facebookmetapixel
Advertisement
Bank Strike on 12 Feb: बैंक ग्राहकों के लिए बड़ा अलर्ट! SBI समेत देशभर के बैंक कल रहेंगे बंद; ये सेवाएं रहेंगी प्रभावितजॉब जॉइनिंग में अब नहीं होगी देरी! Aadhaar App से मिनटों में बैकग्राउंड वेरिफिकेशन, जानें डीटेल्सऑफिस का किराया आसमान पर! REITs के लिए खुला कमाई का सुपर साइकिलभारत से ट्रेड डील की फैक्ट शीट में US ने किया संसोधन; दालें हटाई गईं, $500 अरब खरीद क्लॉज भी बदलामौजूदा स्तर से 33% चढ़ेगा हॉस्पिटल कंपनी का शेयर! ब्रोकरेज ने कहा- वैल्यूएशन है अच्छा; न चूकें मौकाGold Silver Price Today: सोने चांदी की कीमतों में उछाल, खरीदारी से पहले चेक करें आज के दामMSCI में फेरबदल: IRCTC इंडेक्स से बाहर, L&T Finance समेत इन स्टॉक्स में बढ़ सकता है विदेशी निवेशQ3 नतीजों के बाद 50% से ज्यादा चढ़ सकता है रेस्टोरेंट कंपनी का शेयर, ब्रोकरेज बोले – लगाओ दांवसेना के हथियारों पर अब भारत का पूरा नियंत्रण, नई रक्षा नीति से बदलेगा डिफेंस सिस्टमनिफ्टी के उतार-चढ़ाव के बीच NTPC और CPSE ETF में बना मौका, ब्रोकरेज ने बताए टारगेट

Lithium Processing: लिथियम बैटरी बनाने के लिए भारत कर रहा 7 देशों से बातचीत, चीन पर निर्भरता कम करने पर जोर

Advertisement

भारत ने ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, बोलीविया, ब्रिटेन, जापान और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों से तकनीकी सहायता प्राप्त करने के लिए बातचीत शुरू कर दी है।

Last Updated- April 25, 2024 | 6:13 PM IST
lithium processing

भारत अपनी महत्वाकांक्षी लिथियम खनन और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को गति देने के लिए विदेशी सहयोग की तलाश कर रहा है। इस प्रयास का मुख्य लक्ष्य चीन पर निर्भरता कम करना है। सूत्रों के अनुसार भारत ने ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, बोलीविया, ब्रिटेन, जापान और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों से तकनीकी सहायता प्राप्त करने के लिए बातचीत शुरू कर दी है।

गौर करने वाली बात है कि पिछले साल ही खान मंत्रालय ने ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के साथ चर्चा शुरू की थी। इसके अलावा, भारत सरकार और कुछ निजी कंपनियों ने बोलीविया, ब्रिटेन, जापान और दक्षिण कोरिया से भी मदद मांगी है। यह खबर सूत्रों के हवाले से आई है।

रूस ने भी दिखाई दिलचस्पी 

सूत्रों के मुताबिक, भारत को लिथियम प्रोसेसिंग में मदद करने के लिए एक और देश सामने आया है। रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम के हिस्से TENEX ने भारत सरकार से संपर्क किया है। TENEX ने भारत को लिथियम प्रोसेसिंग तकनीक देने और भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम करने की पेशकश की है।

गौरतलब है कि भारत अपने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी बनाने के लिए लिथियम खनन उद्योग विकसित करना चाहता है। रूस की यह पेशकश भारत को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और तेल पर निर्भरता कम करने में मददगार हो सकती है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, “लिथियम प्रोसेसिंग तकनीक हासिल करने के लिए भारत अन्य देशों की ओर रुख कर रहा है। दरअसल, भारत का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी बनाने के लिए आत्मनिर्भर बनना है। इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने रूस के साथ सहयोग की संभावनाएं तलाश शुरू कर दी हैं।

भारत ने शुरू नीलामी की प्रक्रिया

गौरतलब है कि भारत ने जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ में पाए गए लिथियम भंडारों के लिए खनन अधिकारों की नीलामी भी शुरू कर दी है। जुलाई तक इन खदानों के लिए बोली लगाने वाली कंपनियों की शॉर्टलिस्टिंग की उम्मीद है। ओला इलेक्ट्रिक, श्री सीमेंट, कोल इंडिया, वेदांता और जिंदल पावर जैसी दिग्गज कंपनियां इन लिथियम ब्लॉकों में काफी दिलचस्पी दिखा रही हैं.

लिथियम ब्लॉक की नीलामी जीतने वाली कंपनियों को सिर्फ खनन का अधिकार नहीं मिलेगा। दरअसल, उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि निकाले गए लिथियम को बैटरी उद्योग के लिए इस्तेमाल लायक बनाया जाए। इसके लिए उन्हें लिथियम को सांद्र रूप (concentrate) या रासायनिक पदार्थों में बदलना होगा। कुछ कंपनियां इस प्रक्रिया के लिए विदेशी मदद ले रही हैं।

रिफाइनरी बनने में लगेंगे 600 से 700 मिलियन डॉलर

उदाहरण के लिए, श्री सीमेंट नाम की कंपनी लिथियम रिफाइनरी बनाने के लिए एक ऑस्ट्रेलियाई फर्म से तकनीकी सहायता को लेकर बातचीत कर रही है। इस रिफाइनरी की लागत लगभग 600 से 700 मिलियन डॉलर आने का अनुमान है। जानकारों का मानना है कि भले ही विदेशी मदद ली जाए, भारत को कच्चे लिथियम को बैटरी बनाने के लिए उपयुक्त सामग्री में बदलने में कुछ साल लग सकते हैं।

लिथियम खनन भारत के लिए एक सुनहरा अवसर जरूर है, लेकिन राह आसान नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि लिथियम की खोज से लेकर उसके इस्तेमाल लायक बनने तक में कई साल लग सकते हैं। दरअसल, आमतौर पर लिथियम खदानों की खोज से लेकर व्यावसायिक उत्पादन तक चार से सात साल का समय लग जाता है। रीताब्रत घोष (ICRA लिमिटेड की वाइस प्रेसिडेंट) का कहना है कि लिथियम को निकालने के बाद उसे इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया में भी भारत को तकनीकी मदद की जरूरत पड़ेगी।

फिलहाल भारत में लिथियम को प्रोसेस करने के लिए जरूरी प्लांट नहीं

वहीं, गणेश शिवमणि (सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस) का मानना है कि फिलहाल भारत में लिथियम को प्रोसेस करने के लिए जरूरी प्लांट नहीं हैं। लिहाजा, कंपनियां कच्चे लिथियम को संभावतया प्रोसेसिंग के लिए चीन भेजेंगी और फिर तैयार धातु को वापस भारत लाना पड़ेगा।

पड़ोसी चीन दुनिया की लिथियम प्रोसेसिंग क्षमता का करीब दो-तिहाई हिस्सा कंट्रोल करता है। यानी लिथियम को निकालने के बाद उसे बैटरी बनाने के लिए उपयुक्त बनाने की प्रक्रिया में चीन का एकछत्र राज है। यही वजह है कि भारत को अपनी बैटरी इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने के लिए खुद की लिथियम प्रसंस्करण क्षमता विकसित करने की सख्त जरूरत है।

नीति आयोग के मुताबिक, 2030 तक भारत को सालाना 56,000 मीट्रिक टन लिथियम कार्बोनेट की आवश्यकता होगी। इस चुनौती से पार पाने के लिए नीति आयोग ने भारत में लिथियम प्रोसेसिंग प्लांट को स्थापित करने के लिए इन्सेंटि देने की सिफारिश की है। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

Advertisement
First Published - April 25, 2024 | 6:13 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement