने भारतीय उद्यमियों से अपने देश में निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि मॉरीशस अफ्रीकी संघ, दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय और पूर्वी एवं दक्षिणी अफ्रीका के लिए कॉमन मार्केट का सदस्य है और इनकी मॉरीशस के साथ कई दोहरी कराधान बचाव संधियां हैं, जिनसे भारतीय व्यवसायी भी लाभान्वित हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री रामगुलाम के नेतृत्व में वाराणसी में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की वार्ता के बाद द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।  रामगुलाम अपने छह कैबिनेट मंत्रियों के साथ 9 सितंबर को 8 दिन के लिए भारत की राजकीय यात्रा पर आए हैं। मॉरीशस को भारत की सहायता और आर्थिक पैकेज का प्रमुख पहलू मॉरीशस के व्यापक जल क्षेत्र की सुरक्षा और रक्षा तैयारी को बढ़ाना है। भारत चागोस समुद्री संरक्षित क्षेत्र की निगरानी में भी मॉरीशस की मदद करेगा।

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि ब्रिटेन के साथ अपनी हालिया संधि के परिणामस्वरूप मॉरीशस को अब बहुत बड़े विशेष आर्थिक क्षेत्र की रक्षा एवं अपने हितों की सुरक्षा करनी है। इस प्रयास में भारत उसका पसंदीदा भागीदार है।

प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने रामगुलाम और मॉरीशस के लोगों को चागोस समझौते के संपन्न होने पर बधाई दी और इसे द्वीपीय राष्ट्र की संप्रभुता के लिए ऐतिहासिक जीत बताया। उन्होंने कहा, ‘भारत ने हमेशा उपनिवेशवाद को समाप्त करने और मॉरीशस की संप्रभुता की पूर्ण मान्यता का समर्थन किया है।’

ब्रिटेन ने बीते मई में चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंप दी थी, लेकिन 99 साल के पट्टे के तहत सैन्य अड्डे का नियंत्रण अपने पास बरकरार रखा। समुद्री संरक्षित क्षेत्र, जहां कारोबार के लिए मछली पकड़ने पर प्रतिबंध है, दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है। रामगुलाम ने विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र की निगरानी में भारत से मदद मांगी, क्योंकि उनके देश में इसके लिए क्षमताओं की कमी है। रामगुलाम ने मोदी के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मॉरीशस चाहता है कि भारत के झंडे वाले जहाज इस क्षेत्र में गश्त करें। अंग्रेजों ने हमें एक जहाज की पेशकश की थी, लेकिन हमने कहा कि हम भारत से एक जहाज लेंगे, क्योंकि प्रतीकात्मक रूप से यह बेहतर होगा।

मीडिया को जारी अपने बयान में मोदी ने कहा कि भारत और मॉरीशस सिर्फ भागीदार नहीं, बल्कि एक परिवार हैं।’ उन्होंने कहा, ‘भारत और मॉरीशस दो राष्ट्र हैं, लेकिन हमारे सपने और भाग्य एक हैं।’ स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार के मुद्दे पर अधिकारियों ने कहा कि संबंधित नैशनल बैंक तौर-तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं और इसे जल्द ही चालू कर दिया जाएगा।

भारत विशेष आर्थिक पैकेज के तहत मॉरीशस को कम से कम 10 परियोजनाओं को लागू करने में मदद करेगा, जिसमें पोर्ट, हवाई अड्डे और सड़क जैसे प्रमुख बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और नए स्कूल एवं अस्पताल बनाना शामिल है। मोदी ने कहा, ‘यह पैकेज सहायता नहीं है। यह हमारे साझा भविष्य में एक निवेश है।’

दोनों देशों के बीच हुए समझौतों में से एक हाइड्रोग्राफी पर है, जिसके तहत दोनों पक्ष संयुक्त सर्वेक्षण, नेविगेशन चार्ट और मॉरीशस के विशेष आर्थिक क्षेत्र के हाइड्रोग्राफिक डेटा पर एक साथ काम करेंगे।

मई के बाद से मॉरीशस के प्रधानमंत्री की यात्रा के अलावा भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में द्वीपीय राष्ट्रों के कई नेताओं की मेजबानी की है। इनमें मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, फिलिपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर, फिजी और सिंगापुर के प्रधानमंत्री, सितिवेनी लिगामामादा रबुका और लॉरेंस वोंग शामिल हैं।

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First Published - September 11, 2025 | 11:00 PM IST

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