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वंदे मातरम के 150 साल: पीएम मोदी का कांग्रेस पर हमला, कहा- बंटवारे के लिए झुकी थी

पीएम मोदी ने वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि मुस्लिम लीग के दबाव में कांग्रेस ने गीत के टुकड़े किए और भारत के बंटवारे के लिए झुकना पड़ा।”

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- December 08, 2025 | 2:45 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में 150 Years of Vande Mataram पूरे होने पर चर्चा करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब पंडित जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष थे, तब मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम के कुछ हिस्से बदल दिए गए। पीएम मोदी ने कहा, “कांग्रेस वंदे मातरम् के बंटवारे पर झुकी, इसलिए उसे एक दिन भारत के बंटवारे के लिए झुकना पड़ा।”

उन्होंने सदन में बताया कि जब मोहम्मद अली जिन्ना ने वंदे मातरम् के विरोध का नारा बुलंद किया, तो नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखकर जिन्ना की भावना के पक्ष में सहमति जताई। इसके लिए कांग्रेस ने सामाजिक सद्भाव का हवाला दिया। पीएम मोदी ने इसे तुष्टीकरण की राजनीति करार दिया और कहा कि कांग्रेस की नीतियां आज भी वैसी की वैसी हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ राजनीतिक संघर्ष का प्रतीक नहीं था, बल्कि यह आजादी की जंग का एक महत्वपूर्ण मंत्र था। उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ों ने भारत में लंबे समय तक राज करने के लिए “बांटो और राज करो” नीति अपनाई और बंगाल को इसका प्रयोगस्थल बनाया।

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि वंदे मातरम के 50 साल और 100 साल पूरे होने पर देश कठिन दौर से गुजरा। 100 साल पूरे होने पर देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और संविधान की अवहेलना हुई थी। उन्होंने सदन में कहा कि वंदे मातरम् ने देश को खड़ा किया और आज भी यह आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी आंदोलन की प्रेरणा है।

कांग्रेस ने मोदी के आरोपों पर पलटवार किया। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और जसवंत सिंह ने जिन्ना की प्रशंसा की थी। उन्होंने याद दिलाया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1940 के दशक में जिन्ना के साथ बंगाल में गठबंधन किया था। जयराम रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं, लेकिन क्या वे इन सवालों का जवाब देंगे?”

प्रधानमंत्री मोदी ने सदन को याद दिलाया कि वंदे मातरम की यात्रा 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने बंगाल से शुरू की थी। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले महापुरुषों का सपना स्वतंत्र भारत था, वहीं आज की पीढ़ी का लक्ष्य समृद्ध और विकसित भारत बनाना है।

-भाषा इनपुट के साथ

First Published : December 8, 2025 | 2:45 PM IST