facebookmetapixel
तरुण गर्ग बने ह्युंडै मोटर इंडिया के MD & CEO, पहली बार भारतीय को मिली कमानरुपये की कमजोरी, बाजार की गिरावट का असर; 2025 में सिमटा भारत के अरबपतियों का क्लबVodafone Idea Share: 50% टूट सकता है शेयर, ब्रोकरेज ने चेताया; AGR मामले में नहीं मिली ज्यादा राहत2026 में 1,00,000 के पार जाएगा सेंसेक्स ? एक्सपर्ट्स और चार्ट ये दे रहे संकेतसिगरेट पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी, 10% तक टूट ITC और गोडफ्रे फिलिप्स के शेयर; 1 फरवरी से लागू होंगे नियमहोटलों को एयरलाइंस की तरह अपनाना चाहिए डायनेमिक प्राइसिंग मॉडल: दीक्षा सूरीRBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट, क्रिप्टो पर सतर्कता; CBDC को बढ़ावाउभरते आर्थिक दबाव के बीच भारतीय परिवारों का ऋण बढ़ा, पांच साल के औसत से ऊपरनया साल 2026 लाया बड़े नीतिगत बदलाव, कर सुधार और नई आर्थिक व्यवस्थाएंसरकार ने 4,531 करोड़ रुपये की बाजार पहुंच समर्थन योजना शुरू की

मनमाने तरीके से सजा दिए जाने के आरोपों पर कार्रवाई

भारत की न्याय व्यवस्था में अभी भी लाखों मामले लंबित हैं, जिनमें बच्चों के खिलाफ करीब 3 लाख यौन अपराध से जुड़े मामले हैं।

Last Updated- November 05, 2024 | 10:15 PM IST
supreme court

सरकार मनमाने तरीके से सजा दिए जाने के आरोपों से निपटने के लिए फौजदारी मामलों में सजा देने के नियमों में बदलाव करने की योजना बना रही है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब कुछ साल पहले 2022 में दुष्कर्म के एक आरोपी को सुनवाई के महज 30 मिनट के भीतर अदालत द्वारा मौत की सजा सुना दी गई थी। उस फैसला के चौतरफा आलोचना होने के बाद सरकार अब यह पहल करने जा रही है।

हालांकि, बाद में बिहार के उच्च न्यायालय ने उस आदेश को पलट दिया था और मामले की दोबारा सुनवाई का आदेश देते हुए कहा कि आरोपी को अपनी बात रखने तक का मौका नहीं दिया और निचली अदालत के न्यायाधीश ने जल्दबाजी में अपना फैसला सुना दिया। साथ ही न्यायालय ने न्यायाधीशों को और अधिक प्रशिक्षण देने की भी बात कही। इसके बाद अब सरकार अपराध की सजा से मेल खाती एक ग्रेडिंग प्रणाली विकसित करने की योजना बना रही है जिससे सजा का मानक तय किया जा सके। इस तरह देश की न्यायिक व्यवस्था ब्रिटेन, कनाडा और न्यूजीलैंड की तर्ज पर बनाने की तैयारी है।

एक सूत्र ने बताया कि विधि एवं न्याय मंत्रालय दिसंबर के आसपास सर्वोच्च न्यायालय को अपनी योजना की जानकारी देगा। इससे पहले अदालत ने सरकार से बिहार के मामले के बाद एक व्यापक सजा नीति अपनाने पर विचार करने के लिए भी कहा था।

सरकारी सूत्रों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उन्हें मीडिया से बात करने का अधिकार नहीं है। मंत्रालय ने भी इस बारे में पूछे जाने पर कोई जवाब नहीं दिया।

हालांकि, सूत्रों ने कहा कि योजना को अभी मूर्त रूप नहीं दिया गया है और इसमें न्यूनतम सजा के लिए एक सुझाव दिया गया है ताकि खासकर निचली अदालतों के न्यायाधीशों के लिए अपराध से अनुरूप सजा सुनाने में मदद मिल सके। यह नीति सभी आपराधिक मामलों पर लागू होगी, लेकिन साल 2021 में बिहार में हुई सुनवाई यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम (पॉक्सो) के तहत की गई है, जिसमें तीन साल से लेकर मौत की सजा तक का प्रावधान है।

सूत्र ने बताया कि लोगों के आक्रोश को देखते हुए आमतौर पर ऐसे मामलों में निचली अदालत के न्यायाधीश कठोर सजा सुनाते हैं। साल 2018 में भी मध्य प्रदेश की एक निचली अदालत ने बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को मृत्युदंड दिया था। आरोपी की गिरफ्तारी के 23 दिनों के बाद ही न्यायाधीश ने उसे सजा सुनाई थी। उस वक्त भी इलाके के लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया था। मुकदमे की रफ्तार और कानूनी बचाव के बारे में उठाए जाने वाले सवालों से आरोपी के अधिकारों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

भारत की न्याय व्यवस्था में अभी भी लाखों मामले लंबित हैं, जिनमें बच्चों के खिलाफ करीब 3 लाख यौन अपराध से जुड़े मामले हैं। उनमें से कई फास्ट ट्रैक अदालतों में हैं, जो खास तौर पर यौन उत्पीड़न से जुड़ी घटनाओं की सुनवाई के लिए स्थापित की गई हैं।

First Published - November 5, 2024 | 10:15 PM IST

संबंधित पोस्ट