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घर है तो कर्ज की क्यों फिकर

Last Updated- December 08, 2022 | 9:02 AM IST

अगर आप रकम जुटाना चाह रहे हैं तो इसके लिए आपकी संपत्ति एक बेहतर विकल्प हो सकती है।


यह पर्सनल लोन से सस्ता होता है क्योंकि अधिकांश बैंक संपत्ति के एवज में आसानी से ऋण दे देते हैं।उदाहरण के लिए अगर कोई बैंक आपको 18 से 20 फीसदी ब्याज पर पर्सनल लोन दे रहा है तो वह 14 से 15 फीसदी ब्याज दर पर ही संपत्ति के कागजात रखवाकर ऋण दे देगा।

संपत्ति के एवज में आपको कितना कर्ज दिया जाना है यह कई बातों पर निर्भर करता है। सबसे पहले तो यह देख जाता है कि आपकी आय कितनी है।

फिर इस बात की जांच की जाएगी कि संपत्ति का मूल्य कितना है और कर्ज चुकाने का आपका पिछला रिकॉर्ड कैसा रहा है। हालांकि कोई व्यक्ति ऋण पाने का हकदार है या नहीं इसके लिए अलग अलग बैंकों के खुद के मापदंड होते हैं पर कुछ शत सभी बैंकों के लिए लगभग एक जैसी हैं।

तनख्वाह पाने वाले कर्मचारियों के लिए ऋण पाने की कुछ शतै

न्यूनतम आयु : 21 साल

मैच्योरिटी के समय आवेदक की अधिकतम आयु: 60 साल

प्रतिमाह न्यूनतम आय: 12,000 रुपये


स्व-रोजगार लोगों के लिए:

न्यूनतम आयु : 21 साल

मैच्योरिटी के समय आवेदक की अधिकतम आयु: 65 साल

सालाना न्यूनतम आय: प्रति वर्ष 1,50,000 रुपये

ऋण की रकम: किसी व्यक्ति की संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर एक तय फीसदी (आमतौर पर 40 से 60 फीसदी) तक ऋण दिया जाता है।

पर ऋण का दायरा कितना होगा, आमतौर पर सभी बैंक इस बारे में पहले ही घोषणा कर चुके होते हैं। उदाहरण के लिए 25,000 रुपये से 1.5 करोड़ रुपये के बीच कुछ भी।

कार्य अनुभव: चाहे आप किसी कंपनी में काम कर रहे हों या फिर स्वरोजगार से जुड़े हों, बैंक इस बारे में जानकारी लेता है कि आप किसी पेशे में कितने सालों से रहे हैं।

कर्ज भुगतान का सामर्थ्य: आपकी आय, जमा राशि, दूसरे कर्जों और घर से जुड़े दूसरे खर्चों को ध्यान में रख कर बैंक यह तय करते हैं कि आप ऋण चुकाने में समर्थ हैं या नहीं।

इन सभी जानकारियों और आपके पुराने कर्ज और देनदारियों पर विचार करने के बाद बैंक यह तय करते हैं कि आपको कितना ऋण दिया जाना चाहिए।

याद रखें कि ऋण के लिए आवेदन देते वक्त आपको फाइन प्रिंट के बारे में सारी जानकारी होनी चाहिए। उदाहरण के लिए पर्सनल लोन की तुलना में संपत्ति के एवज में लिए गए ऋण पर प्रोसेसिंग और समय से पूर्व भुगतान की फीस कम होती है।

कौन-कौन से शुल्क

समय से पूर्व कर्ज के भुगतान पर शुल्क

ब्याज दर को फिक्स्ड से फ्लोटिंग में तब्दील करने पर शुल्क
ब्याज दर को फ्लोटिंग से फिक्स्ड में तब्दील करने पर शुल्क

प्रोसेसिंग शुल्क:
आपके ऋण आवदेन की प्रोसेसिंग पर बैंक आपसे एक तय शुल्क वसूलती है जिसे प्रोसेसिंग शुल्क कहते हैं।

अलग-अलग बैंक अपने हिसाब से प्रोसेसिंग शुल्क वसूल करते हैं। कुछ बैंक ऋण स्वीकृत होने से पहले ही आपसे प्रोसेसिंग शुल्क लेते हैं।

यह तब लिया जाता है जब तमाम दस्तावेजों के साथ आप ऋण के लिए आवेदन करते हैं। आपने जितने कर्ज के लिए आवदेन किया है आमतौर पर उसका 0.25 से 2 फीसदी आपसे प्रोसेसिंग शुल्क के तौर पर वसूला जाता है।

पूर्व भुगतान पर शुल्क: अगर कर्ज लेने वाला कर्ज की मियाद पूरी होने से पहले ही बैंकों को ऋण वापस करता है तो ऐसे में उसे एक पेनेल्टी चुकानी पड़ती है। इसे ही कर पूर्व भुगतान शुल्क कहते हैं।

आमतौर पर बैंकों को कर्ज में से जितना मूलधन चुकाना बाकी होता है उसका 1 फीसदी इस शुल्क के तौर पर लिया जाता है। पर अगर यह मूलधन कुल ऋण का 25 फीसदी से अधिक होता है तो
बैंक 1 से 4 फीसदी के बीच कुछ भी पूर्व भुगतान शुल्क के रूप में वसूलते हैं।

कुछ ऐसे बैंक भी होते हैं जो आपसे कोई पेनेल्टी वसूले बिना ही मियाद पूरी होने से पहले कर्ज के भुगतान की इजाजत देते हैं। लोगों को ऋण लेने से पहले यह ध्यान में रखना चाहिए कि वे कोई बैंक चुनें जो समय से पहले कर्ज चुकाने की सहूलियत उन्हें देता हो।

ब्याज दर को फिक्स्ड से फ्लोटिंग में बदलने पर शुल्क: अगर आपने फिक्स्ड दर पर ऋण लिया है और उसे फ्लोटिंग ब्याज दर में बदलना चाहते हैं तो बैंक इसके लिए आपसे एक शुल्क वसूलते हैं। कुल ऋण का जितना मूलधन बकाया है उस पर कुछ फीसदी शुल्क वसूला जाता है। यह शुल्क 0.25 से 2 फीसदी के बीच कुछ होता है।

ब्याज दर को फ्लोटिंग से फिक्स्ड में बदलने पर शुल्क: अगर आपने फ्लोटिंग दर पर ऋण लिया है और उसे फिक्स्ड ब्याज दर में बदलना चाहते हैं तो बैंक इसके लिए आपसे एक शुल्क वसूलते हैं। कुल ऋण का जितना मूलधन बकाया है उस पर कुछ फीसदी शुल्क वसूला जाता है।

यह शुल्क 1 से 2 फीसदी के बीच कुछ होता है।कुछ बैंक देर से ईएमआई चुकाने, नो-डयू सर्टिफिकेट एनओसी, चेक स्वैपिंग चार्ज, बाउंस चेक पर चार्ज, स्टेटमेंट चार्ज और डुप्लिकेट रीपेमेंट शेडयूल चार्ज भी वसूलते हैं।

First Published - December 14, 2008 | 9:35 PM IST

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