facebookmetapixel
Advertisement
Vedanta Q1FY27 results: कमजोर रुपये और महंगी धातुओं से मुनाफा 72% उछला, ₹5,473 करोड़ पहुंचाGold Demand: पीएम मोदी की अपील और महंगे सोने का असर, मांग 6% घटी; पर बरकरार रहा निवेशकों का भरोसा5paisa Capital खरीदेगी Trendlyne: ₹207 करोड़ में हुई डील, बनेगा देश का पहला AI-फर्स्ट ब्रोकरM&M Q1 Results: दमदार नतीजों से शेयर में आई तेजी, दिन के निचले स्तर से 4% से ज्यादा उछला स्टॉकआधार, पैन या पासपोर्ट गुम होने पर क्या करें? नया डॉक्यूमेंट पाने का आसान तरीकाJuniper Green Energy IPO: आज से खुला ₹1,800 करोड़ का IPO; जानें प्राइस बैंड, लॉट साइज, GMP और अन्य डीटेलहोर्मुज छोड़ अब इस रास्ते से तेल भेज रहा सऊदी अरब, क्या है पूरी रणनीति?चीन की अर्थव्यवस्था पर संकट के संकेत? सरकार ने तुरंत बदली स्ट्रैटेजीMP Farmer Protest: मप्र सरकार ने आंशिक रूप से मानी मांगें, किसानों का प्रदर्शन खत्मITR Filing Alert: अभी तक नहीं भरा ITR? अब 48 घंटे से भी कम बचा है समय, जानें ऑनलाइन फाइल करने का आसान तरीका

प्राइवेट कंपनियों के लिए छोटे परमाणु प्लांट संचालित करेगा NPCIL, Bharat Small Reactors होगा नाम; इस साल होगी शुरुआत

Advertisement

अधिकारी ने बताया कि परमाणु ऊर्जा अधिनियम के तहत परमाणु ऊर्जा क्षेत्र केवल सरकारी PSU (सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम) के लिए खुला है।

Last Updated- October 06, 2024 | 6:52 PM IST
Nuclear Power

भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम (NPCIL) पहली बार निजी कंपनियों के लिए 220 मेगावाट क्षमता के छोटे परमाणु संयंत्रों का संचालन करेगा और निजी कंपनियां परियोजना के लिए वित्तपोषण और भूमि, दोनों उपलब्ध कराएंगी। यह जानकारी एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने दी।

अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इस मोर्चे पर विकास इस साल के अंत तक या 2025 की शुरुआत में होने की संभावना है। अधिकारी ने कहा, ‘‘परमाणु संयंत्र के लिए धन और भूमि निजी कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी, लेकिन संयंत्र का प्रबंधन एनपीसीआईएल द्वारा किया जाएगा।’’

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत आने वाला सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम एनपीसीआईएल द्वारा संयंत्र का प्रबंधन और संचालन करने के चलते परमाणु ऊर्जा अधिनियम में संशोधन की जरूरत नहीं पड़ेगी।

अधिकारी ने बताया कि परमाणु ऊर्जा अधिनियम के तहत परमाणु ऊर्जा क्षेत्र केवल सरकारी पीएसयू (सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम) के लिए खुला है। अधिकारी ने बताया कि 220 मेगावाट के इन रिएक्टर को ‘भारत लघु रिएक्टर’ के नाम से जाना जाएगा, जिसके लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) में पहले से ही शोध कार्य जारी है।

अधिकारी ने बताया कि छोटे रिएक्टर के निर्माण के लिए ‘प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर’ (पीएचडब्ल्यूआर) तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है। अधिकारी ने बताया कि छोटे रिएक्टर के साथ, निषेध क्षेत्र को कम करके 500 मीटर तक किया जा सकता है। वर्तमान में निषेध क्षेत्र एक से 1.5 किलोमीटर तक है। शुरुआत में ध्यान स्टील जैसे उद्योगों पर होगा।

अधिकारी ने बताया कि कई निजी क्षेत्रों के पास अपने स्वयं के ‘कैप्टिव प्लांट’ हैं और भविष्य में छोटे रिएक्टर उनकी जगह ले सकते हैं। जुलाई में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट पेश करते हुए घोषणा की थी कि सरकार भारत लघु रिएक्टर की स्थापना और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर के अनुसंधान और विकास में निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी करेगी।

विदेशी इकाई के सहयोग से एक छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर के निर्माण के लिए प्रति मेगावाट लागत लगभग 100 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट हो सकती है। उन्हंने कहा कि हालांकि, पीडब्ल्यूएचआर तकनीक के साथ, यह 16 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट पर किया जा सकता है।

Advertisement
First Published - October 6, 2024 | 6:52 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement