प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर बदल रही है। एक ओर गांवों को शहर से जोड़ने के लिए बसें चलाने के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं बड़े शहरों में मौजूद बस अड्डों को मॉल की तरह चमाचम और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। प्रदूषण में कमी लाने के लिए हरित परिवहन को बढ़ावा देते हुए हर जिले में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी हो रही है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को आज की सबसे अहम जरूरत बताते हुए मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि शुरुआत में उत्तर प्रदेश के पास सिर्फ 1500 ई-बसें थीं और वे केवल शहरों में चलती थीं। अभी तक केवल 15 शहरों से ही इलेक्ट्रिक बसों का संचालन हो रहा था, लेकिन अब सरकार ने इन्हें बढ़ाकर 43 जिलों और कई ग्रामीण इलाकों तक पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार नई इलेक्ट्रिक बसों के लिए निविदाएं निकाल रही है, लेकिन मुश्किल यह है कि पूरे देश में बहुत कम कंपनियां ई-बसें बनाती हैं। इसी वजह से इन बसों की आपूर्ति समय पर नहीं हो पाती। मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले एक साल में 5000 ई-बसों की निविदा जारी हुईं, लेकिन कंपनियां सभी बसें उपलब्ध नहीं करा पाईं, क्योंकि उनके पास उतनी संख्या में बसें बनाने की क्षमता नहीं है।
इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अशोक लीलैंड जल्द ही लखनऊ में इलेक्ट्रिक बसों की फैक्ट्री शुरू करेगी। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने तय किया है कि वह हर साल इस कंपनी से 2500 इलेक्ट्रिक बसें खरीदेगा। मंत्री ने कहा कि सरकार का मकसद है कि आने वाले वर्षों में धीरे–धीरे डीजल बसों की जगह इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएं, ताकि प्रदूषण कम हो और यात्रियों को बेहतर यात्रा का अनुभव हो। उनका कहना है कि अगर सभी बसें इलेक्ट्रिक हो जाएं तो प्रदूषण में लगभग 38% तक कमी लाई जा सकती है, जो पूरे प्रदेश के लिए बहुत बड़ा बदलाव होगा।
मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि पहले परिवहन निगम अपनी पुरानी बसों को कबाड़ समझकर बेच देता था, लेकिन अब सरकार ऐसा नहीं करती है। अब पुरानी बसों को फेंकने के बजाय इन्हें इलेक्ट्रिक बसों में बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक नई इलेक्ट्रिक बस बनाने में 1 से 1.5 करोड़ रुपये तक लागत आती है, जबकि पुरानी बस को ईवी में बदलने में सिर्फ 60–70 लाख रुपये खर्च होते हैं। इससे सरकार का पैसा भी बचेगा और पुरानी बसें दोबारा नई बनकर सड़कों पर दौड़ेंगी और यात्रियों को अच्छी सुविधा देंगी।
मंत्री ने बताया कि डीजल बसें चलाने में सरकार पर 17 रुपये प्रति किलोमीटर तक खर्च आया करता था मगर इलेक्ट्रिक बसों में यह खर्च घटकर सिर्फ 5 रुपये प्रति किलोमीटर रह सकता है। कई मार्गों पर बदली गई इलेक्ट्रिक बसें ट्रायल के रूप में चलाई जा रही हैं और अब तक इसके बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।
उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के मुताबिक सरकार राज्य की परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि बस अड्डों को आधुनिक बनाने, इलेक्ट्रिक बसें बढ़ाने और दूरदराज के गांवों में बसें पहुंचाने पर तेजी से काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि सरकार चाहती है कि पूरे उत्तर प्रदेश में लोगों को आसान, आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा सुविधा मिले, जिससे यहां विकास का पहिया और तेज हो सके। इस योजना के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए परिवहन मंत्री ने कहा कि ये बसें सुबह गांवों से चलेंगी और आसपास के इलाके के यात्रियों को लेकर नजदीकी जिला मुख्यालय या तहसील तक पहुंचेंगी और शाम को वापस होंगी।
इन बसों में कार्यरत कर्मी भी संबंधित गांवों के होंगे। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के 1 लाख 4 हजार गांवों में से केवल 12,400 गांव ही बचे हैं जहां अभी परिवहन निगम की बसें नहीं पहुंच पाई हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने एक व्यापक योजना तैयार की है। लोक निर्माण विभाग से बातचीत कर कई स्थानों पर सड़कें चौड़ी कराई जा रही हैं, जिससे बसों की आवाजाही आसान हो सके।
मंत्री ने कहा कि अगले तीन महीनों के भीतर 7000 गांवों में बस सेवा शुरू कर दी जाएगी। जहां सड़कें संकरी हैं या बड़े वाहनों की आवाजाही मुश्किल है, वहां छोटे आकार की 32–40 सीटर बसें चलाई जाएंगी। उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य किसी भी गांव को परिवहन सुविधा से अछूता नहीं छोड़ना है।
मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 23 बस अड्डों को पीपीपी मॉडल पर पूरी तरह आधुनिक रूप दिया जा रहा है। इन बस अड्डों को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है, जहां नागरिकों को यात्रा के साथ-साथ आराम और साफ-सुथरे माहौल में खरीदारी का अनुभव मिलेगा। इसके लिए बस अड्डों पर शॉपिंग मॉल जैसी सुविधाएं होंगी। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि बस अड्डों में यात्रियों के लिए आधुनिक लाउंज, साफ शौचालय और रुकने की उत्तम व्यवस्था होगी।
लखनऊ में इस दिशा में सबसे अधिक काम हो रहे हैं। शहर में तीन बड़े बस अड्डे तैयार किए जा रहे हैं। इनमें पहला गोमती नगर रेलवे स्टेशन के पास, जहां लगभग 1000 करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है। दूसरा चारबाग के पास और तीसरा एयरपोर्ट के निकट बन रहा है। मंत्री ने बताया कि इसके अलावा कानपुर, वाराणसी, मेरठ और अयोध्या सहित कई शहरों में भी नए बस अड्डों का निर्माण तेजी से चल रहा है। कई परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं, कई का शिलान्यास हो गया है। उम्मीद है कि 2027 से पहले इनमें से अधिकतर बस अड्डे यात्रियों को सेवाएं देने लगेंगे। लक्ष्य है कि हर जिले में कम से कम एक आधुनिक बस अड्डा संचालित हो।
मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 23 बस अड्डों को पीपीपी मॉडल पर बिल्कुल नए और आधुनिक रूप में बनाया जा रहा है। इन बस अड्डों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से तैयार किया जा रहा है। इससे यात्रियों को बेहतर यात्रा सुविधा के साथ आरामदायक ठहराव और खरीदारी, साफ–सुथरे शौचालय और अच्छे लाउंज का अनुभव मिल सकेगा। उनका कहना था कि आने वाले समय में लोग बस अड्डे पर भी उतनी ही अच्छी सुविधाएं पाएंगे जितनी एयरपोर्ट पर मिलती हैं।
मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि जब उन्होंने पद संभाला था, उस समय उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के पास 8500 बसें थीं, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह संख्या बढ़कर 14,500 हो चुकी है। आने वाले दिनों में 1650 नई बसें और जुड़ेंगी। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2027 तक बेड़े में कम से कम 25,000 बसें शामिल करने का है। इससे न केवल बस सेवा व्यापक होगी, बल्कि यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और समय पर परिवहन उपलब्ध कराया जा सकेगा। दयाशंकर सिंह ने कहा कि इन सभी कदमों से उत्तर प्रदेश की परिवहन व्यवस्था तेजी से बदल रही है।
आधुनिक बस अड्डे, गांवों तक बस सेवा और इलेक्ट्रिक बसों का बढ़ता दायरा, ये सब मिलकर यूपी को एक ऐसी जगह बना रहे हैं जहां यात्रा आसान, आरामदायक और पर्यावरण के लिए बेहतर एवं अनुकूल हो।
दशकों बाद उत्तर प्रदेश में परिवहन के क्षेत्र में यात्री सुविधाओं, सुरक्षा, प्रदूषण के साथ ही कनेक्टिविटी के स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर सुधार किए जा रहे हैं। परिवहन मंत्री का मानना है कि इन सुधारों व बदलावों के चलते उत्तर प्रदेश देश के अन्य राज्यों के सामने मिसाल बनेगा। साथ इससे पर्यावरण को बेहतर बनाने, प्रदूषण पर नियंत्रण करने तथा संपर्क सुविधाओं के जरिए यात्रा समय कम करने में खासी मदद मिलेगी।