उत्तर प्रदेश के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल | फाइल फोटो
उत्तर प्रदेश की बेहतर वित्तीय स्थिति का एक प्रमुख पहलू यह है कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की पिछले लगभग नौ वर्षों में आबकारी विभाग से होने वाली राजस्व आय लगभग चार गुना हो गई है। वित्त वर्ष 2016-17 में यह आय 14,000 करोड़ रुपये से थोड़ी अधिक थी, जो 2024-25 में बढ़कर 52,573 करोड़ रुपये हो गई है और वर्तमान वित्त वर्ष के अंत तक लगभग 63,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
मार्च 2022 से उत्तर प्रदेश में आबकारी और निषेध के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री के रूप काम कर रहे नितिन अग्रवाल ने राज्य सरकार की आबकारी से होने वाली राजस्व आय में वृद्धि रूपी बदलाव का नेतृत्व किया है। विधानसभा में हरदोई सदर निर्वाचन क्षेत्र से चौथी बार विधायक अग्रवाल के पास एमबीए की डिग्री है और उन्होंने ‘यूपी एक्साइज सिटिजन ऐप’ जैसी पहल का नेतृत्व किया है ताकि शराब बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
लखनऊ में आयोजित बिज़नेस स्टैंडर्ड समृद्धि कार्यक्रम में उद्घाटन भाषण में अग्रवाल ने राज्य के आबकारी विभाग की राजस्व वृद्धि में आए बदलाव का श्रेय उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार को दिया। उन्होंने कहा कि आबकारी विभाग ने अपनी खामियों को दूर किया है, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की है ताकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश को एक लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में अपनी भूमिका निभा सके।
अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब शीरा और एथनॉल के उत्पादन में देश का सबसे अव्वल राज्य बन गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अवैध शराब पर सख्ती की है। अग्रवाल ने कहा, ‘2017 से अब तक उत्तर प्रदेश में अवैध शराब के कारण एक भी जान नहीं गई है, जो महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जहां 24 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि पड़ोसी राज्यों से होने वाली तस्करी को भी रोका गया है और राज्य सरकार की उद्योग-हितैषी नीतियों के कारण शराब उद्योग की वार्षिक वृद्धि दर 13-14 प्रतिशत रही है।
अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश के देश की अपराध राजधानी से विकास इंजन में बदल जाने का श्रेय मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की नीतियों को दिया। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि यह एक बड़ा परिवर्तन है। जब इस सरकार ने 2017 में सत्ता संभाली, तब हमें बड़े चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की वृद्धि धीमी थी और अपराध व्यापक था। तब से जो बदलाव आया है, वह विशाल और ऐतिहासिक है।’
उन्होंने कहा कि सरकार ने 2017 के बाद अपराधों पर रोक लगाई है और बुनियादी अधोसंरचना विकास किया है। उत्तर प्रदेश के पास अब देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे नेटवर्क है और इसने अंदरूनी जल एवं वायु संपर्क में भी सुधार किया है। राज्य में कई हवाई अड्डे हैं, जिनमें चार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल हैं, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही राज्य के पांचवें अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। अग्रवाल ने कहा कि जब कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचा दुरुस्त हो जाता है, तो उद्योग भी निवेश के लिए आने लगते हैं और योगी आदित्यनाथ की सरकार में उत्तर प्रदेश के साथ भी ऐसा ही हुआ है।
अग्रवाल ने कहा कि 2017 में उत्तर प्रदेश का जीएसडीपी 13.3 लाख करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 30 लाख करोड़ रुपये हो गया है, और इस वित्तीय वर्ष के अंत तक हमारा लक्ष्य इसे 35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है। उन्होंने बताया कि विनिर्माण क्षेत्र ने राज्य के सकल मूल्यवर्धन में 2.81 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है, जो 2017 के स्तर से ढाई गुना से अधिक की वृद्धि है।
अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के निर्यात के सामने बड़ी चुनौती है कि यह राज्य चारों तरफ से जमीन से घिरा है। इसके बावजूद प्रदेश का निर्यात 2017 में 84,000 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 1.86 लाख करोड़ रुपये हो गया है और पिछले साढ़े आठ साल में बेरोजगारी 6.4 प्रतिशत से घटकर 2.4 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने कहा, ‘हमने सरकारी क्षेत्र में 8 लाख और निजी क्षेत्र में 90 लाख नौकरियां सृजित की हैं।’ उन्होंने बताया कि सरकार की नीतियों के परिणामस्वरूप राज्य की प्रति व्यक्ति आय में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जो 2017 में 54,500 रुपये से बढ़कर 2025 में 1,08,000 रुपये हो गई है।
उन्होंने कहा कि उद्योगों की संख्या 2015-17 में 13,000 से बढ़कर 27,295 हो गई है। इनमें छोटे और मझोले उद्योग शामिल हैं। राज्य सरकार के निवेश सम्मेलनों ने 45 लाख करोड़ रुपये मूल्य के निवेश प्रस्तावों को आकर्षित किया है, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों का शिलान्यास किया जा चुका है।
मंत्री ने कहा, ‘हम अब देश में कारोबारी सुगमता की रैंकिंग में दूसरे स्थान पर हैं और महाराष्ट्र के बाद जीएसडीपी में दूसरी सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था हैं।’ उन्होंने इस प्रगति का श्रेय पारदर्शी शासन, जवाबदेही तय करने और नेतृत्व की दूरदृष्टि को दिया। उन्होंने कहा कि केवल औद्योगिक क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कृषि और सेवा क्षेत्र ने भी वृद्धि दर्ज की है।
अग्रवाल ने कहा कि 2047 तक उत्तर प्रदेश को विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य राज्य के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि को तेज करने, उच्च मूल्य विनिर्माण जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल में निवेश करने और सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा ऑटोमोबाइल विनिर्माण के औद्योगिक क्लस्टरों के लिए सक्षम बुनियादी ढांचा तैयार करने से जुड़ा होगा।
उन्होंने बताया कि हरदोई और लखनऊ के बीच बनने वाला मेगा टेक्सटाइल हब इस दिशा में एक कदम होगा और सरकार चमड़ा तथा फुटवियर हब विकसित करने पर भी विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि श्रम-प्रधान उद्योग रोजगार सृजन की कुंजी हैं, साथ ही पारंपरिक शिल्प जैसे हैंडलूम, पीतल के बर्तन और मिट्टी के बर्तन को समर्थन और प्रोत्साहन देना भी आवश्यक है।
इस वर्ष की शुरुआत में अग्रवाल के मंत्रालय के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आबकारी नीति 2025-26 लागू हुई, जिसके तहत विदेशी शराब और बीयर की अलग-अलग दुकानों को समेकित दुकानों से बदला जा रहा है। उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग ने एक बयान में कहा, ‘नई नीति के तहत विदेशी शराब और बीयर की अलग-अलग दुकानों को समेकित दुकानों से बदला जा रहा है।’
राज्य ने गत में लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पहली बार ‘यूपी आबकारी निवेशक सम्मेलन’ आयोजित किया ताकि निर्माण, वितरण और मार्केटिंग तक फैली शराब मूल्य शृंखला में निवेश को बढ़ावा दिया जा सके।
उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग को राज्य में ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड डिस्टिलरी और मादक पेय इकाइयां स्थापित करने के लिए 4,000 करोड़ रुपये से अधिक के नए निवेश प्रस्ताव मिले। अब तक राज्य भर में 11,000 करोड़ रुपये मूल्य की 55 आबकारी विभाग परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं। इनमें से 2,340 करोड़ रुपये मूल्य की 19 परियोजनाएं पहले ही चालू हो चुकी हैं, जबकि 27 अन्य परियोजनाएं स्थापित होने की प्रक्रिया में हैं। इससे पहले, आबकारी विभाग ने यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में निजी कंपनियों के साथ 40,000 करोड़ रुपये मूल्य के 135 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे।
उत्तर प्रदेश ने चालू वित्त वर्ष 26 के पहले आठ महीनों (अप्रैल-नवंबर) में 35,144 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व दर्ज किया, जो राज्य आबकारी विभाग के 63,000 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य का 55 प्रतिशत है।
यूपी का आबकारी राजस्व वित्त वर्ष 17 में लगभग 17,000 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 53,000 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 26 के अप्रैल-नवंबर अवधि में एकत्र किए गए 35,144 करोड़ रुपये वित्त वर्ष 25 की समान अवधि की तुलना में 4,742 करोड़ रुपये या 16 प्रतिशत अधिक हैं। अग्रवाल के अनुसार, विभाग ने नवंबर 2025 में 4,486 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व एकत्र किया, जबकि नवंबर 2024 में 4,071 करोड़ रुपये एकत्र किया गया था।
आबकारी राजस्व में यह वृद्धि राज्य की पूंजी और राजस्व व्यय के लिए अतिरिक्त अवसर प्रदान करने की उम्मीद है क्योंकि यह 2030 तक एक लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के लिए काम कर रहा है।