वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण | फाइल फोटो
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों द्वारा बीमा सहित वित्तीय उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को कहा कि उन्हें (बैंकों को) अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान देना चाहिए।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय निदेशक मंडल को बजट के बाद संबोधित करने के उपरांत पत्रकारों से बातचीत में सीतारमण ने कहा, ‘बैंकों को अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान देना चाहिए। मैंने हमेशा से इस बात पर आपत्ति जताई है कि आप उस बीमा को बेचने में अधिक समय लगा रहे हैं जिसकी आवश्यकता ही नहीं है और यह मामला आरबीआई और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के बीच फंसा रहा।’
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ग्राहक को भ्रामक जानकारी देकर उत्पाद की बिक्री पर दिशानिर्देशों का मसौदा 11 फरवरी को जारी किया था। इसमें कहा गया है कि यदि किसी ग्राहक को गलत तरीके से उत्पाद या सेवा दी जाती है, तो बैंक को ग्राहक द्वारा चुकाई गई पूरी राशि लौटानी होगी और स्वीकृत नीति के अनुसार हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। इस पर चार मार्च तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई हैं।
आरबीआई ने कहा कि गलत तरीके से बिक्री पर कड़े नियम एक जुलाई से लागू होंगे। सीतारमण ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि आरबीआई यह स्पष्ट मार्गदर्शन दे रहा है कि गलत तरीके से बिक्री क्यों बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संदेश, बैंकों तक जाना चाहिए कि आप गलत बिक्री नहीं कर सकते। यह शब्द गलत बिक्री किसी को ठेस पहुंचाने के बजाय, शब्दकोश में एक और शब्द बनकर रह गया है।’
उन्होंने कहा कि कई मामलों में बैंक ग्राहकों को बीमा उत्पाद खरीदने के लिए कहते हैं जबकि उनके पास पहले से आवश्यक बीमा होता है। आरबीआई यह सोचकर ऐसे मामलों की निगरानी नहीं कर रहा था कि यह बीमा नियामक के दायरे में आता है। इरडा का मानना था कि बैंक उसके प्रत्यक्ष नियमन में नहीं आते। इस नियामकीय अंतर के कारण ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति गिरवी रखकर गृह ऋण लेता है, तो उससे अतिरिक्त बीमा लेने को क्यों कहा जाता है जबकि जोखिम पहले से ‘कवर’ होता है।