facebookmetapixel
Advertisement
Stocks To Watch Today: आज इन शेयरों पर रहेगी बाजार की नजर, जानिए कहां बन सकता है मुनाफे का मौकाएशिया-प्रशांत क्षेत्र के शीर्ष 5 व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल हुआ IGI एयरपोर्ट, चांगी और इंचियोन को छोड़ा पीछेबंगाल की राजनीति का ‘चाणक्य’ मौन: पूर्व रेल मंत्री और TMC के दिग्गज रणनीतिकार मुकुल रॉय का निधनमुंबई को पछाड़ गुरुग्राम बना देश का नंबर 1 अल्ट्रा लग्जरी हाउसिंग मार्केट, बाजार ₹24,000 करोड़ के पारयूनिकॉर्न बनने की रफ्तार में 40 गुना उछाल, स्टार्टअप दुनिया में AI कंपनियों ने मचाया तहलकाऔपनिवेशिक छाप से मुक्ति! राष्ट्रपति भवन से हटी लुटियंस की प्रतिमा, उनकी जगह अब विराजे ‘राजाजी’2 दिन 25 सत्र 40 नेता: बिज़नेस स्टैंडर्ड ‘मंथन’ मंगलवार से शुरू, ‘भविष्य के लिए तैयार भारत’ पर होगी चर्चागुणवत्ता और पारदर्शी ऑडिट पर दवा नियामक का जोर; 1,500 एक्सपर्ट्स की करेगा नियुक्तिIDFC फर्स्ट बैंक ने हरियाणा सरकार के ₹590 करोड़ का भुगतान जल्द करने का आश्वासन दियापुराने घरों के पुनर्विकास पर टैक्स को लेकर बड़ी राहत, ITAT मुंबई ने संपत्ति मालिकों के पक्ष में सुनाया फैसला

IBC के तहत रिकवरी बढ़कर 37% के करीब, दिवाला और ऋण शोधन अधिनियम से आया उछाल

Advertisement

आरबीआई की ‘ट्रेंड्स ऐंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया’ रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक सभी तरीकों से मिलाकर समग्र रिकवरी दर 2024-24 में बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई

Last Updated- December 29, 2025 | 10:52 PM IST
Reserve Bank of India (RBI)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत फंसे कर्ज से भारतीय बैंकों की रिकवरी की दर पिछले वित्त वर्ष के 28.3 प्रतिशत की तुलना में वित्त वर्ष 2024-25 में 37 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा सिक्योरिटाइजेशन ऐंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनैंशियल असेट ऐंड इनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंट्रेस्ट (सरफेसी) एक्ट में भेजे गए मामलों में भी रिकवरी दर पिछले साल के 25.4 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 31.5 प्रतिशत हो गई है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ‘ट्रेंड्स ऐंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया’ रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक सभी तरीकों से मिलाकर समग्र रिकवरी दर 2024-24 में बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई, जो पहले के 17.2 प्रतिशत से अधिक है। हालांकि रिकवरी के लिए सरफेसी और आईबीसी को भेजे जाने वाले  मामलों की संख्या कम हो गई है।  

आंकड़ों से पता चला है कि आईबीसी के तहत राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) को भेजे गए मामलों की संख्या 2023-24 में 1,004 से घटकर 2024-25 में 732 रह गई, जबकि इस अवधि के दौरान शामिल कुल राशि 1.64 लाख करोड़ रुपये से घटकर 1.49 लाख करोड़ रुपये रह गई। मामलों और राशि में गिरावट के बावजूद वसूली पिछले वर्ष के 46,340 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 54,528 करोड़ रुपये हो गई।

इसी तरह सरफेसी अधिनियम के तहत भेजे गए मामलों की संख्या पिछले वर्ष के 2,16,571 से घटकर 2024-25 में 2,15,709 रह गई, जबकि इसमें शामिल राशि 1.19 लाख करोड़ रुपये से घटकर 1.03 लाख करोड़ रुपये रह गई। हालांकि सरफेसी के माध्यम से वसूली इसी अवधि के दौरान 30,416 करोड़ रुपये से बढ़कर 32,466 करोड़ रुपये हो गई।

रिजर्व बैंक ने रिपोर्ट में कहा, ‘वसूली का प्रमुख तरीका आईबीसी  बना रहा। इसके बाद सरफेसी का स्थान है। कुल वसूली गई राशि में आईबीसी  की हिस्सेदारी बढ़ी है।’ रिजर्व बैंक ने कहा कि वसूली गई कुल राशि में आईबीसी की हिस्सेदारी पिछले वर्ष के 49.5 प्रतिशत की तुलना में 2024-25 में बढ़कर 52.4 प्रतिशत हो गई।

इस बीच बैंकों ने संपत्ति पुनर्गठन कंपनियों (एआरसी) को गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) बेचकर अपनी बैलेंस शीट भी दुरुस्त की है।

2024-25 के दौरान पिछले साल के बकाया के प्रतिशत के रूप में पूरी तरह से रिडीम की गई सिक्योरिटी रिसीट का अनुपात  पिछले साल के 38.2 प्रतिशत से बढ़कर 41.8 प्रतिशत हो गया। यह इस तरीके से हुई रिकवरी का एक संकेतक है।  

पुनर्गठन कंपनियों द्वारा ली गई संपत्तियों की बुक वैल्यू 2024-25 में 58 प्रतिशत बढ़कर 16.19लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल यह 10.25 लाख करोड़ रुपये थी।

Advertisement
First Published - December 29, 2025 | 10:52 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement